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ED: 600 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी बदलने के मामले में ईडी का छापा, आरोपी के बैंक खाते में जमा दो करोड़ फ्रीज
Mon, 24 Feb 2025 11:11 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 24 Feb 2025 11:11 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विभिन्न भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से करीब 600 करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी को अवैध रूप से बदलने के मामले में छापा मारा। ईडी ने कई राज्यों में तलाशी के बाद आरोपी चिराग तोमर के बैंक खाते में जमा दो करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रीज कर दिया।
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ईडी की टीम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विभिन्न भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से करीब 600 करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी को अवैध रूप से बदलने के मामले में छापा मारा। ईडी ने कई राज्यों में तलाशी के बाद आरोपी चिराग तोमर के बैंक खाते में जमा दो करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रीज कर दिया।
ईडी ने कहा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 20 फरवरी को दिल्ली, राजस्थान के जयपुर और महाराष्ट्र के मुंबई में छापे मारे गए थे। यह मामला विभिन्न भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों में लगभग 600 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी बदलने और उसके बाद लाभार्थियों को धनराशि के हस्तांतरण से संबंधित है।
ईडी ने बताया कि मामले की जांच एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि चिराग तोमर नामक एक भारतीय नागरिक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वेबसाइट कॉइनबेस की नकल करने वाली फर्जी या नकली वेबसाइटों के इस्तेमाल के जरिये सैकड़ों पीड़ितों से दो करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि चुराने के आरोप में अमेरिका में जेल की सजा काट रहा है। तोमर को पिछले वर्ष नवंबर में अमेरिका की एक अदालत ने जेल की सजा सुनाई थी।
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ऐसे दिया जाता था धोखा
ईडी ने कहा कि सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन द्वारा विश्वसनीय वेबसाइटों को इस तरह से धोखा दिया गया था कि जब वेबसाइट को खोजा जाता था, तो नकली वेबसाइट सबसे ऊपर दिखाई देती थी। जबकि नकली वेबसाइट बिल्कुल असली जैसी दिखती थी। केवल इसमें संपर्क विवरण अलग होता था। जब यूजर लॉगिन करते थे, तो नकली वेबसाइट इसे गलत दिखाती थी। इसलिए यूजर नकली वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर संपर्क करते थे जो उन्हें तोमर के बनाए गए कॉल सेंटर से जोड़ता था।
जब आरोपियों को पीड़ितों के खातों तक पहुंच मिल जाती थी, तो वे उनकी क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स को अपने क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में स्थानांतरित कर देते थे। ईडी ने पाया कि चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी को वेबसाइट localbitcoins.com पर बेचा जाता था और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों में भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाता था। इसके बाद पैसा तोमर और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया था। ईडी ने कहा कि इस धोखाधड़ी से चिराग और उसके परिवार ने करीब 15 करोड़ रुपये कमाए।
संबंधित वीडियो
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ईडी ने कहा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 20 फरवरी को दिल्ली, राजस्थान के जयपुर और महाराष्ट्र के मुंबई में छापे मारे गए थे। यह मामला विभिन्न भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों में लगभग 600 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी बदलने और उसके बाद लाभार्थियों को धनराशि के हस्तांतरण से संबंधित है।
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ईडी ने बताया कि मामले की जांच एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि चिराग तोमर नामक एक भारतीय नागरिक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वेबसाइट कॉइनबेस की नकल करने वाली फर्जी या नकली वेबसाइटों के इस्तेमाल के जरिये सैकड़ों पीड़ितों से दो करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि चुराने के आरोप में अमेरिका में जेल की सजा काट रहा है। तोमर को पिछले वर्ष नवंबर में अमेरिका की एक अदालत ने जेल की सजा सुनाई थी।
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ऐसे दिया जाता था धोखा
ईडी ने कहा कि सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन द्वारा विश्वसनीय वेबसाइटों को इस तरह से धोखा दिया गया था कि जब वेबसाइट को खोजा जाता था, तो नकली वेबसाइट सबसे ऊपर दिखाई देती थी। जबकि नकली वेबसाइट बिल्कुल असली जैसी दिखती थी। केवल इसमें संपर्क विवरण अलग होता था। जब यूजर लॉगिन करते थे, तो नकली वेबसाइट इसे गलत दिखाती थी। इसलिए यूजर नकली वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर संपर्क करते थे जो उन्हें तोमर के बनाए गए कॉल सेंटर से जोड़ता था।
जब आरोपियों को पीड़ितों के खातों तक पहुंच मिल जाती थी, तो वे उनकी क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स को अपने क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में स्थानांतरित कर देते थे। ईडी ने पाया कि चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी को वेबसाइट localbitcoins.com पर बेचा जाता था और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों में भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाता था। इसके बाद पैसा तोमर और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया था। ईडी ने कहा कि इस धोखाधड़ी से चिराग और उसके परिवार ने करीब 15 करोड़ रुपये कमाए।
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