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ED: सरकारी नौकरियां बेचने के लिए दोबारा छापी ओएमआर शीट, आरोपियों के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, 3 करोड़ बरामद

Thu, 30 Oct 2025 08:24 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 30 Oct 2025 08:24 PM IST
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ED raids premises of accused for reprinting OMR sheets to sell government jobs, seizes Rs 3 crore
ईडी की कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम बंगाल में अयोग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी देने के लिए ओएमआर शीट दोबारा से छाप दी गई। जिन नौकरी मिली, उनसे पैसे लिए गए। योग्य प्रत्याशी, नियुक्ति पत्र मिलने की राह देखते रह गए। इस केस में राज्य सरकार में मंत्री, दूसरे नेता और अधिकारी, सब मिले हुए थे। परीक्षा में गड़बड़ी करने के लिए ऐसे फर्म मालिक को ओएमआर सीट की छपाई का टेंडर दिया, जो आरोपियों के इशारे पर कुछ भी कर सकता था। ओएमआर शीट बदलने के बाद अयोग्य लोगों का सरकारी नौकरी में चयन हो गया। वजह, परीक्षा में अयोग्य उम्मीदवारों के फुल नंबर आ गए। ईडी ने अब आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। वहां से 3 करोड़ रुपये की नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कोलकाता जोनल कार्यालय ने नगर पालिका भर्ती घोटाले में 28-29 अक्तूबर को कोलकाता और उसके आसपास 7 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है। तलाशी के दौरान कवर किए गए परिसरों में नगर पालिका भर्ती घोटाले के मुख्य संदिग्धों/आरोपियों के सहयोगियों के कार्यालय और आवास शामिल हैं। रेडिएंट एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड, गरोडिया सिक्योरिटीज लिमिटेड, जीत कंस्ट्रक्शन एंड कंसल्टेंट्स आदि के परिसरों के साथ-साथ इन कंपनियों/फर्मों के प्रमोटरों/निदेशकों के आवासों की भी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान संपत्ति के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और लगभग 3 करोड़ रुपये की नकदी सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। तलाशी में एक कार्यप्रणाली का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तहत नगर पालिका भर्ती घोटाले में मुख्य संदिग्धों/आरोपियों के दागी धन को फर्जी सेवाओं की आड़ में कंपनियों/फर्मों के माध्यम से लूटा जा रहा था। ईडी ने हाल ही में 10 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल के विधायक और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के कार्यालय सहित 13 परिसरों पर तलाशी ली थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज के अलावा 45 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई थी। 
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ईडी जांच में सामने आया है कि इस केस में रातोंरात ओएमआर सीट बदल दी गई। यानी उनकी नई छपाई हो गई। उसके बाद जिन अयोग्य लोगों का चयन किया जाना था, उनके नंबर फुल आ गए। दो तरह के लोगों का चयन किया गया। एक, जो अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के करीबी थे और दूसरे, जिन्होंने किसी भी तरह से नौकरी के लिए पैसा दिया था। ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। यहां पर ये  उल्लेख करना उचित है कि ईडी ने सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में 2022 के सीएएन 1 के साथ 2022 के डब्ल्यूपीए 9979 में 2023 के सीएएन 2 के रूप में एक आवेदन कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया था। उसमें पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में फैले नगर पालिकाओं में विभिन्न पदों की भर्ती में की गई अवैधताओं से संबंधित अपने निष्कर्षों पर एक स्थिति रिपोर्ट रखी गई थी।

इससे पहले प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी द्वारा जांच के दौरान, 2023 में अयान सिल और अन्य से जुड़े विभिन्न परिसरों में तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान, अयान सिल के कब्जे से डिजिटल साक्ष्य के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। उन्हें जब्त कर लिया गया। आपत्तिजनक दस्तावेजों की जांच से पता चला था कि भर्ती घोटाला, केवल शिक्षकों की भर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न नगर पालिकाओं [कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, कमरहाटी, टीटागढ़, बारानगर, हालिसहर, दक्षिण दमदम (एन), दमदम आदि] तक फैला हुआ है। जाँच में सामने आया है कि मजदूरों, सफाई कर्मचारियों, क्लर्कों, चपरासी, एम्बुलेंस परिचारकों, सहायक मिस्त्रियों, पंप ऑपरेटरों, हेल्परों, स्वच्छता सहायकों और ड्राइवरों आदि की भर्ती में भी गोलमाल हुआ है।


ईडी की अब तक की गई जांच से पता चला है कि विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं आदि से संबंधित ठेके एक ही कंपनी मेसर्स एबीएस इन्फोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक- अयान सिल) को प्रश्न पत्रों की छपाई, ओएमआर शीट की छपाई, उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने आदि के लिए दिए गए थे। अयान सिल, लोक सेवकों और राजनीतिक नेताओं सहित अन्य उच्च पदाधिकारियों ने कुछ निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर आपस में एक आपराधिक साजिश रची। उस साजिश के अनुसरण में मेसर्स एबीएस इन्फोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अयान सिल ने ओएमआर शीट की छपाई, डिजाइनिंग और मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग करके उम्मीदवारों की ओएमआर शीट में हेरफेर किया। 

पैसे के बदले कई नगर पालिकाओं में कई अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्तियों को सुगम बनाया। मतलब, जिन उम्मीदवारों के पैसे पहुंच गए या बड़ी राजनीतिक सिफारिश की चिट्ठी आ गई, उनकी ओएमआर शीट बदल दी गई। उन्हें इतने नंबर दे दिए गए, कि उनका चयन पक्का हो गया। ईडी ने इससे पहले नगर पालिकाओं के विभिन्न पदाधिकारियों के परिसरों, विधायक सुजीत बोस और पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली थी।

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