ED Raids: ईडी की टीम ने तीन मेट्रो शहरों में 16 जगह की छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई यह कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने शुक्रवार (दो दिसंबर) को तीन मेट्रो शहरों चेन्नई, मुंबई और दिल्ली में 16 जगह छापेमारी की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने शुक्रवार (दो दिसंबर) को तीन मेट्रो शहरों चेन्नई, मुंबई और दिल्ली में 16 जगह छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत की गई। ईडी ने पीएमएलए के तहत कार्रवाई करते हुए आर अरविंद, एस गोपालकृष्णन, एस भरतराज, ब्लूमैक्स कैपिटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के 3 निदेशकों और तूतीकोरिन के उनके सहयोगी जे अमरनाथ को गिरफ्तार किया और उन्हें पीएमएलए स्पेशल कोर्ट के समक्ष पेश किया। इन सभी को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि उसने पीएमएलए के तहत चेन्नई, मुंबई, दिल्ली में पांच शेयर ब्रोकरेज और वित्तीय सेवा कंपनियों और उसके प्रमोटरों के कार्यालय और आवासीय परिसरों को कवर करते हुए 16 परिसरों की तलाशी ली है। तलाशी में 1.04 करोड़ रुपये नकद, सोने और हीरे के आभूषण जब्त किए गए हैं।
108 करोड़ के फर्जीवाड़े में ईडी ने 4 को किया गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने 108 करोड़ के फर्जीवाड़े में निजी कंपनी के तीन निदेशकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर विशेष अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने चारों को 12 दिन की ईडी हिरासत में भेजा है। ईडी ने ब्लूमैक्स कैपिटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों आर अरविंद, एस गोपालकृष्णन, एस भरतराज और उनके सहयोगी तूतीकोरीन के अमरनाथ को गिरफ्तार किया।
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मोटे रिटर्न का झांसा देकर लोगों से अपनी कंपनी में निवेश कराया और आम जनता को 108 करोड़ रुपए का चूना लगाया। लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। पुलिस ने लोगों की शिकायत के आधार पर 2020 और 2021 के दौरान कई एफआईआर दर्ज की। एजेंसी
यूं दिया झांसा : अक्तूबर, 2019 में निदेशकों ने जानबूझकर अपनी कंपनी के सर्वर की झूठी हैकिंग कराई और उसके बाद निवेशकों को सूचित किया कि उनका पैसा डूब गया है। इसके बाद उन्होंने कुछ निवेशकों को धन का आंशिक भुगतान किया जबकि बाकियों का पैसा खा गए।
ईडी ने मनी लॉन्डि्रंग की जांच शुरू की और पाया कि निवेशकों के पैसे को वादे के अनुसार किसी भी व्यापारिक गतिविधियों में निवेश नहीं किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों ने विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से निवेशकों के पैसे का एक बड़ा हिस्सा डायवर्ट किया था। इन लोगों ने अपने और पत्नियों के नाम पर क्रिप्टो में भी रकम लगाई।