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ED: बैंक का संचालक एक ही परिवार, ग्राहकों से धोखा; जमा खातों पर न ब्याज दिया और न मूलधन लौटाया, हड़प ली राशि

Sat, 19 Jul 2025 03:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 19 Jul 2025 03:41 PM IST
सार

ईडी ने कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन मामले की जांच शुरू की थी। आरोप लगाया गया था कि बैंक ने अपने ग्राहकों को उनके सावधि जमा या बैंक में रखे बचत खातों पर न तो ब्याज दिया और न ही मूलधन वापस किया।

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ED: bank run by same family cheated customers neither paid interest on deposit accounts nor returned principal
ED - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 17 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत बंगलूरू और रामनगर जिलों में 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसमें शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक नियमिथा का कार्यालय और इसके अध्यक्ष एन. श्रीनिवास मूर्ति व अन्य आरोपी या संदिग्ध व्यक्तियों के आवासीय परिसर शामिल हैं। तलाशी की कार्यवाही के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, धन शोधन के अपराध से प्राप्त आय से अर्जित संपत्तियों का विवरण एकत्र किया गया है। ये एक ऐसा बैंक था, जिसका संचालक एक ही परिवार के हाथ में था। ग्राहकों के साथ धोखा किया गया। जमा खातों पर ग्राहकों को न तो ब्याज दिया गया और न ही उनका मूलधन लौटाया। राशि हड़प ली गई। 

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ईडी ने कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर धन शोधन मामले की जांच शुरू की थी। आरोप लगाया गया था कि बैंक ने अपने ग्राहकों को उनके सावधि जमा या बैंक में रखे बचत खातों पर न तो ब्याज दिया और न ही मूलधन वापस किया। यह भी आरोप लगाया गया कि सुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक के अध्यक्ष और निदेशकों ने बैंक के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके बैंक के ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि को हड़प लिया और उनके साथ धोखाधड़ी की।
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ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत जांच के दौरान यह पाया कि एन श्रीनिवास मूर्ति, उनकी पत्नी श्रीमती धारिणी देवी और उनकी बेटी सुश्री मोक्षतारा, जो क्रमशः शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक नियमिथा के अध्यक्ष, निदेशक और कार्यात्मक निदेशक हैं, बैंक से धन के हेर-फेर में सहायक थे। ईडी की जांच में यह भी पता चला कि एस एन श्रीनिवास मूर्ति ने विभिन्न वित्तीय संस्थाएं स्थापित की, जैसे श्रुति सौहार्द क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी, श्री लक्ष्मी महिला को-ऑप सोसाइटी (श्रीनिवास मूर्ति की करीबी रिश्तेदार सुश्री रत्नम्मा द्वारा प्रबंधित) आदि और विभिन्न जमाकर्ताओं से धोखाधड़ी करने के इरादे से उनसे जमा राशि स्वीकार की।
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जांच के दौरान सामने आया है कि श्रीनिवास मूर्ति और अन्य लोग अपने करीबी सहयोगियों के नाम पर, बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए और कभी-कभी बिना किसी संपार्श्विक के ऋण स्वीकृत करते थे। बाद में ऋण खाते को एनपीए में बदल दिया गया। एन श्रीनिवास मूर्ति और अन्य ने उक्त राशि से अपने नाम पर संपत्तियां पंजीकृत करा लीं। ईडी की जाँच में यह भी पता चला है कि श्रीनिवास मूर्ति की बेटी सुश्री मोक्षतारा, सुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक नियमिथा के कर्मचारियों को एसआरओ के कार्यालय ले जाती थीं और उनके नाम पर संपत्तियाँ खरीदती थीं। साथ ही अपने नाम पर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी भी प्राप्त कर लेती थीं।

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