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पूर्व सीएम के मामा का कारनामा: पैसे लेकर पेपर लीक कराया, फिर हुआ डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी के पदों पर चयन
Wed, 02 Sep 2026 06:46 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 02 Sep 2026 06:46 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक सितंबर को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर ज़िलों में पांच जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत की गई। यह मामला छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (सीजीपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
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ईडी ने यह जांच आर्थिक अपराध शाखा, एंटी क्रप्शन ब्यूरो रायपुर और सीबीआई रायपुर द्वारा दर्ज दो मामलों के आधार पर शुरू की थी। ये केस सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों के खिलाफ 2020 और 2021 में हुई स्टेट सर्विस परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दर्ज किया गया था।
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जांच में पता चला कि सीजीपीएससी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र प्राइवेट ब्रोकरों के ज़रिए आरोपियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को गैर-कानूनी पैसे के बदले लीक किए गए थे। इस तरह डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस जैसे सीनियर सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन सुनिश्चित किया गया। आगे की जांच में पता चला कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से कैश में पैसे लिए। इसके जरिए तीन करोड़ रुपये से ज़्यादा की 'अपराध से कमाई' की गई।
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इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए। उत्कर्ष चंद्राकर ने उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए केके चंद्रवंशी (जो छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन पर्सनल असिस्टेंट और उनके मामा थे) के पद का इस्तेमाल किया। ईडी ने पहले भी इस मामले में तलाशी अभियान चलाया था। मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों और बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर यह साबित हुआ कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से हुई कमाई से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल थे।
इन गतिविधियों में कमाई करना, उसे हासिल करना, अपने पास रखना, छिपाना, लेयरिंग करना, ट्रांसफर करना, इस्तेमाल करना और उसे साफ़-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाना शामिल था। उन्हें पीएमएलए 2002 की धारा 19 के तहत 01.09.2026 को गिरफ़्तार किया गया। तलाशी के दौरान जांच से जुड़े अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागज़ात और अन्य सबूत ज़ब्त किए गए।