ED Questioning Aishwarya Rai Bachchan : ईडी को क्यों ‘नई सीबीआई’ कहा जाता है, इसके अधिकार और शक्तियां क्या हैं?
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विस्तार
बहुचर्चित पनामा पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अमिताभ बच्चन की बहू और अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन से पूछताछ कर रहा है। ऐश्वर्या से दिल्ली के ईडी दफ्तर में पूछताछ हो रही है। ईडी कई बार भारतीय राजनेताओं, उद्योगपतियों और मशहूर हस्तियों के लिए भयानक दुःस्वपन की तरह बन जाता है। चुनाव से पहले ईडी के जरिए राजनीतिक बदला लेने के भी आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में इस एजेंसी के बारे में जानने की दिलचस्पी जरूर जगती है। इस रिपोर्ट में हम आपको विस्तार से ईडी की कार्यशैली और उसके अधिकारों के बारे में बता रहे हैं।क्या है ईडी
ईडी केंद्रीय राजस्व विभाग के अधीन विशेष वित्तीय जांच एजेंसी है। यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) और फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत पूछताछ और जांच करती है। इसका गठन 1957 में विदेशी मुद्रा से संबंधित कॉरपोरेट जगत और नागरिक प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों को देखने के लिए किया गया था। एजेंसी अपने अस्तित्व में आने के बाद से एक छोटी प्रवर्तन एजेंसी बनी रही। 1973 में विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) में संशोधनों के साथ ईडी को कुछ अधिकार प्राप्त हुए।
फेरा बहुत शक्तिशाली कानून था
अगले तीन दशकों तक इसने फेरा से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की। महारानी गायत्री देवी, जयललिता, टीटीवी दिनाकरण, हेमा मालिनी, फिरोज खान, विजय माल्या औरअशोक जैन के खिलाफ कथित फेरा उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया। फेरा एक बहुत शक्तिशाली कानून था। इसमें एक प्रवर्तन अधिकारी (एक निरीक्षक के बराबर) को भी किसी को भी गिरफ्तार करने और बिना वारंट के किसी भी व्यावसायिक परिसर में प्रवेश करने की अनुमति थी।
यहां तक कि एक सहायक ईओ भी बिना वारंट के किसी वाहन या व्यक्ति की तलाशी ले सकता है। तब ईडी पर आरोपियों को हिरासत में लेकर थर्ड-डिग्री टॉर्चर देने के भी आरोप लगे लेकिन फिर भी ईडी का कार्यक्षेत्र काफी हद तक कॉरपोरेट जगत तक ही सीमित था। 90 के दशक तक कारोबारियों के बीच इसकी छवि एक खूंखार एजेंसी की बनी रही।
2005 से पीएमएलए प्रभाव में
लेकिन 2002 में, पीएमएलए की शुरुआत के बाद इसने आपराधिक प्रकृति के वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को देखना शुरू कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार पीएमएलए विधेयक को संसद में ले कर आई 2002 में इसे पारित किया गया। अब ईडी को आपराधिक अभियोजन की शक्तियां हासिल हो गई। पीएमएलए यूपीए सरकार में 2005 से प्रभाव में आया, जब वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे। इत्तेफाक से ईडी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया मामले की जांच के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया था।
ईडी के अधिकार क्या
ईडी के अधिकारी जांच अधिकारी द्वारा जारी किए गए सर्च मेमो के आधार पर देश में कहीं भी छापेमारी कर सकते हैं।
किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने, आरोपी की संपत्ति कुर्क करने और जमानत की सख्त शर्तों के कारण यह सीबीआई से कहीं अधिक शक्तिशाली एजेंसी बन गई है।
2009 और 2013 में संशोधनों के माध्यम से ईडी की ताकत और बढ़ी। इसके प्रावधान व्यावहारिक रूप से ईडी को सीबीआई से कहीं अधिक शक्तिशाली बनाते हैं।
यह देश का एकमात्र अधिनियम है जहां एक जांच अधिकारी के समक्ष दर्ज किया गया बयान अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य है।
देश के 29 कानून और 160 धाराएं हैं जिनके तहत ईडी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर सकता है।
यदि कोई व्यक्ति इन धाराओं के तहत अपराध करता है, तो उसके अर्जित धन को ‘अपराध से अर्जित आय’ समझा जाता है। यदि उस पैसे का उपयोग संपत्ति खरीदने या विदेशों में निवेश करने के लिए किया जाता है तो यह मामला पीएमएलए के अंतर्गत आता है और गलत तरीके से अर्जित धन को जब्त किया जा सकता है। हालांकि ईडी पीएमएलए के तहत मामलों में शामिल व्यक्तियों या कंपनियों की संपत्ति केवल कुर्क कर सकती है, केवल अदालतें ही उन्हें जब्त कर सकती हैं। 2019 तक पिछले 10 साल में ईडी ने 58,333 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
ईडी की सबसे बड़ी चुनौती क्या
ईडी अधिकारियों के मुताबिक, विदेशों में जमा खातों और पैसों की जानकारी हासिल करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। संदिग्ध व्यक्तियों और संस्थाओं के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए एजेंसी विभिन्न देशों को अनुरोध पत्र भेजती है। जिनमें से अधिकतर पत्रों का कोई जवाब नहीं मिलता है और जांच गंभीर रूप से प्रभावित होती है। कुछ मामलों में सबूतों के अभाव में अदालत किसी मामले को खारिज कर सकती है। पर्याप्त जांचकर्ताओं की कमी भी ईडी के लिए एक बड़ी चुनौती है।
2005 के बाद से एक दर्जन से भी कम मामलों में हासिल करने के बावजूद ईडी पिछले कुछ सालों में प्रमुख राजनीतिक मामलों में सीबीआई की तुलना में अधिक सक्रिय रहा है। चाहे मौजूदा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए शासन हो या पिछली सरकारें, अक्सर विपक्षी दलों के नेताओं की जांच, छापेमारी और पूछताछ करने के लिए ईडी की आलोचना की गई है।
राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर ईडी के इस्तेमाल का आरोप सबसे पहले चिदंबरम पर ही लगता है। कहा जाता है कि उनके वित्त मंत्री रहते हुए ही ईडी ने राजनीतिक मामलों को उठाना शुरू किया। बाबा रामदेव पर ईडी की कार्रवाई यूपीए के शासनकाल में हुई। ईडी ने मधु कोड़ा के मामले, 2 जी घोटाले की जांच, एयरसेल-मैक्सिस मामला, कॉमनवेल्थ गेम्स, सहारा, बेल्लारी खनन और रॉबर्ट वार्डा जैसे मामलों की जांच करने से सुर्खियां पाईं।