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G-20 Declaration: जी-20 में गूंजा पीएम मोदी का संदेश, मसौदे में कहा गया- युद्ध का नहीं होना चाहिए आज का युग
Wed, 16 Nov 2022 04:21 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 16 Nov 2022 04:21 PM IST
सार
भारत ने अंतिम बयान की प्रस्तावना का मसौदा तैयार करने के लिए सभी विकासशील देशों और उभरते बाजारों के साथ साझेदारी में काम किया। भारत समाधान देने वाला और आम सहमति निर्माता के रूप में उभरा है।
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G-20 को संबोधित करते पीएम मोदी
- फोटो : Twitter@bjp4 india
विस्तार
जी-20 शिखर सम्मेलन में नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इसमें कहा गया कि आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए। जी-20 का ये संदेश सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए संदेश को दर्शाता है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में एक विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और दुनिया के लिए इसके प्रभावों पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श हुआ। जी-20 ने कहा कि समूह के सदस्यों ने शांति, शत्रुता को खत्म करने और यूक्रेन में युद्ध की समाप्ति का आह्वान किया है और कहा कि ऐसी स्थिति के जारी रहने से खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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मसौदे पर आम सहमति बनाने में भारत की अहम भूमिका रही
इस मामले के जानकार लोगों ने कहा कि भारत ने मसौदे पर सभी देशों के बीच आम सहमति बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत ने अंतिम बयान की प्रस्तावना का मसौदा तैयार करने के लिए सभी विकासशील देशों और उभरते बाजारों के साथ साझेदारी में काम किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से एक नेता, समाधान प्रदाता और आम सहमति निर्माता के रूप में उभरा है। जी-20 विज्ञप्ति में कहा गया है, शांति और स्थिरता की रक्षा करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखना आवश्यक है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित सभी उद्देश्यों और सिद्धांतों का बचाव करना और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना शामिल है।
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परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी अस्वीकार्य
इसने कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग या इसके उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है। मॉस्को ने साफ संकेत दिया था कि वह परमाणु विकल्प का उपयोग कर सकता है। सम्मेलन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आयोजित किया गया, क्योंकि यूक्रेन में युद्ध जारी है और इसके प्रभाव यूरोप से परे के देशों द्वारा महसूस किए जा रहे हैं। सदस्यों ने मानवीय संकट, युद्ध के आर्थिक और वित्तीय प्रभावों के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की और युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया। कई सदस्य देशों ने युद्ध को अकारण और अनुचित और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
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यूक्रेन सहित कुछ हिस्सों में संघर्षों से गंभीर रूप से चिंतित
इसमें कहा गया है, कुछ सदस्यों ने राय रखी कि जी-20 को अपने खुद के जनादेश के प्रति वफादार होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चर्चा आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित हो और एक व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए। कुछ सदस्यों ने प्रतिबंधों के आर्थिक परिणामों के बारे में चिंता व्यक्त की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नेता यूक्रेन सहित दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते और चल रहे संघर्षों से गंभीर रूप से चिंतित हैं। सदस्यों ने शांति के लिए शत्रुता और युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया है। हम इस बात को रेखांकित करते हैं कि ऐसी स्थिति के जारी रहने से खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण में गिरावट के साथ-साथ टिकाऊ विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।