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ED: कई राज्यों में रिश्तेदारों व सहयोगियों के नाम पर खोली 60 शेल कंपनियां; 777 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त

Thu, 02 Jul 2026 08:32 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 02 Jul 2026 08:32 PM IST
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ED: 60 shell companies opened in names of relatives, employees, and associates across several states
ईडी - फोटो : ईडी

ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने कॉन्कास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड और अन्य के खिलाफ एक मामले में, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत लगभग 31.30 करोड़ रुपये की कुल मार्केट वैल्यू वाली 20 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। जब्त की गई संपत्तियों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में स्थित रिहायशी संपत्तियां, कमर्शियल यूनिट, फ़्लैट और जमीन के टुकड़े शामिल हैं। इन संपत्तियों का असली मालिकाना हक और कंट्रोल संजय कुमार सुरेका के पास है। अपराध से हुई कमाई को छिपाने के मकसद से इन्हें या तो उनके अपने नाम पर या उनके रिश्तेदारों, कर्मचारियों, सहयोगियों और शेल कंपनियों के नाम पर रखा गया था। इस कार्रवाई के साथ, ईडी ने इस मामले में कुल मिलाकर लगभग 777.10 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। 

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इसके अलावा, ईडी ने कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कोलकाता की स्पेशल कोर्ट में दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) भी दायर की है। इस सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 63 और लोगों/संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। इनमें ऐसे व्यक्ति, कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोप्राइटरी कंसर्न शामिल हैं, जो अपराध से मिली रकम (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की लॉन्ड्रिंग में जानबूझकर शामिल पाए गए। यह शिकायत पीएमएलए के तहत की गई आगे की जांच के आधार पर दायर की गई है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में उनकी संलिप्तता साबित करने वाले काफी अतिरिक्त सबूत सामने आए हैं।
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जांच एजेंसी ने संजय कुमार सुरेका और अन्य के खिलाफ IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत सीबीआई, बीएसएफबी, कोलकाता द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड ने अपने प्रमोटरों और निदेशकों के साथ मिलकर, बढ़ा-चढ़ाकर स्टॉक स्टेटमेंट, हेरफेर किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट और जाली रिकॉर्ड जमा करके बैंकों के एक समूह से धोखाधड़ी से क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं। उसके बाद लोन के फंड को दूसरी जगह भेज दिया या हड़प लिया। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को लगभग 6,210.72 करोड़ रुपये (ब्याज को छोड़कर) का गलत नुकसान हुआ। 
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संजय कुमार सुरेका द्वारा प्रमोट की गई कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में इंटीग्रेटेड स्टील मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज चलाती थी। जांच से पता चला है कि संजय कुमार सुरेका ने मनी लॉन्ड्रिंग का एक जटिल नेटवर्क बनाया और उसे कंट्रोल किया।

इसके लिए उन्होंने 60 से ज़्यादा शेल कंपनियों, फर्मों और एलएलपी का इस्तेमाल किया, जिनका मालिकाना हक और कंट्रोल असल में उन्हीं के पास था, हालांकि कागजों पर ये कंपनियां कर्मचारियों, रिश्तेदारों, सहयोगियों और डमी डायरेक्टरों के नाम पर थीं। इन कंपनियों का इस्तेमाल 'अपराध से हुई कमाई' को इधर-उधर करने, रूट करने और लेयरिंग करने के लिए किया गया। इसके लिए अकोमोडेशन एंट्री, बिना गारंटी वाले लोन, इंटर-कॉर्पोरेट ट्रांज़ैक्शन, नकली ट्रेड ट्रांज़ैक्शन, डिवॉल्व्ड लेटर ऑफ क्रेडिट, बुक एडजस्टमेंट और फंड के सर्कुलर मूवमेंट जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया, ताकि इस पैसे को अचल संपत्ति, निवेश और अन्य महंगी संपत्तियों में शामिल किया जा सके। 


जांच में यह भी पता चला कि उनके करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों द्वारा कंट्रोल की जाने वाली कई कंपनियों ने जानबूझकर अपराध से हुई कमाई को रूट करने, लेयरिंग करने और इस्तेमाल करने में मदद की। इससे मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे सिस्टम को बढ़ावा मिला। ईडी ने पहले ही स्पेशल कोर्ट में एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। यह दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट अतिरिक्त सबूत पेश करने और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल पाए गए नए लोगों और कंपनियों को मामले में शामिल करने के लिए दायर की गई है। इस दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के दायर होने के साथ, मामले में कुल आरोपियों की संख्या 97 हो गई है। इनमें व्यक्ति के साथ-साथ कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोप्राइटरी कंसर्न भी शामिल हैं।

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