आंध्र कौशल विकास निगम मामला: ईडी ने 23 करोड़ की नई संपत्ति जब्त की, जांच में सीएम नायडू की नहीं मिली भूमिका
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (डीटीएसपीएल) और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर से शुरू हुई है, जिसमें आंध्र प्रदेश सरकार को धोखा देने और सीमेंस परियोजना में निवेश किए गए सरकारी फंड को अन्य उद्देश्यों के लिए हेराफेरी करने का आरोप है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) सीमेंस परियोजना मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 करोड़ रुपये से अधिक की नई संपत्ति जब्त की है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि एजेंसी को अपनी जांच के दौरान मामले में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की कोई भूमिका नहीं मिली है।
नायडू की पार्टी केंद्र में मोदी सरकार की सहयोगी है। पिछले साल राज्य की सीआईडी ने इस मामले में नायडू को गिरफ्तार किया था, जब वाईएस जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री थे।
पिछले साल 9 सितंबर को, सीआईडी ने नायडू को 371 करोड़ रुपये के कौशल विकास निगम घोटाला मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया था। यह घोटाला तब हुआ था जब नायडू 2014-2019 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री थे।
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (डीटीएसपीएल) और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर से शुरू हुई है, जिसमें आंध्र प्रदेश सरकार को धोखा देने और सीमेंस परियोजना में निवेश किए गए सरकारी फंड को अन्य उद्देश्यों के लिए हेराफेरी करने का आरोप है।
ईडी ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत संपत्तियों को कुर्क करने के लिए एक अस्थायी आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे में स्थित आवासीय संपत्तियों के अलावा बैंक जमा और शेयरों की जब्ती की गई। इन संपत्तियों का मूल्य 23.54 करोड़ रुपये है।
जांच में पाया गया कि डीटीएसपीएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) विकास विनायक खानवेलकर, सौम्याद्रि शेखर बोस उर्फ सुमन बोस (सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व एमडी) और उनके करीबी सहयोगियों मुकुल चंद्र अग्रवाल और सुरेश गोयल ने शेल की मदद से सरकारी धन को डायवर्ट किया। बहुस्तरीय लेनदेन के माध्यम से निष्क्रिय संस्थाओं और सामग्रियों/सेवाओं की आपूर्ति के बहाने फर्जी चालान के बिलों पर धन की हेराफेरी की गई।
संघीय एजेंसी ने बताया कि फंड की हेराफेरी के लिए प्रवेश प्रदाताओं की सेवाएं ली गईं, जिसके लिए उन्हें कमीशन का भुगतान किया गया।
एजेंसी ने पहले इस जांच के तहत डीटीएसपीएल की 31.20 करोड़ रुपये की सावधि जमा जब्त की थी। खानवेलकर, बोस, अग्रवाल और गोयल को ईडी ने गिरफ्तार कर विशाखापत्तनम में विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया था।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.