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Supreme Court: सॉलिसिटर जनरल बोले- ईडी ने 23000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की रकम वसूल कर पीड़ितों को लौटाई

Thu, 07 Aug 2025 01:32 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 07 Aug 2025 01:32 PM IST
सार

सॉलिसिटर जनरल के इस नए दावे से ईडी की कार्यप्रणाली को लेकर एक नई बहस छिड़ सकती है। जहां एक ओर वह पीड़ितों को बड़ी रकम वापस करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अदालतें उनकी कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठा रही हैं।

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ED recovered Rs 23,000 cr laundered money, distributed it to victims: SG to SC
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने करीब 23,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की रकम वसूल की है और इसे वित्तीय अपराधों के शिकार पीड़ितों को वापस दिया है। यह जानकारी देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को दी। यह बयान सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ के सामने दिया गया, जिसमें मुख्य बीआर गवई और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे। यह सुनवाई 2 मई को दिए गए उस विवादित फैसले की समीक्षा याचिकाओं को लेकर हो रही थी, जिसमें भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) की परिसंपत्तियों को बेचने का आदेश दिया गया था और जेएस डब्ल्यू स्टील की समाधान योजना को खारिज कर दिया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले का फैसला वापस लिया
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को अपना पुराना फैसला वापस ले लिया और अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की समीक्षा याचिकाओं पर फिर से सुनवाई हो रही है। जब सुनवाई के दौरान बीपीएसएल मामले में ईडी की जांच का जिक्र हुआ, तो सीजेआई ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'यहां भी ईडी मौजूद है।' इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, 'एक ऐसी बात बताना चाहता हूं जो कभी किसी अदालत में नहीं कही गई, ईडी ने अब तक 23000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की रकम वसूल की है और उसे पीड़ितों को लौटाया है।' उन्होंने यह भी साफ किया कि जो पैसा वसूला जाता है, वह सरकार के पास नहीं रहता, बल्कि उसे अपराध के पीड़ितों को वापस दिया जाता है।
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CJI ने पूछा- सजा कितनों को हुई?
इस पर सीजेआई ने सवाल किया, 'सजा कितनों को हुई? दोषसिद्धि दर क्या है? इस पर एसजी मेहता ने जवाब में कहा कि दोषसिद्धि की दर कम है, और इसका कारण देश की आपराधिक न्याय प्रणाली की खामियां हैं। इस पर सीजेआई ने चुटकी लेते हुए कहा, 'भले ही उन्हें सजा नहीं हुई हो, पर आपने उन्हें ट्रायल के बिना ही वर्षों तक सजा जैसा अनुभव करवा दिया है।'


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ईडी के छापों पर भी चर्चा
एसजी मेहता ने कहा कि कुछ मामलों में, जब नेताओं के यहां छापेमारी हुई तो इतनी नकदी मिली कि नोट गिनने की मशीनें भी बंद हो गईं और नई मशीनें मंगवानी पड़ीं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ यूट्यूब चैनलों पर ऐसे मामलों में झूठे नैरेटिव बनाए जा रहे हैं, खासकर जब कोई बड़ा नेता फंसता है। इस पर सीजेआई ने कहा, 'हम नैरेटिव पर फैसले नहीं करते... मैं टीवी न्यूज नहीं देखता, बस अखबार की हेडलाइंस ही सुबह 10-15 मिनट देखता हूं।' वहीं सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि उन्हें भरोसा है कि न्यायालय सोशल मीडिया या बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होता।

ED की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट की कई बेंचों ने ईडी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, खासकर विपक्षी नेताओं से जुड़े मामलों में। 21 जुलाई को एक अन्य मामले में सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था कि, 'ईडी अपनी सीमाएं पार कर रहा है।' यह टिप्पणी उस स्वतः संज्ञान मामले में की गई थी, जिसमें ईडी ने दो वरिष्ठ वकीलों को समन किया था, जो कि केवल अपने मुवक्किलों को कानूनी सलाह दे रहे थे।
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