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ED: एसबीआई सहित कई बैंकों के साथ 200 करोड़ की धोखाधड़ी, बैलेंस शीट में छेड़छाड़ तो शेल कंपनियों से हेराफेरी

Tue, 03 Feb 2026 06:27 PM IST
संध्या डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Tue, 03 Feb 2026 06:27 PM IST
सार

ईडी ने एक बड़े गिरोह का खलासा किया है, जो बैंको के साथ धोखाधड़ी के मामले में लिप्त है। इन आरोपियों ने 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। 

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ED Fraud ₹200 crore several banks through manipulation balance sheets and transactions with shell companies
ED - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ईडी ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें कई लोगों ने मिलकर आपराधिक साजिश रची और बैंकों के समूह के साथ धोखाधड़ी कर दी। बैंकों के समूह में एसबीआई भी शामिल है। आरोपियों ने 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। कहीं पर बैलेंस शीट में छेड़छाड़ तो कहीं शेल कंपनियों के जरिए धन की हेराफेरी की गई। पहले तो धोखाधड़ी से बैंक ऋण प्राप्त किए गए और उसके बाद लोन की राशि का इस्तेमाल, स्वीकृत उद्देश्य के लिए नहीं किया। ऋण की राशि को सुनियोजित तरीके से इधर-उधर कर दिया गया। ईडी ने इस मामले में मेसर्स भारत पेपर्स लिमिटेड (बीपीएल) और उसके निदेशकों/संबंधित व्यक्तियों अनिल कुमार, प्रवीण कुमार, बलजिंदर कुमार, राजिंदर कुमार और अनिल कश्यप के खिलाफ धन शोधन के अपराध के लिए अभियोग शिकायत दर्ज की है। 

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ईडी के मुताबिक, 2008 से 2013 की अवधि के दौरान, आरोपियों ने ऋण राशि के गलत इस्तेमाल से उसका गबन कर दिया। आरोपियों ने फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन का हस्तांतरण और नकद निकासी की। इसके अलावा बैंकों के संघ के बाहर, बैंक खाते खोलना/संचालित करना, उनमें बैंक प्राप्तियों को स्थानांतरित करना, ऋण/चालू/नकद क्रेडिट खातों से बड़े पैमाने पर नकद निकासी और कागजी संस्थाओं/शेल कंपनियों के माध्यम से धन का हस्तांतरण, आरोपियों की गतिविधियों में शामिल था। साथ ही फर्जी चालानों के माध्यम से, कारखाना परिसर में मशीनों के पुर्जों को चुपके से हटाना व बेचना, वित्तीय वर्ष 2010-11 से वित्तीय वर्ष 2012-13 की बैलेंस शीट में असामान्य स्टॉक राइट-ऑफ सहित खातों की पुस्तकों में हेरफेर, ऐसी हरकतें भी आरोपियों द्वारा की गई। 

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जांच के दौरान यह पाया गया कि समूह ने मेसर्स डीईई ईएसएस इंजीनियर्स, मेसर्स त्रिवेनी इंजीनियर्स, मेसर्स एरो स्कैफटेक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स आर एस इंडस्ट्रीज, मेसर्स एरो एंटरप्राइजेज, मेसर्स सुका मोल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स कहलोन ऑटो इंडस्ट्रीज और मेसर्स रीजेंट फैब्रिकेशन्स जैसी फर्जी कंपनियों/संस्थाओं का संचालन/उपयोग धन की हेराफेरी के लिए किया। इसके अलावा, फर्जी संस्थाओं/शेल कंपनियों के माध्यम से धन की हेराफेरी का खुलासा हुआ, जिसमें धन को मेसर्स इंडो ग्लोबल टेक्नो-ट्रेड लिमिटेड (गैर-कार्यशील) में स्थानांतरित किया गया। उसके बाद धन को शेयर पूंजी/निवेश के रूप में बीपीएल में स्थानांतरित किया गया। आरोपियों ने यह सब  ऑडिट ट्रेल को छिपाने के लिए किया था। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जम्मू उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने गत सप्ताह विशेष न्यायालय (पीएमएलए), जम्मू के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स भारत पेपर्स लिमिटेड (बीपीएल) और उसके निदेशकों/संबंधित व्यक्तियों अनिल कुमार, परवीन कुमार, बलजिंदर कुमार, राजिंदर कुमार और अनिल कश्यप के खिलाफ धन शोधन के अपराध के लिए अभियोग शिकायत दर्ज की है। ईडी ने सीबीआई, एसीबी, जम्मू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। यह मामला, एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के संघ के साथ हुए लगभग 200 करोड़ रुपये के लोन की धोखाधड़ी से संबंधित है।

इससे पहले, ईडी ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर इस मामले में तलाशी अभियान चलाया था। जांच एजेंसी ने तलाशी के दौरान, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इसके अलावा, एक करोड़ रुपये से अधिक की नकदी भी बरामद की गई। अपराध से प्राप्त धन के सृजन और उसे छुपाने से संबंधित मामले में 30 लाख रुपये और लगभग 600 ग्राम सोना भी जब्त किया गया। जांच के दौरान, मेसर्स भारत पेपर्स लिमिटेड के निदेशकों में से एक, अनिल कुमार को भी पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया।

ईडी की जांच में आगे पता चला है कि अपराध से प्राप्त धन को इधर-उधर किया गया। उसका इस्तेमाल अचल संपत्तियों के अधिग्रहण/निर्माण के लिए किया गया। ईडी ने 66.77 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इनमें कठुआ जिले में औद्योगिक भूमि और उस पर निर्मित संपत्ति, जो मेसर्स भारत पेपर्स लिमिटेड के नाम पर है। लुधियाना के मॉडल टाउन में 2 आवासीय संपत्तियां, जो अंजू अग्रवाल (पत्नी अनिल कुमार अग्रवाल), राजिंदर कुमार अग्रवाल और परवीन कुमार अग्रवाल के नाम पर हैं। 

यह भी पाया गया कि कॉर्पोरेट देनदार, मेसर्स भारत पेपर्स लिमिटेड के खिलाफ एनसीएलटी, चंडीगढ़ बेंच के समक्ष दिवालियापन और दिवालिया संहिता के तहत कार्यवाही की जा रही है। ईडी की जांच में मेसर्स बीपीएल और उसके आरोपी निदेशकों द्वारा कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में असहयोग करना पाया गया। एनसीएलटी, चंडीगढ़ बेंच के समक्ष शुरू की गई कार्यवाही में रिकॉर्ड न सौंपना भी शामिल है। 

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