बरतें संयम: कोविड के दौरान अस्पतालों में बढ़े हमले, छुट्टी पर गए कई युवा डॉक्टर
डॉ. भल्ला का कहना है कि आप डॉक्टरों पर ही हमला क्यों कर रहे हो। अपने नेताओं पर क्यों नहीं करते जिन्हें आपने वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया। उनसे पूछिए कि आपके शहर के अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन या दवाओं की कमी क्यों है। इसका प्रबंध करना किसी डॉक्टर का तो काम नहीं है, उसका काम सिर्फ इलाज करना है...
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देश और दुनिया में डॉक्टरों को भगवान और देवदूत माना जाता है। इस कोरोना संक्रमण के दौरान ये साबित भी हो रहा है। डॉक्टर दिन-रात देखे बिना पूरी मेहनत से लोगों को बचाने में जुटे हैं। लेकिन कई बार मरीज को नहीं बचा पाते हैं। फिर मृतक के परिजन डॉक्टरों पर अपना गुस्सा निकालते हैं। इन दिनों देश के कई राज्यों में डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। कोई डॉक्टरों के साथ बदतमीजी कर रहा है तो कोई अस्पताल में तोड़फोड कर रहा है। डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों को लेकर वरिष्ठ डॉक्टर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को आड़े हाथों ले रहे हैं।
मध्यप्रदेश के इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज से निकले और वर्षों से दिल्ली में कार्यरत डॉ. हरीश भल्ला ने अमर उजाला से चर्चा करते हुए कि ये ऐसा समय है जब देश की सारी आबादी अपने इष्टदेव के बाद डॉक्टर को ही अपने भगवान के रूप में देख रही है। ऐसे कठिन दौर में कोई डॉक्टर व अस्पताल के स्टाफ पर हमला करता है तो सरकार को उस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। आज किसी अस्पताल में कोई डॉक्टर काम कर रहा है तो उसका आक्सीजन, बेड और हॉस्पिटल के मैनेजमेंट से कोई भी मतलब नहीं होता है। डॉक्टर केवल अपना धर्म निभाते हुए मरीज का इलाज करता है।
डॉ. भल्ला ने आरोप लगाते हुए आगे कहा कि मेडिकल एसोसिएशन डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करता है लेकिन उन्होंने डॉक्टरों के समर्थन में अभी तक कोई अभियान क्यों नहीं चलाया। एसोसिएशन सिर्फ कॉरपोरेट घरानों से पैसे लेने का काम करता है। मेडिकल एसोसिएशन जनता के बीच जाए और उन्हें समझाए कि डॉक्टर अस्पतालों में मरीज का इलाज करते हैं न कि अस्पताल का प्रबंधन देखते हैं।
डॉक्टरों पर बढ़ते हमले पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. जयेश लेले ने अमर उजाला से कहा, रोज डॉक्टरों पर हमले होने की जानकारी मिल रही है। इस मामले में हमने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखा हैं। हमारी सरकार से मांग कि है कि जो लोग भी डॉक्टर पर हमला कर रहे हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
डॉ. भल्ला ने हमलावारों से सवाल किया, आप डॉक्टरों पर ही हमला क्यों कर रहे हो। अपने नेताओं पर क्यों नहीं करते जिन्हें आपने वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया। उनसे पूछिए कि आपके शहर के अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन या दवाओं की कमी क्यों है। इसका प्रबंध करना किसी डॉक्टर का तो काम नहीं है, उसका काम सिर्फ इलाज करना है। आज डॉक्टरों पर बढ़ते हमले और प्राइवेट अस्पतालों के दबाव के कारण ही नई पीढ़ी के बच्चे डॉक्टर बनने से बच रहे हैं।
डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों पर सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर, निदेशक कम्यूनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला से कहा कि आज लोग सिस्टम से बहुत हताश हो गए हैं। इसलिए लोग गुस्सा होकर डॉक्टर पर हमला कर रहे हैं। देश में कही भी डॉक्टरों पर हमले की कोई घटना होती है तो पूरे स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों को धक्का लगता है। ऐसी घटनाओं के बाद डॉक्टरों का मरीजों के प्रति व्यवहार बदलना स्वाभिक हैं हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों को धैर्य रखना बहुत जरूरी है।
बढ़ते हमलों के बाद डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज मरीज डॉक्टरों की इज्जत नहीं कर रहे हैं। सिस्टम भी ठीक से डॉक्टरों के साथ नहीं खड़ा है। कई अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है। आए दिन डॉक्टरों पर हमले के मामले सामने आ रहे हैं ऐसे में डॉक्टर अपनी लाइफ के बारे में सोचते हुए नौकरी छोड़ने का फैसला ले रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी डॉक्टरों पर हमले की कई घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने एपिडेमिक डिजीज एक्ट, 1897 में बदलाव अध्यादेश के जरिए किया था। इस कानून के तहत मेडिकल स्टाफ पर हमला करने वाले लोगों को 3 माह से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा उनपर 50000 रुपये से दो लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया जाएगा। कानून के मुताबिक, इस तरह के अपराध को गैर-जमानती माना जाएगा।