यस बैंक मामला: ईडी ने कॉक्स एंड किंग्स ग्रुप के सीएफओ और आंतरिक लेखा परीक्षक को किया गिरफ्तार
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प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को ग्लोबल टूर एंड ट्रैवल कंपनी कॉक्स एंड किंग्स (सीकेजी) ग्रुप के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अनिल खंडेलवाल और ग्रुप के आंतरिक लेखा परीक्षक नरेश जैन को यस बैंक मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।
Enforcement Directorate arrested Anil Khandelwal, CFO of Cox and Kings Group and Naresh Jain, Internal Auditor of Cox and Kings Group under section 19 of Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) for money laundering, in connection with Yes Bank case.
— ANI (@ANI) October 6, 2020विज्ञापन
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को ग्लोबल टूर एंड ट्रैवल कंपनी कॉक्स एंड किंग्स ग्रुप (सीकेजी) के मुख्य वित्तीय अधिकारी अनिल खंडेलवाल को यस बैंक मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। खंडेलवाल के अलावा, एजेंसी ने समूह के आंतरिक लेखा परीक्षक नरेश जैन को भी गिरफ्तार किया है।
ये गिरफ्तारियां धन शोधन रोधक अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत की गई हैं। दोनों आरोपियों को विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें सात दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है।
ईडी ने दावा किया था कि फर्म 3,642 करोड़ रुपये के ऋण भुगतान पर डिफॉल्टेड है। इस साल की शुरुआत में, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कॉक्स एंड किंग्स ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंधन से जुड़े परिसरों में छापे मारे थे।
8 मार्च को, एजेंसी ने बैंक के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राणा कपूर को गिरफ्तार कर लिया था। बैंक को भुगतान में चूक के बाद पिछले साल अक्तूबर में ट्रैवल कंपनी को दिवालियापन अदालत में भेजा गया था। ईडी लेनदारों के लेन-देन को स्कैन कर रहा था।
एजेंसी के बयान में उल्लेख किया गया है कि ईडी ने संबंधित बैंक अधिकारियों को कपूर के निर्देश के बारे में साक्ष्य एकत्र किए और कहा कि इसे वसूलने के लिए प्रयास जारी रखे।
ईडी ने जांच के दौरान पाया कि कॉक्स एंड किंग्स ने काल्पनिक ग्राहकों का इस्तेमाल कर राणा कपूर के बैंक से हजारों करोड़ रुपये उधार लिए। कर्ज ग्रस्त यस बैंक का कॉक्स एंड किंग्स ग्रुप पर 3,642 करोड़ रुपया बकाया है।
यस बैंक मामले में पीएमएलए की जांच से पता चला कि कॉक्स एंड किंग्स ग्रुप ने विदेशी सहायक कंपनियों की बैलेंस शीट में हेरफेर करके इसे समेकित वित्तीय जाली बनाया है। इसके अलावा, बैंकों को ऋण स्वीकृत करने के लिए कुछ जाली लेनदेन का पता चला है। आगे की जांच में पता चला कि यस बैंक से ऋण की मंजूरी राणा कपूर की ओर से दी गई थी। उन्होंने मानदंडों को दरकिनार कर इस संस्था को लोन दिया।
जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015 से 2019 के दौरान 15 गैर-मौजूद / काल्पनिक ग्राहकों को 3,908 करोड़ रुपये की बिक्री की गई थी। ईजीगो (Ezeego, सीकेजी की एक अन्य समूह इकाई) से प्राप्तकर्ताओं में दिखाए गए संग्रह की प्रमुखता बैंक के बयान में नहीं पाई गई थी।