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Explainer: क्या अब ई20 पेट्रोल बन सकता है मोदी सरकार के लिए नई मुसीबत, विपक्षी दल कैसे कर रहे तैयारी?
Mon, 27 Jul 2026 04:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 27 Jul 2026 04:33 PM IST
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संगठनों और राजनीतिक दलों की संसद चलो मार्च की तैयारी।
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विस्तार
नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं के आंदोलन और इसकी सफलता के बाद अब एक और मुद्दा केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है। यह मुद्दा है इथेनॉल युक्त पेट्रोल का, जिसे इस वक्त देश के हर पेट्रोल पंप से बेचा जा रहा है। बीते करीब तीन महीने से पूरे देश में ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, केंद्र सरकार की तरफ से 2025 से ही पूरे देश में ई20 पेट्रोल को मानक के तौर पर निर्धारित कर दिया था, जबकि आम लोगों की शिकायत है कि 2023 से पहले भारत में ई20 ईंधन के लिए उपयुक्त गाड़ियां न के बराबर मौजूद थीं।पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन की सफलता के बाद ई20 पेट्रोल के खिलाफ भी आवाजें बुलंद हो रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में सीजेपी की ही तर्ज पर सोशल मीडिया पर एक और समूह की ओर से शुरू किया गया आंदोलन तेजी से जोर पकड़ रहा है। इस समूह ने अपना नाम ई20 जनता पार्टी (ईजेपी) दिया है और यह देश में ई20 पेट्रोल की अनिवार्यता खत्म करने और देश के परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कैसे पूरे देश में ई20 पेट्रोल मुद्दा बनता जा रहा है? किस-किस संगठन और समूह ने ई20 के खिलाफ आवाज उठाई है? इसमें सबसे ताजा तौर पर जुड़ी ई20 जनता पार्टी यानी ईजेपी क्या है? इन सबकी मांगें क्या हैं? पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बीते वर्षों में कैसे मुद्दा बनता चला गया है? ई20 पेट्रोल को लेकर आंदोलन की बात क्यों हो रही है? विपक्ष इसके लिए किस तरह तैयारी कर रहा है? सरकार का इस पर क्या रुख है? आइये जानते हैं...
ये भी पढ़ें: Explainer: भारत में ई-22 से ई-30 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं, फिर क्यों हटा उत्पाद शुल्क, सरकार की क्या तैयारी?
पहले जानें- कैसे ई20 के खिलाफ देशभर में उठ रहीं आवाज?
सरकार की ई20 यानी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की नीति के खिलाफ देशभर में विरोध के स्वर तेजी से बढ़े हैं। यह विरोध सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर अब सड़कों और अलग-अलग संगठनों के समर्थन तक पहुंच रहा है।ये भी पढ़ें: Explainer: भारत में ई-22 से ई-30 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं, फिर क्यों हटा उत्पाद शुल्क, सरकार की क्या तैयारी?
उपभोक्ताओं ने उठाई अधिकारों और पारदर्शिता की मांग
ई20 के मुद्दे पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की तरफ से शिकायतें आई हैं। कई वाहन विशेषज्ञों और कार-बाइक मालिकों का कहना है कि वे इथेनॉल मिश्रण के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि उपभोक्ताओं को ई20 के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। वे पेट्रोल पंपों पर पारदर्शी लेबलिंग, माइलेज और इंजन पर ई20 के असर को लेकर स्वतंत्र अध्ययन, सरकारी डेटा के प्रकाशन और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
तहसीन पूनावाला ने उठाया मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने सोशल मीडिया पर ई20 के खिलाफ चल रहे डिजिटल अभियान को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने ई20 के खिलाफ आवाज उठाने वालों के लिए टीम भारत का गठन किया है और एक्स पर पोस्ट करते हुए लोगों से गाड़ी मार्च गांधी मार्च (#GaadiMarchGandhiMarch) अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने लगातार यह तर्क दिया है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित ई20 ईंधन और 100% शुद्ध पेट्रोल में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उन्होंने ई20 ईंधन नीति का कड़ा विरोध करते हुए, एक वीडियो में उन्होंने यहां तक आरोप लगाया है कि इस नीति की वजह से गडकरी के बेटे और अधिक अमीर हो गए हैं।
ई20 के मुद्दे पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की तरफ से शिकायतें आई हैं। कई वाहन विशेषज्ञों और कार-बाइक मालिकों का कहना है कि वे इथेनॉल मिश्रण के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि उपभोक्ताओं को ई20 के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। वे पेट्रोल पंपों पर पारदर्शी लेबलिंग, माइलेज और इंजन पर ई20 के असर को लेकर स्वतंत्र अध्ययन, सरकारी डेटा के प्रकाशन और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
तहसीन पूनावाला ने उठाया मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने सोशल मीडिया पर ई20 के खिलाफ चल रहे डिजिटल अभियान को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने ई20 के खिलाफ आवाज उठाने वालों के लिए टीम भारत का गठन किया है और एक्स पर पोस्ट करते हुए लोगों से गाड़ी मार्च गांधी मार्च (#GaadiMarchGandhiMarch) अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने लगातार यह तर्क दिया है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित ई20 ईंधन और 100% शुद्ध पेट्रोल में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उन्होंने ई20 ईंधन नीति का कड़ा विरोध करते हुए, एक वीडियो में उन्होंने यहां तक आरोप लगाया है कि इस नीति की वजह से गडकरी के बेटे और अधिक अमीर हो गए हैं।
ई20 मुद्दे पर प्रदर्शनों की तैयारी।
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परिवहन संघों का जमीनी समर्थन
ई20 के खिलाफ मौजूदा समय में जो अभियान चल रहा है, उसे अब परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोटर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ई20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इन संगठनों का आरोप है कि ई20 ईंधन से विशेष रूप से पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) कम हो रही है, इंजन का प्रदर्शन गिर रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है।
मुंबई की विजय रैली में गूंजे ई20 के खिलाफ नारे
हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे की ओर से सीजेपी की सफलता का जश्न मनाने के लिए एक विजय रैली आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया। इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ई20 वाहनों और लोगों की जेब दोनों को मार रहा है और नितिन गडकरी के इस्तीफे के नारे लगाए गए।
ई20 के खिलाफ मौजूदा समय में जो अभियान चल रहा है, उसे अब परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोटर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ई20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इन संगठनों का आरोप है कि ई20 ईंधन से विशेष रूप से पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) कम हो रही है, इंजन का प्रदर्शन गिर रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है।
मुंबई की विजय रैली में गूंजे ई20 के खिलाफ नारे
हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे की ओर से सीजेपी की सफलता का जश्न मनाने के लिए एक विजय रैली आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया। इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ई20 वाहनों और लोगों की जेब दोनों को मार रहा है और नितिन गडकरी के इस्तीफे के नारे लगाए गए।
और अब- क्या है ई20 जनता पार्टी, जो सोशल मीडिया पर उभरी?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ही तर्ज पर ई20 जनता पार्टी (ईजेपी) एक नया सोशल मीडिया और डिजिटल अभियान है। मौजूदा समय में यह केवल एक ऑनलाइन समूह है और इसका कोई आधिकारिक नेता या संरचित संगठन सामने नहीं आया है। सीजेपी की तरह ही, यह अभियान सोशल मीडिया, मीम्स, व्यंग्य और नारों, जैसे- 'जेन-जी की एक ही मांग, गडकरी का इस्तीफा' का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है।इस समूह की तरफ से क्या मांगें आईं?
ईजेपी की सबसे बड़ी मांग यह है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित ईंधन (ई20) के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी दिया जाए। यह समूह इथेनॉल सम्मिश्रण नीति को पूरी तरह से खत्म करने, किसी सब्सिडी या मुफ्त ईंधन की मांग नहीं कर रहा। इनका तर्क है कि ई20 ईंधन से पुराने वाहनों के इंजन पर बुरा असर पड़ सकता है, उनकी माइलेज कम हो सकती है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है। इस अभियान ने बहुत कम समय में इंस्टाग्राम पर दो लाख से अधिक और एक्स पर लगभग 50,000 फॉलोअर्स जोड़ लिए हैं। इसके अलावा कई संगठनों ने भी इसका समर्थन किया है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रकार।
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पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट कैसे मुद्दा बनता चला गया है?
भारत सरकार ने मुख्य रूप से आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन को घटाने और किसानों व घरेलू बायोफ्यूल उद्योग की आय बढ़ाने के लिए पेट्रोल में गन्ने और मक्के से बने इथेनॉल को मिलाने के कार्यक्रम का विस्तार किया है। भारत ने अपने 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य 2030 तक रखा था। हालांकि, इस लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लिया गया और धीरे-धीरे पूरे देश में ई20 ईंधन को ही पेट्रोल पंप में डिफॉल्ट ईंधन के तौर पर लागू कर दिया गया। वह भी उपभोक्ताओं को कम सम्मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प दिए बिना।इसका असर यह हुआ कि वाहन मालिकों खासतौर पर जिनके पास अप्रैल 2023 के अनिवार्य मानकों से पहले बने पुराने मॉडल के वाहन हैं, उन्हें डर है कि इथेनॉल की उच्च मात्रा उनकी गाड़ियों की फ्यूल लाइन को खराब कर सकती है। कई परिवहन संगठनों और आम उपभोक्ताओं का आरोप है कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज घट रहे हैं, इंजन का प्रदर्शन खराब हो रहा है और रखरखाव का खर्च काफी बढ़ गया है।
सीजेपी के आंदोलन के बाद क्यों ई20 बन सकता है सरकार के लिए सिरदर्द?
नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के करीब 49 दिन के आंदोलन के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस घटनाक्रम के चलते सरकार पहले ही बैकफुट पर है। साथ ही एक युवा वर्ग ये यह दिखाया है कि उनकी आवाज मायने रखती है और वे सरकार को झुका सकते हैं। इस सफलता ने आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर डिजिटल सक्रियता का एक नया मॉडल तैयार कर दिया है। सीजेपी की मुंबई विजय रैली में युवाओं ने स्पष्ट कहा कि हमने एक असंभव पहाड़ से लड़ाई की और उसमें दरार डाल दी और अब उनका अगला लक्ष्य ई20 या 'गन्ने का खेल' है।
विपक्ष किस तरह कर रहा ई20 के मुद्दे को उठाने की तैयारी?
शिवसेना-मनसे: मुंबई में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने युवाओं से अपील की कि वे प्रतिरोध की इस चिंगारी को जिंदा रखें। ठाकरे ने यह भी दावा किया कि अब यह लड़ाई भाजपा बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा बनाम देश बन गई है। वहीं, राज ठाकरे ने भी आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें इस सफलता का श्रेय दिया।
कांग्रेस: कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने ई20 नीति को लेकर सरकार पर झूठे दिखावे और आधे-अधूरे सच पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा है कि ई20 को लागू करने में एक बड़ी नीतिगत खामी है। सुरजेवाला ने नीति आयोग के 2021 के रोडमैप और 'ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (एआरएआई) की एक अप्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा पेट्रोल वाहनों के रबर और प्लास्टिक के हिस्से ई20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं और यह इंजन के पुर्जों, जैसे- होज, गैसकेट, सील को तेजी से खराब करता है।
आम आदमी पार्टी: केजरीवाल की पार्टी 1 अगस्त को दिल्ली में ई20 नीति के खिलाफ एक नेशनल टाउन हॉल आयोजित करने की योजना बना रही है। पार्टी ने 'StopE20petrol.com' वेबसाइट के जरिए एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इसके जरिए प्रधानमंत्री को ई20 नीति में बदलाव के लिए एक याचिका भेजे जाने की योजना है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मांग की है कि सरकार को पेट्रोल की कीमतें घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर कर देनी चाहिए। इतना ही नहीं आप की मुख्य मांग यह है कि सरकार को लोगों पर केवल एक प्रकार का ईंधन नहीं थोपना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों पर पारंपरिक पेट्रोल, ई10 और ई20 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का पूरा विकल्प दिया जाना चाहिए।