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चुनाव दौरान दूसरे देशों में कैसे लग रही फेक न्यूज पर लगाम, चुनाव आयोग कर रहा अध्ययन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 08 Nov 2018 08:27 PM IST
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चुनाव आयोग
- फोटो : अमर उजाला
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आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान अगर कोई राजनीतिक दल या समर्थकों ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज प्रमोट की, तो हो सकता है उसका अकाउंट ही ब्लॉक हो जाए। चुनाव आयोग अब दूसरे देशों में चुनावों के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों का अध्ययन करने में जुटा हुआ है।
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पिछले हफ्ते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के साथ हुई वर्कशॉप में भारतीय निर्वाचन आयोग ने हाल ही में संपन्न हुए ब्राजील चुनावों से मिले अनुभवों के बारे में विस्तार से चर्चा की। किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ चुनाव आयोग की यह पहली वर्कशॉप थी। चुनाव आयोग के साथ बैठक के दौरान फेसबुक ने बताया कि कैसे ब्राजील चुनावों के दौरान उनके वॉर रूम ने लगातार पोस्टों पर निगरानी रखी।
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चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक फेसबुक ने बताया कि उनकी वॉर रूम टीम ने ब्राजील में फेक न्यूज और अफवाहों को बढ़ावा देने वाले तकरीबन एक लाख से ज्यादा अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया, इनमें व्हाट्सअप अकाउंट्स भी शामिल रहे। फेसबुक की टीम ने बताया कि उनके वॉर रूम में डेटा सांइसिस्ट्स के अलावा इंजीनियर और कई विषयों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। गौरतलब है कि ब्राजील में 28 अक्टूबर को ही आम चुनाव समाप्त हुए हैं।
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अध्ययन से मिले कई सबक
फेसबुक ने बताया कि 2016 में हुए अमेरिकी चुनावों के दौरान उन्हें कई सबक मिले हैं जिनका फायदा उन्हें ब्राजील चुनावों के दौरान मिला। आयोग के सूत्रों ने बताया कि भारत में होने वाले आगामी चुनाव फेसबुक के लिए बेहद अहम हैं और यहां भी फेक न्यूज और दुष्प्रचार को रोकने के लिए उन्होंने कमर कसनी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि फेसबुक के देश में 21.7 करोड़ यूजर्स हैं।
इसके लिए यहां भी विशेष वॉर रूम तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हेट स्पीच, साइबर सिक्योरिटी, कंटेंट की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की नियुक्तियां हो चुकी हैं। फेसबुक के इस वर्चुअल वॉर रूम की खासियत होगी कि सिक्यरिटी एक्सपर्ट किसी दूसरे देश में और कंटेंट मॉनिटरिंग किसी दूसरे देश में होगी। लेकिन ये सभी देश के विभिन्न विभागों के साथ मिल कर काम करेंगे।
चुनाव आयोग ने पिछले साल दिसंबर में जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 126 में बदलावों के लिए एक विशेष कमेटी बनाई थी। यह कमेटी चुनावों पर सोशल मीडिया के प्रभावों का आंकलन कर रही है। धारा 126 के तहत ही किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव में वोटिंग से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार से जुड़ी सामग्रियों पर रोक लगाने का प्रावधान है।
इसके तहत रेडियो, टीवी, अखबार या अन्य संचार माध्यमों को पहले ही लाया जा चुका है। वहीं फेसबुक भी वोटिंग से 48 घंटे पहले किसी भी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने की सहमति जता चुका है। आयोग फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से फीडबैक लेकर राजनीतिक दलों और मीडिया के लिए नई गाइडलाइंस भी लाने की तैयारी कर रहा है।