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Hindi News ›   India News ›   EAM Jaishankar targets western countries on Russia Ukraine war our foreign policy not for other people

S.Jaishankar: विदेश मंत्री की पश्चिमी देशों को फिर दो टूक, बोले- हम दूसरे लोगों के लिए नहीं चला रहे विदेश नीति

Sat, 26 Nov 2022 06:38 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 26 Nov 2022 06:38 PM IST
सार

विदेश मंत्री ने कहा, मैं अन्य लोगों की मांगों के लिए विदेश नहीं चला रहा हूं। मेरी विदेश नीति मेरे देश और मेरे लोगों के हित में है। मेरा मानना है कि भारत के हितों की अच्छी तरह से सेवा की जानी चाहिए। 

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EAM Jaishankar targets western countries on Russia Ukraine war our foreign policy not for other people
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर - फोटो : Twitter/Dr. S Jaishankar (File)

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच बीते नौ महीनों से चल रहा युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। हमले के बाद से जहां अमेरिका और पश्चिमी देश रूस की घेराबंदी में लगे हैं। ये देश भारत के रूख को लेकर भी सवाल खड़े करते रहे हैं। हालांकि, भारत अपने तटस्थ रुख पर कायम है। इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में इस तटस्थ रुख को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि हम दूसरे लोगों की मांगों के लिए देश की विदेश नीति नहीं चला रहे हैं। 

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एक समाचार चैनल के शिखर सम्मेलन में शिरकर करते हुए विदेश मंत्री ने शुक्रवार को कहा, मैं अन्य लोगों की मांगों के लिए विदेश नहीं चला रहा हूं। मेरी विदेश नीति मेरे देश और मेरे लोगों के हित में है। मेरा मानना है कि भारत के हितों की अच्छी तरह से सेवा की जानी चाहिए। हम गंभीरता से इसकी वकालत करते हैं और चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हों। मुझे लगता है कि ऐसा करना सही। अगर मैंने वहीं किया होता जो अमेरिका ने कहा था, तो मैं खुद के और किसी ओर के काम नहीं आता। 
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रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर जयशंकर ने आगे कहा, कई बार हम भी उन चीजों के साथ रहे हैं, जो आपने (पश्चिमी देशों) कीं हैं। अब इसके साथ (भारत की विदेश नीति) जिएं। उन्होंने कहा, भारत का युद्ध को लेकर गंभीर रुख रहा है।  

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री के हाल के मिलाने की विपक्ष की आलोचना को खारिज किया और कहा कि मोदी चीन पर बहुत दृढ़ रहे हैं। उन्हें चीन-भारत सीमा पर हमारी सेना की मजबूत तैनाती से आंका जाना चाहिए। 
 
चीन को लेकर जयशंकर ने कहा, यह वास्तविकता है कि ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत निकटतम पड़ोसी है। लेकिन ये भी है कि इसके साथ हमारा एक कठिन इतिहास, संघर्ष और बहुत बड़ा सीमा विवाद रहा है। एक समाचार समूह के शिखर सम्मेलन में शिरकत करते हुए जयशंकर ने कहा कि चीन से निपटने का सही तरीका दृढ़ रहना है। 

इसके अलावा सुरक्षा परिषद से लेकर आतंकियों पर प्रतिबंध जैसे कई मुद्दों पर वह हमारा समर्थन नहीं करते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ संबंध का असर भारत की सुरक्षा पर होता है।


जयशंकर ने अर्थव्यस्था की वास्तविकता को लेकर कहा कि साल 1988 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी चीन गए थे, तो उस समय भारत और चीन की अर्थव्यवस्था बराबर थी। लेकिन आज वह अर्थव्यवस्था हमसे चार से साढ़े गुना ज्यादा बड़ी है। उस समय आर्थिक सुधारों की जो शुरुआत हुई, वह आधे-अधूरे तरीके से हुई। 
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