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ED: नगर पालिका भर्ती घोटाला में टीएमसी विधायक मदन मित्रा की मुश्किलें बढ़ीं, ईडी ने कई ठिकानों पर की छापेमारी

Sat, 13 Jun 2026 08:54 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 13 Jun 2026 08:54 AM IST
सार

ED Raids TMC MLA Madan Mitra: पश्चिम बंगाल के कामरहाटी से टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा के ठिकानों पर ईडी ने नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की है। एजेंसी ने सात परिसरों की तलाशी ली। ईडी का आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले नकदी और सोने के रूप में रिश्वत ली गई। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...

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ED conducts raids multiple locations Trouble mounts for TMC MLA Madan Mitra in municipality recruitment scam
टीएमसी विधायक मदन मित्रा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल में कथित नगर पालिका भर्ती घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक मदन मित्रा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ईडी ने मित्रा और उनसे जुड़े कुल सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
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ईडी का आरोप है कि विभिन्न नगर पालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति कराने के बदले रिश्वत ली गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रिश्वत नकदी और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए प्राप्त की गई। अधिकारियों का दावा है कि कामरहाटी नगर पालिका समेत कई नगर निकायों में हुई कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़े मामले में मदन मित्रा की भूमिका की जांच की जा रही है।
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जांच एजेंसी ने लगाए ये आरोप

जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि मदन मित्रा का संबंध ऐसी करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़ा हो सकता है। ईडी की टीमें दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और अन्य सबूतों की जांच कर रही हैं। फिलहाल छापेमारी के दौरान बरामद सामग्री और आगे की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
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ऐसे पहुंचीं जांच की आंच

ईडी को इस बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की जानकारी सबसे पहले तब मिली थी, जब एजेंसी पश्चिम बंगाल के स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी कर रही थी। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और सूचनाएं सामने आईं, जिसके बाद नगरपालिका भर्ती घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

बाद में, कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी नगरपालिका नौकरियों के बदले कैश मामले में समानांतर जांच शुरू कर दी। जैसे-जैसे इन दोनों केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने जांच को आगे बढ़ाया, राज्य के मंत्रियों और सत्ताधारी दल के नेताओं सहित कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए।

एक दिन पहले तृणमूल के पार्षदों को ईस्तीफा देने का दिया था निर्देश

इस कार्रवाई से एक दिन पहले विधायक मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से इस घटना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करने की भी अपील की थी।

दरअसल, गोपाल साहा ने शुक्रवार को चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके कुछ घंटों बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल साहा को लगातार अपमान, उपेक्षा और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा था। उनके अनुसार, चेयरमैन के रूप में गोपाल साहा की प्रशासनिक शक्तियां लगभग समाप्त कर दी गई थीं और उन्हें ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया था, जहां सम्मान बचाने के लिए इस्तीफा देना ही एकमात्र विकल्प रह गया था।


मदन मित्रा ने अपने पोस्ट में लिखा कि कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन को जिस तरह की अभद्रता और अपमान का सामना करना पड़ा, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने सभी पार्षदों और तृणमूल समर्थकों से इस मामले में तत्काल विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को अपमानित और परेशान किया जा रहा है। 
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