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ड्राइविंग के दौरान ये दस बातें आपको रोड रेज तक ले जाती हैं, इनसे बचें
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Aug 2018 01:25 AM IST
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जानिए उन कारणों को जिनसे होता है रोड रेज।
- फोटो : अमर उजाला
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ड्राइविंग के वक्त आप भले ही यातायात नियमों के अनुसार चल रहे हैं, मगर कई कारक ऐसे भी हैं, जो आपको गुस्सा दिलाते हैं। नतीजा, आप क्रोध में आकर बीच सड़क पर दूसरे वाहन चालक से भिड़ जाते हैं। यही रोड रेज कहलाती है। इसमें चालक को गम्भीर चोट पहुँचाने से लेकर मर्डर तक शामिल है। वे दस कारक कौन से हैं, जो वाहन चालक को रोड रेज तक ले जाते हैं, जानिए।
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दो साल पहले तक नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) रोड रेज के आँकड़े नहीं रखता था। 2016 में पहली बार विभिन्न राज्यों से रोड रेज का डेटा एकत्रित करना शुरू किया गया है। मालूम पड़ा कि 513 लोगों की मौत रोड रेज के चलते हुई है। हालाँकि इसमें सभी राज्यों का डेटा शामिल नहीं है। सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठन ‘सेव लाइफ फाउँडेशन’ की माने तो रोड रेज का आँकड़ा बहुत ऊपर तक जा पहुँचा है।
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फाउँडेशन के चेयरमैन पीयूष तिवारी का कहना है कि रोड रेज किसी एक तथ्य के आधार पर नहीं होती। सड़क पर चालकों के व्यवहार और ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार रोड रेज होती है। कई बार तीन-चार बातें एक साथ मिलकर जब चालक के मस्तिष्क पर हावी होती हैं तो उस हालत में भी चालक आपा खो बैठते हैं। जैसे कोई वाहन चालक ट्रैफिक जाम में फंसा है और ऊपर से कोई दूसरा चालक बार-बार हॉर्न बजा जा रहा है। अगर पहले वाले चालक ने इस पर ऐतराज जता दिया तो दोनों में मारपीट तक बात पहुँच सकती है। मतलब कई तरह की मौखिक अभिव्यक्ति (गुस्से वाली) मिलकर रोड रेज को वाहनों की टकराहट या फिर गन शॉट तक ले जाती है।
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ये हैं वे दस बातें जो रोड रेज का कारण बनती हैं
-दूसरी कारों में तेज म्यूजिक बजना, खासतौर पर जब कोई ट्रैफिक जाम में फँसा हो
-ट्रैफिक जाम या फिर वाहनों की लम्बी कतार
-गलत दिशा से ओवरटेक करने का प्रयास
-लगातार हॉर्न बजाते रहना
-गलत या अनाधिकृत पार्किंग
-बहुत अधिक गर्मी होना
-एक ही लेन में वाहनों का जमावड़ा लगना
-अधिक रफ्तार में ड्राइविंग
-लम्बी दूरी तक चलते रहना
-अहम बैठक या डेडलाइन का दबाव
दिल्ली में रोड रेज के मामले
(सभी आंकड़े तीस जून, 2018 तक)
-उत्तरप्रदेश में 2016 के दौरान 489 लोग रोड रेज में मारे गए थे।
खतरनाक ड्राइविंग की वजह से गई इतने लोगों की जान
-ट्रैफिक जाम या फिर वाहनों की लम्बी कतार
-गलत दिशा से ओवरटेक करने का प्रयास
-लगातार हॉर्न बजाते रहना
-गलत या अनाधिकृत पार्किंग
-बहुत अधिक गर्मी होना
-एक ही लेन में वाहनों का जमावड़ा लगना
-अधिक रफ्तार में ड्राइविंग
-लम्बी दूरी तक चलते रहना
-अहम बैठक या डेडलाइन का दबाव
दिल्ली में रोड रेज के मामले
| साल | रोड रेज | मारे गए | घायल | गिरफ्तारी |
| 2015 | 92 | 04 | 80 | 106 |
| 2016 | 66 | 02 | 55 | 94 |
| 2017 | 64 | 03 | 55 | 80 |
| 2018 | 22 | 00 | 23 | 29 |
-उत्तरप्रदेश में 2016 के दौरान 489 लोग रोड रेज में मारे गए थे।
खतरनाक ड्राइविंग की वजह से गई इतने लोगों की जान
| राज्य | घटना | पीड़ित |
| उत्तर प्रदेश | 17644 | 20687 |
| तमिलनाडू | 16559 | 17681 |
| महाराष्ट्र | 12568 | 13378 |
| कर्नाटक | 10215 | 12777 |
| राजस्थान | 9345 | 9847 |
ये लापरवाह चालक, जिन्होंने खतरनाक ड्राइविंग कर दूसरों को टक्कर मारी
| गिरफ्तार | पुरुष | महिला | कुल |
| 18 साल से नीचे | 1203 | 20 | 1223 |
| 18-30 | 150851 | 1640 | 152491 |
| 30-45 | 128680 | 1009 | 129689 |
| 45-60 | 42238 | 125 | 42363 |
| 60 से ऊपर | 4246 | 08 | 4254 |
| सभी को मिलाकर | 333218 | 2802 | 336020 |
पुलिस रोड रेज जैसी हालत पैदा न होने दे- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री
रोड रेज को लेकर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर का कहना है कि पुलिस को सचेत किया गया है कि वह रोड रेज जैसी हालत पैदा न होने दे। चालकों को इस बाबत जागरूक किया जा रहा है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विपरीत दिशा में वाहन चलाने वालों पर भारी जुर्माना किया जा रहा है। इसके अलावा रोड इंजीनियरिंग में बदलाव भी सड़क सुरक्षा मुहिम का एक हिस्सा है।