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ED: डिजिटल अरेस्ट में 7 करोड़ रुपये की उगाही करने वालों ने यूं खपाया धन, क्या है कंबोडिया-वियतनाम कनेक्शन?

Fri, 20 Feb 2026 07:43 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 20 Feb 2026 07:43 PM IST
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ED: This is how those who extorted Rs 7 crore in digital arrest spent money, what is Cambodia-Vietnam connecti
ईडी - फोटो : अमर उजाला

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट मामले में खुलासा किया है कि साइबर अपराधियों ने सात करोड़ रुपये की राशि को बड़ी चतुराई के साथ कई बैंक खातों में जमा किया था। ये बैंक खाते, उन लोगों के थे, जिन्हें साइबर धोखाधड़ी की कोई जानकारी नहीं थी।  वे अपना पैसे में बढ़ोतरी, रोजगार या लोन चाहते थे, इसलिए उन्होंने आरोपियों को अपने बैंक खाते में रुपये जमा कराने की इजाजत दे दी। आरोपियों ने अपराध की रकम को तेजी से ट्रांसफर करने के लिए 'एएमएमएफओआरडब्लूआरडी' नामक एक एपीके एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया। आरोपी अर्पित राठौर ने कंबोडिया, वियतनाम आदि के व्यक्तियों को विभिन्न फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। इसके जरिए उसने अपने बाइनेंस खाते में आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (क्रिप्टोकरेंसी) के रूप में कमीशन प्राप्त किया था।

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बता दें कि 'बाइनेंस', एक अग्रणी क्रिप्टो एक्सचेंज है। यहां पर व्यक्तिगत अकाउंट खोला जाता है। इस खाते के माध्यम से बिटकॉइन, एथेरियम और सैकड़ों अन्य डिजिटल संपत्तियों को खरीदने, बेचने, स्टोर करने और ट्रेड करने की सुविधा मिलती है। यह अकाउंट, डिजिटल वॉलेट की तरह काम करता है, जहां पर खाता धारक सुरक्षित रूप से अपनी क्रिप्टो करेंसी को रख सकते हैं। एसपी ओसवाल की डिजिटल गिरफ्तारी के दौरान, सीबीआई के अधिकारियों का रूप धारण करने वाले जालसाजों ने उनसे 7 करोड़ रुपये की उगाही की थी। अपराध की रकम शुरू में मेसर्स रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों में जमा की गई थी। ईडी के मुताबिक, मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों को गुवाहाटी के आरोपी रूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर नियंत्रित करते थे। 
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आरोपियों ने अपराध से प्राप्त धनराशि को व्यवस्थित तरीके से कई फर्जी बैंक खातों में स्थानांतरित किया। इससे उन्हें साइबर अपराध की धनराशि को छिपाने और उसका दुरुपयोग करने में सुविधा हुई। इस धनराशि के एक हिस्से को विभिन्न फर्जी संस्थाओं के माध्यम से छिपाया गया। राशि को, व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग तंत्रों का उपयोग करके भारत से बाहर भेजा गया। शेष धनराशि को 2 लाख से 5 लाख रुपये की छोटी-छोटी राशियों में विभिन्न फर्जी बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद बैंक खातों से तुरंत नकदी निकाल ली गई। इस नकदी का उपयोग आभासी डिजिटल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया गया। कमीशन रखने के बाद इन आभासी डिजिटल संपत्तियों को विदेशी नागरिकों के खातों में जमा कर दिया गया। ये फर्जी खाते आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को ऋण दिलाने या रोजगार देने के झूठे वादे करके खोले गए थे।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने ओसवाल के डिजिटल गिरफ्तारी मामले से संबंधित धन शोधन की जांच के सिलसिले में, रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतानु चौधरी और उनकी फर्म मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ 19 फरवरी को विशेष न्यायालय पीएमएलए, जालंधर में अभियोग दायर किया है। अब तक की जांच में पता चला है कि आठ अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त अपराध की धनराशि भी 28 अगस्त 2024 को मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खाते में जमा की गई थी। इससे पहले, ईडी द्वारा एक अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किया गया था, जिसके तहत 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की गई। इस मामले में आरोपी रूमी कलिता और आरोपी अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी, फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

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