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ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक सेंटर की व्यवस्था में बदलाव, 55 लाख पूर्व सैनिकों के इलाज पर पड़ेगा असर
Mon, 04 Jan 2021 05:02 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 04 Jan 2021 05:02 PM IST
सार
डेंटल स्टाफ केवल वहीं पर मिलेगा, जहां डेंटल चेयर होगी। यदि डेंटल चेयर नहीं है तो वहां सहायक नियुक्ति वाली फाइल को मंजूरी नहीं दी जाएगी। अगर ऐसे किसी सेंटर पर एंबुलेंस नहीं है तो वहां ड्राइवर का पद स्वीकृत नहीं होगा...
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ECHS Polyclinic
- फोटो : ECHS
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विस्तार
भारतीय सेना द्वारा अपने पूर्व सैनिकों के इलाज के लिए स्थापित किए गए ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक सेंटर की व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। साल 2021-22 के लिए जो कार्मिक दस्तावेज तैयार किया गया है, उसमें सेंटर के स्टाफ को इधर-उधर भेजने की बात कही गई है। अगर किसी सेंटर पर मरीज कम आते हैं तो वहां के स्टाफ को दूसरे किसी ऐसे सेंटर पर भेजा जाएगा, जहां लाभार्थियों की भारी संख्या रहती है। ड्राइवर और वाहन, सीमित संख्या में रहेंगे।
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डेंटल स्टाफ केवल वहीं पर मिलेगा, जहां डेंटल चेयर होगी। यदि डेंटल चेयर नहीं है तो वहां सहायक नियुक्ति वाली फाइल को मंजूरी नहीं दी जाएगी। अगर ऐसे किसी सेंटर पर एंबुलेंस नहीं है तो वहां ड्राइवर का पद स्वीकृत नहीं होगा। अब सर्विस अस्पतालों पर ज्यादा जोर रहेगा। इन अस्पतालों में स्टाफ की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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बता दें कि देश के विभिन्न हिस्सों में ईसीएचएस के 30 क्षेत्रीय केंद्र हैं, जबकि 433 पॉलीक्लिनिक सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों पर 55 लाख लाभार्थी पंजीकृत हैं। ये सेंटर भारत के अलावा नेपाल में भी स्थित हैं। इन सेंटरों पर डॉक्टरों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर, तकनीकी कर्मी, स्टोर कीपर और ड्राइवर आदि भी काम करते हैं। गत वर्ष इन सेंटरों की कार्यक्षमता को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके बाद ही 2021-22 का कार्मिक दस्तावेज तैयार किया गया है।
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आदेशों के मुताबिक, ईसीएचएस सेंटरों के रेफरल सिस्टम में तेजी लाई जाएगी। वहां पर गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों को मिलिट्री हॉस्पिटल में रेफर करने की प्रक्रिया में बाधा नहीं आने देंगे। इसके लिए सेंटर पर एक अतिरिक्त मेडिकल अफसर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होगी। यह स्टाफ सुनिश्चित करेगा कि किसी मरीज की रेफरल प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
ईसीएचएस सेंटर, जहां पर अधिक स्टाफ है, लेकिन मरीजों की संख्या कम रहती है तो वहां से स्टाफ को क्षेत्रीय केंद्र और ईसीएचएस के सेंट्रल संगठन में भेज देंगे। इसके अलावा एएचआरएंडआर डेंटल केंद्र, एमसीडी (बेस हॉस्पिटल दिल्ली) व एएफसी नई दिल्ली में भी मैनपावर भेजी जाएगी।
किसी भी सेंटर पर यदि एक्सरे उपकरण नहीं हैं, तो वहां रेडियोलॉजिस्ट व रेडियोग्राफर नियुक्त नहीं होंगे। अगर वहां ये उपकरण हैं, मगर सेवा में नहीं हैं तो स्टाफ को वहां से हटा दिया जाएगा।
डेंटल स्टाफ केवल वहीं पर मिलेगा, जहां डेंटल चेयर होगी। दो डेंटल चेयर के लिए दो मेडिकल अफसर और दो सहायक मुहैया कराए जाएंगे। अगर ईसीएचएस सेंटर पर लैब नहीं है तो वहां तकनीकी स्टाफ भी नहीं रहेगा। डेंटल चिकित्सक नहीं है तो ही वहां डेंटल हाइजेनिस्ट की तैनाती को मंजूरी दी जाएगी।
स्टेशन कमांडर को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि वह ईसीएचएस पॉलिक्लीनिक सेंटर पर पूर्व सैनिकों को किसी तरह की दिक्कत न होने दे। कहीं पर मेडिकल अफसर, खासतौर पर महिला रोग चिकित्सक नहीं है तो वहां पद को तुरंत भरा जाएगा। कुछ सेंटरों पर घंटे के हिसाब से डॉक्टर की नियुक्ति की जा सकती है। खास बात है कि ई-टाइप पॉलीक्लिनिक सेंटर पर मेडिकल अफसर नहीं है तो वहां बैलेंस स्टाफ भी नहीं रहेगा। एंबुलेंस नहीं है तो ड्राइवर का पद खत्म हो जाएगा।