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Thar: सदी के अंत तक राजस्थान का थार मरुस्थल हो जाएगा हरा-भरा, खाद्य सुरक्षा चिंताओं के लिहाज से राहत भरा बदलाव

Fri, 18 Aug 2023 05:52 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 18 Aug 2023 05:52 AM IST
सार

शोधकर्ताओं का दावा है कि अगर भारतीय मानसून के पश्चिम की ओर लौटने की प्रवृत्ति जारी रही, तो पूरा थार रेगिस्तान आर्द्र मानसूनी जलवायु क्षेत्र में बदल जाएगा।

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Earth future general report claims Thar desert of Rajasthan will become green in End of Century
desert - फोटो : istock

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के चलते सदी के अंत तक राजस्थान का थार मरुस्थल हरा-भरा हो सकता है। एक अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने दवा किय कि जहां दुनिया के ज्यादातर रेगिस्तानों का आकार और तापमान बढ़ने की आशंका है, वहीं राजस्थान से पाकिस्तान के सिंध तक फैला करीब 2 लाख वर्ग किलोमीटर का थार रेगिस्तान हरे-भरे जंगल में तब्दील हो सकता है। यह दुनिया का 20वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है।

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अर्थ फ्यूचर जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, सहारा रेगिस्तान का आकार 2050 तक 6,000 वर्ग किलोमीटर बढ़ सकता है। वहीं, थार रेगिस्तान में औसत वर्षा में 1901 और 2015 के बीच 10-50 फीसदी की वृद्धि हुई है। ग्रीनहाउस गैस के प्रभाव को देखते हुए आने वाले वर्षों में यहां बारिश में 50 से 200 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है। साथ ही अध्ययन इस धारणा की पुष्टि भी करता है कि भारतीय मानसून के पूर्व की ओर खिसकने से पश्चिम और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में सूखा पड़ा और धीरे-धीरे ये इलाके रेगिस्तान में बदल गए, जबकि हजारों वर्ष पूर्व यहां क्षेत्र सिंधु घाटी सभ्यता मौजूद थी और तब यहां भरपूर मानसूनी बारिश होती थी। शोधकर्ताओं का दावा है कि अगर भारतीय मानसून के पश्चिम की ओर लौटने की प्रवृत्ति जारी रही, तो पूरा थार रेगिस्तान आर्द्र मानसूनी जलवायु क्षेत्र में बदल जाएगा। भारत के लिए यह निश्चित रूप से राहत की बात होगी, क्योंकि इससे देश की बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। 

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क्रांतिकारी बदलाव की संभावना
वर्षा में बढ़ोतरी से खाद्य उत्पादकता में पर्याप्त सुधार की उम्मीद है, जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। हालांकि, यह वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चिंता का विषय भी है। क्योंकि, थार रेगिस्तान के हरे-भरे क्षेत्र में बदलने से पारिस्थितिकी तंत्र के नाजुक संतुलन पर व्यापक प्रभाव हो सकते हैं, जिनका अध्ययन किया जाना जरूरी है।

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50 वर्षों में थार में 25 फीसदी तक बढ़ी बारिश
पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पीवी राजेश सहित अनुसंधान दल ने पिछले 50 वर्षों में दक्षिण एशिया के मौसम के आंकड़ों को संकलित किया। मानसून की अवधि और सघनता में परिवर्तनों का विश्लेषण करके उन्होंने कई ग्रीनहाउस गैस परिदृश्यों के तहत भविष्य में होने वाले बदलावों का अनुमान लगाने के लिए ऐतिहासिक मौसम और समुद्र की सतह के तापमान के डाटा को एक जलवायु मॉडल में डालकर विश्लेषण किया, जिसके नतीजे बताते हैं कि भारतीय मानसून वास्तव में पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, जिससे ऐतिहासिक अवधि के दौरान उत्तर-पूर्व में औसत वर्षा में 10 फीसदी की कमी और पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।

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