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ED: फ्लैट-विला सौंपने का वादा कर 700 खरीदारों से की 360 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, ऑडिट से पता चली गबन की राशि

Tue, 06 Jan 2026 04:06 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 06 Jan 2026 04:06 PM IST
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ED: 700 buyers defrauded of Rs 360 crore by promising delivery of flats and villas Telangana
ED - फोटो : Adobe Stock

कंपनी ने लोगों को भरोसा दिया कि उन्हें तय समय पर फ्लैट/विला मिलेगा। इस भरोसे पर लोगों ने अपना पैसा लगा दिया। लंबा समय बीत गया, लेकिन लोगों को न तो फ्लैट मिला और न ही विला। ग्राहकों को फ्लैट देने या उनकी रकम वापस करने में कंपनी पूरी तरह विफल रही। लोगों की मेहनत की कमाई को हड़प लिया गया। हैदराबाद में फ्लैट/विला सौंपने का वादा किए गए 700 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 360 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। ईडी ने इस मामले में मेसर्स साहती इंफ्राटेक वेंचर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईवीपीएल) के पूर्व निदेशक और बिक्री एवं विपणन प्रमुख बी. लक्ष्मीनारायण और संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ कार्रवाई की है। कई संपत्तियों को अटैच किया गया है। 

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ईडी ने तेलंगाना पुलिस द्वारा मेसर्स एसआईवीपीएल, बी. लक्ष्मीनारायण और अन्य के खिलाफ विश्व स्तरीय आवासीय गेटेड समुदाय के निर्माण के लिए 'प्री-लॉन्च ऑफर' का विज्ञापन करने और संभावित खरीदारों से भारी रकम वसूलने के आरोप में दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। हालांकि, कंपनी ग्राहकों को फ्लैट देने या उनकी रकम वापस करने में विफल रही। इस प्रकार उनकी मेहनत की कमाई को हड़प लिया गया। ईडी की जांच में पता चला है कि एसआईवीआईपीएल के पास आवश्यक आरईआरए/एचएमडीए की अनुमति नहीं थी। परियोजना के लिए कोई एस्क्रो खाता भी नहीं था। निवेशकों से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई थी। उसे नकद में भी एकत्र किया गया। 
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आरोपियों ने मेसर्स एसआईवीपीएल की अवैध रूप से शुरू की गई परियोजनाओं में इन्वेंट्री की बिक्री के माध्यम से 800 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि एकत्र की। आवश्यक अनुमतियों/अनुमोदनों के बिना इन्वेंट्री की बिक्री के झूठे बहाने से जनता को धोखा दिया। उन्होंने खरीदारों से बड़ी मात्रा में नकद राशि एकत्र की, जिसे एसआईवीपीएल के खातों में दर्ज नहीं किया गया। इसका स्पष्ट उद्देश्य एसआईवीपीएल की धनराशि को छिपाना और उसका गबन करना था। सरवानी एलीट परियोजना में इन्वेंट्री की बिक्री के बहाने खरीदारों से 216.91 करोड़ रुपये से अधिक नकद एकत्र किए गए। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि अपराध की आय को मेसर्स सिवीपीएल के फंड को संबंधित और असंबंधित संस्थाओं/व्यक्तियों को फर्जी बैंकिंग लेनदेन के जरिए ट्रांसफर करके, बिना किसी वास्तविक कारोबार के, गबन किया गया था। 
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इसके अलावा, निकासी के बाद मेसर्स सिवीपीएल के बैंक खातों से नकदी के रूप में अपराध की आय की एक बड़ी राशि का गबन किया गया। बी. लक्ष्मीनारायण और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा भी अपराध की आय को विदेशों में बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। संदू पूर्णचंद्र राव भी मेसर्स सिवीपीएल से लगभग 126 करोड़ रुपये के गबन में शामिल थे, जिसमें 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नकद में एकत्र की गई थी। जब फोरेंसिक ऑडिट के बाद यह तथ्य बी. लक्ष्मीनारायण को पता चला, तो उन्होंने धन के गबन के लिए संदू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज कराईं। 

बी. लक्ष्मीनारायण द्वारा उक्त एफआईआर वापस लेने के बदले में, संदू पूर्णचंद्र राव ने बी. लक्ष्मीनारायण के साथ एक समझौता किया। 21 अचल संपत्तियों को साहिती समूह के कर्मचारियों और अन्य के नाम पर बी. लक्ष्मीनारायण के लाभकारी स्वामित्व में स्थानांतरित कर दिया। संदू पूर्णचंद्र राव ने अपराध की आय से अपने परिवार के सदस्यों और संस्थाओं के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदीं।


इससे पहले, ईडी ने इस मामले के संबंध में विभिन्न परिसरों पर तलाशी ली थी, जिसमें आपत्तिजनक सामग्री, डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। कई बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे। पीएमएलए जांच के दौरान 169.15 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया था। बी. लक्ष्मीनारायण और संधू पूर्णचंद्र राव को क्रमशः 29.09.2024 और 25.08.2025 को गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने एमएसजे न्यायालय, में मेसर्स साहती इंफ्राटेक वेंचर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईवीपीएल) के पूर्व निदेशक और बिक्री एवं विपणन प्रमुख बी. लक्ष्मीनारायण और संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। न्यायालय ने पांच जनवरी को इसका संज्ञान लिया है।  

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