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Hindi News ›   India News ›   EAM S Jaishankar said India relationship with China cannot be normal unless there is peace in border areas

India-China Ties: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- सीमावर्ती इलाकों में शांति होने तक चीन-भारत संबंध सामान्य नहीं

Fri, 11 Nov 2022 12:37 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 11 Nov 2022 12:37 AM IST
सार

गलवां घाटी की झड़पों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 2020 में जो हुआ वह एक पक्ष द्वारा किया गया प्रयास था, और हम जानते हैं कि वह कौन था, जो समझौते से अलग हटा था और यह मुद्दा सबसे अहम है।

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EAM S Jaishankar said India relationship with China cannot be normal unless there is peace in border areas
विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)। - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक कि सीमावर्ती इलाकों में शांति न हो और इस मामले में भारत की ओर से उस देश को दिया गया संकेत स्पष्ट है। जयशंकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि मैं कह रहा हूं कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और संतोषप्रद माहौल नहीं होगा, जब तक समझौतों का पालन नहीं किया जाता है और यथास्थिति को बदलने के एकतरफा प्रयास पर रोक नहीं लगती, तब तक संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं और सामान्य नहीं हैं।

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जयशंकर ने गलवां घाटी झड़प का किया जिक्र
गलवां घाटी की झड़पों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020 में जो हुआ वह एक पक्ष द्वारा किया गया प्रयास था, और हम जानते हैं कि वह कौन था, जो समझौते से अलग हटा था और यह मुद्दा सबसे अहम है। जयशंकर ने कहा कि क्या हमने तब से प्रगति की है? कुछ मायनों में, हां। टकराव वाले कई बिंदु थे। उन टकराव वाले बिंदुओं में सेना द्वारा खतरनाक रूप से करीबी तैनाती थी, मुझे लगता है कि उनमें से कुछ मुद्दों को समान और आपसी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हल किया गया है।
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संबंधों की वर्तमान स्थिति चीन के हित में नहीं: जयशंकर
उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं जिन पर अभी काम करने की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम दृढ़ रहें और आगे बढ़ते रहें। क्योंकि आप यह नहीं कह सकते हैं कि यह जटिल या कठिन है। विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि चीन को यह अहसास होगा कि संबंधों की वर्तमान स्थिति उसके हित में भी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की ओर से चीन को दिया गया संकेत स्पष्ट है। वे इसे अपने हितों से तौलेंगे, लेकिन... यह केवल सार्वजनिक भावना का मामला नहीं है, और सार्वजनिक भावना मजबूत है... मुझे लगता है कि यह सरकार की नीति है, यह राष्ट्रीय सोच, जन भावना और रणनीतिक आकलन है। मुझे नहीं लगता कि मौजूदा स्थिति संबंधों को नुकसान पहुंचाए बिना जारी रह सकती है। गौरतलब है कि जून 2020 में गलवां घाटी में भीषण झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया था।
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एलएसी पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण

पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, हालांकि दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक वार्ता की एक श्रृंखला के जरिये टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों को पीछे हटाया है। भारत लगातार इस बात को कहता रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध शुरू हो गया था।


यूक्रेन संघर्ष को वार्ता के जरिए सुलझाया जाना चाहिए: जयशंकर
एस जयशंकर ने यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को वार्ता के जरिए सुलझाए जाने की आवश्यकता को  दोहराया, लेकिन साथ ही कहा कि इस बारे में बात करना जल्दबाजी होगी कि क्या भारत युद्धरत देशों के बीच शांति कायम करने में भूमिका निभा सकता है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संदेश को रेखांकित किया कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ (विकसित एवं विकासशील देश) किसी निर्णय को प्रभावित करने की वास्तविक क्षमता नहीं रखता, लेकिन वह युद्ध के प्रभाव का खामियाजा महसूस कर रहा है।कार्यक्रम में जयशंकर से शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों पर सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या नई दिल्ली संघर्ष को सुलझाने के लिए एक सूत्रधार बनने के लिए तैयार है। इस सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि ‘‘आपने पूछा कि क्या यह उचित समय है या क्या अभी कुछ भी कहना या करना जल्दबाजी होगी? मुझे लगता है कि आपका प्रश्न ही उचित समय से पहले पूछा गया है। हम आज की समस्याओं को मॉडल या अनुभवों के आधार पर नहीं देख सकते। हम आज जिस स्थिति में रह रहे हैं, यह एक बहुत ही अलग स्थिति है।’’

जयशंकर ने कहा कि जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘यह युद्ध का युग नहीं’ है। मेरी अपनी समझ है कि ऐसे देश हैं, जो यह नहीं मानते हैं कि इस तरह के मुद्दों को युद्ध के मैदान में सुलझाया जा सकता है, जो मानते हैं कि दोनों देशों को वार्ता की मेज पर लौटने की तत्काल आवश्यकता है, जो पीड़ा को देख सकते हैं। पीएम मोदी ने सितंबर में उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में एक बैठक के दौरान पुतिन से कहा था कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’’

जयशंकर ने कहा कि जिन दूसरे देशों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उनका इस मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह बाली में होने वाला जी20 शिखर सम्मेलन यूक्रेन संघर्ष पर सदस्य देशों की भावनाओं का संकेत देगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भावनाओं का आवेग है। मैं कहूंगा कि जो हो रहा है, उसे मजबूत विचार, ध्रुवीकरण के रूप में दर्शाया जा सकता है, लेकिन राजनीति, रणनीति या ... यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में, एक तरह से, इसे पूर्व-पश्चिम ध्रुवीकरण के रूप में लिया जाता है।


उन्होंने कहा, लेकिन अगर आप इसके प्रभावों को देखते हैं, तो कुछ हद तक, यह उत्तर-दक्षिण ध्रुवीकरण बन गया है क्योंकि दक्षिण (विकसित एवं विकासशील देश) वास्तव में किसी भी निर्णय को प्रभावित किए बिना इसके प्रभाव का खामियाजा महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के हमारे हिस्से में अन्य भी कई मुद्दे हैं, उनमें से कुछ आर्थिक मुद्दे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों, एवं मानदंडों का सम्मान, एक-दूसरे के साथ व्यवहार, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान भी अन्य मुद्दे हैं।

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