जीडीपी का आकार बढ़ने से अर्थव्यवस्था को और नकदी की होगी जरूरत : आरबीआई
- आरबीआई ने बैंकिंग तंत्र व बाजार में नकदी बढ़ाने की मंशा जताई
- विश्व बैंक के मुताबकि भारत की जीडीपी 184 लाख करोड़ रुपये है
- देश में जीडीपी वृद्धि की मौजूदा रफ्तार 7.2 फीसदी है
- देश में कुल 18.50 लाख करोड़ रुपये की नकदी चलन में है
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भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि देश की जीडीपी का आकार बढ़ने के साथ ही अर्थव्यवस्था को और ज्यादा नकदी की जरूरत होगी। आरबीआई के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जीडीपी के अनुरूप ही बैंक और बाजार में मुद्रा की जरूरत होती है। लिहाजा जीडीपी का आकार बढ़ने के साथ ही ज्यादा नकदी भी चाहिए होगी।
आरबीआई अधिकारी ने कहा कि नवंबर, 2016 में नोटबंदी के समय 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था जिसके बाद जीडीपी की रफ्तार और आकार पर भी असर हुआ था। हालांकि, यह एक बार फिर जोर पकड़ रही है जिससे भविष्य में नकदी की जरूरत भी बढ़ती जाएगी। नोटबंदी से बड़ी मात्रा में जाली नोट भी सिस्टम से बाहर हो गई। नोट की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए उनके सुरक्षा फीचर भी बढ़ाए जा रहे हैं।
आरबीआई अधिकारी ने कहा कि जमा लेने वाली एनबीएफसी के लिए बैंकिंग लोकपाल नियुक्त किया जाएगा जिसके साथ डिजिटल लोकपाल भी होगा। केंद्रीय बैंक वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय रणनीति पर काम कर रहा है। एमएसएमई को बिना परेशानी कर्ज दिलाने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
चलन में 18.50 लाख करोड़ की नकदी
नोटबंदी के डेढ़ साल बाद आरबीआई ने मार्च, 2018 में बताया था कि देश में कुल 18.50 लाख करोड़ रुपये की नकदी चलन में है। यह नकदी का अब तक का सर्वोच्च स्तर भी है। इससे पहले सरकार ने नोटबंदी कर करीब 16.99 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम से बाहर कर दी थी। इसके बाद पांच सौ और दो हजार के नोटों की छपाई शुरू हुई। कुल नकदी में दो हजार के नोटों का हिस्सा करीब 37 फीसदी है।
बांड खरीदारी में इजाफा
बाजार और सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ने बांड खरीदारी में इजाफा किया है। आरबीआई ने दिसंबर में ओपन मार्केट ऑपरेशन से 50 हजार करोड़ रुपये जुटाए जबकि जनवरी, 2019 में भी 50 हजार करोड़ रुपये के बांड खरीदने का लक्ष्य रखा है। बॉन्ड खरीदारी से बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ेगी और एनबीएफसी को कम दरों पर पूंजी मिल सकेगी।
और बढ़ेगी जीडीपी की रफ्तार
इंडिया रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की जीडीपी दर आगामी वित्त वर्ष में और रफ्तार पकड़ेगी। यह मौजूदा 7.3 फीसदी से बढ़कर 2019-20 में 7.5 फीसदी पहुंच सकती है। उद्योग और सेवा क्षेत्र में तेज वृद्घि से यह उछाल आएगा। एजेंसी का मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद यह साल तेज सुधारों का होगा।