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Hindi News ›   India News ›   During Taliban offensive attack Ahmad Massoud was leading the resistance in Frontline, appointe Commander Baba Wahid Jalandar to defend Panjshir

पंजशीर के इस 'बाबा' से कांपते हैं तालिबानी: एक दिन में तकरीबन पांच सौ तालिबानियों को मार गिराया

Fri, 03 Sep 2021 03:06 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 03 Sep 2021 03:06 PM IST
सार

तालिबानियों से मोर्चा ले रहे नॉर्दन एलायंस ने गुरुवार की रात को घोषणा की कि युद्ध अब शुरू हो रहा है। नॉर्दन एलायंस के मुताबिक पंजशीर घाटी में पहले भी तालिबानियों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले कमांडर वाहिद जलंदार को एक बार फिर से पंचशील बचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

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During Taliban offensive attack Ahmad Massoud was leading the resistance in Frontline, appointe Commander Baba Wahid Jalandar to defend Panjshir
परवान प्रांत के सालंग के सामरिक क्षेत्र पर रजिस्टेंस फोर्सेज के लड़ाके - फोटो : Northern Alliance/Twitter

विस्तार

अफगानिस्तान के पंजशीर घाटी में अहमद मसूद के नॉर्दन एलायंस ने एक ऐसे 'बाबा' को तालिबानियों से मुकाबले की जिम्मेदारी दी है, जिसका नाम सुनकर तालिबानियों की हालत खराब हो जाती है। दरअसल यह बाबा कोई और नहीं बल्कि अफगानिस्तान में कभी अपना सिक्का चलाने वाले अहमद शाह मसूद के दाहिने हाथ रहे कमांडर वाहिद हैं। कमांडर वाहिद को तालिबानियों से लड़ने में 35 साल का अनुभव है। वाहिद को प्यार से नॉर्दन एलायंस के लोग 'बाबा जलंदर' के नाम से जानते है। गुरुवार रात को कमांडर वाहिद को पंजशीर में तालिबानियों से लड़ने की जिम्मेदारी दी गई। नॉर्दन एलायंस के मुताबिक 12 घंटों के भीतर ही तकरीबन पांच सौ तालिबानियों को अलग-अलग मोर्चों पर मार गिराया गया जबकि बहुत से तालिबानी आतंकियों ने सरेंडर भी कर दिया।

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तालिबानियों से मोर्चा ले रहे नॉर्दन एलायंस ने गुरुवार की रात को घोषणा की कि युद्ध अब शुरू हो रहा है। नॉर्दन एलायंस के मुताबिक पंजशीर घाटी में पहले भी तालिबानियों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले कमांडर वाहिद जलंदार को एक बार फिर से पंचशील बचाने की जिम्मेदारी दी गई है। रजिस्टेंस फोर्स के मुताबिक अफगानिस्तान तालिबानियों का साथ दे रहे पाकिस्तान तालिबान और अफगान तालिबानी के 470 लोगों को बीती रात में अलग-अलग मोर्चों पर मार गिराया गया। जबकि 390 से ज्यादा आतंकी घायल हो गए। नॉर्दन एलायंस की रजिस्टेंस फोर्स का दावा है कि इनमें से 43 से ज्यादा आतंकी उनके कब्जे में हैं।

नार्दन अलायंस ने दावा किया है अहमद मसूद की लीडरशिप में रजिस्टेंस फोर्सेज ने तालिबानियों के कब्जे वाले बदख्शां राज्य के चार जिलों को अपने कब्जे में ले लिया है। एलायंस का दावा है रजिस्टेंस फोर्स ने बड़ी देर तक चले युद्ध के बाद इस राज्य को अपने कब्जे लिया है। जबकि तालिबानियों की सेना अमेरिका के तमाम अत्याधुनिक हथियारों और गोला बारूद के साथ इस राज्य को बचाने के लिए लगी थी। बावजूद इसके रजिस्टेंस फोर्सेस के लड़ाकों ने इसको अपने कब्जे में ले लिया। पंजशीर घाटी को बचा रहे लड़ाकू के मुताबिक जल्द ही आसपास के कई और राज्यों पर भी नॉर्दन एलायंस का कब्जा होगा।

कमांडर बाबा की तैनाती के बाद नॉर्दन एलायंस का दावा है कि उनकी रजिस्टेंस फोर्सेज ने अफगानिस्तान के तालिबानियों द्वारा कब्जाए गए परवान राज्य के सैलंग को भी कब्जे में ले लिया गया। नॉर्दन एलायंस के प्रवक्ता के मुताबिक सैलंग इलाका पूरी तरीके से अब रजिस्टेंस फोर्स के पास है। इसके अलावा इसी राज्य की राजधानी को भी रजिस्टेंस फोर्स ने अपने कब्जे में ले लिया है। लड़ाई लड़ रहे 200 से ज्यादा तालिबानियों ने उनकी फोर्स के सामने सरेंडर कर दिया है। नॉर्दन एलायंस के मुताबिक जल्द ही तालिबानियों के कब्जे से पंजशीर घाटी के लगते हुए बहुत से इलाकों को उनके चंगुल से खाली करा लिया जाएगा।

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ कर्नल (रि.) एसएम साहा कहते हैं कि जिस तरीके से नॉर्दन एलायंस के लड़ाके तालिबानियों से मुकाबला कर रहे हैं और निश्चित तौर पर तालिबानियों के लिए बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि नॉर्दन एलायंस के लड़ाकुओं ने ख्वाक युद्ध में भी बड़ी जीत हासिल की है। नॉर्दन एलायंस ने इस युद्ध में पंजशीर के बड़े कमांडर खालिद अमीरी को जिम्मेदारी दी थी। इसके अलावा कमांडर हसीब को भी रजिस्टेंस फोर्सेज ने रजिस्टेंस-2 के लिए तालिबानियों के विरोध में बड़ा टास्क दिया है।

कमांडर बाबा और कमांडर हसीब समेत अहमद मसूद की अगुवाई में तालिबानियों के कब्जे वाले ठक्कर राज्य के ख्वाजा गढ़ में भी रजिस्टेंस फोर्सेज ने अपनी पैठ बना ली है। नॉर्दन एलायंस के मुताबिक ढाई दशक पहले शुरू हुए तालिबानियों के विरोध के दौरान भी यही इलाका सबसे पहला गढ़ था, जिसने तालिबानियों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की थी। अहमद मसूद और उनकी सेना ने एक बार फिर से इस गढ़ से आजादी की लड़ाई के लिए अपने लड़ाकों को तैयार करना शुरू कर दिया है।

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