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कर्नाटक: 24 दिनों में 59 रैलियां करने वाले अमित शाह ने इस तरह किया दक्षिणी द्वार फतह

Thu, 17 May 2018 01:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 17 May 2018 01:48 PM IST
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during Karnataka Election Amit Shah stay for 34 days in state and does 59 public rallies
अमित शाह

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के सदस्यों से कहा कि वह कड़ी मेहनत और समर्पण के रोल मॉडल के तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को देखें। शाह ने कर्नाटक के जनादेश को भाजपा की जीत में बदलने की कोशिश की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार- उन्होंने राज्य में 34 दिन बिताए। इस दौरान उन्होंने 28 जिलों में 57,135 किलोमीटर की यात्रा की।

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शाह ने चुनाव से कहीं पहले कर्नाटक में पार्टी के जमीनी काम की एक रिपोर्ट तैयार की थी। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान 59 जनसभाओं को संबोधित किया और 25 रोड शो किए। भाजपा सूत्रों का कहना है कि उनकी उपस्थिति ने पार्टी के उत्साह को पुनर्जीवित करने का काम किया क्योंकि दो साल पहले हुए उप-चुनाव के दौरान यहां पार्टी हार गई थी।
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शाह ने हर निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर काम करने के लिए एक नेता को नियुक्त किया था। जो मतदाताओं की विस्तृत रिपोर्ट देने के साथ ही मोदी सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों को उन तक पहुंचाएंगे। बूथ स्तरीय बैठकों से लेकर जिला स्तरीय बैठकों तक में घोषणापत्र सम्मेलन हुए। लिंगायतों को अपने पक्ष में करने के लिए शाह ने विभिन्न मठों का दौरा किया।
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जहां एक तरफ स्थानीय नेताओं ने हमेशा मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों पर सीधा हमला नहीं किया। वहीं शाह ने सीधे आलोचना करते हुए कहा कि सिद्धारमैया की सरकार अहिंदा (अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए कन्नड़ में प्रयोग होने वाला संक्षिप्त नाम) नहीं बल्कि अहिंदू (एंटी-हिंदू) है। इस वाक्य का उद्देश्य लिंगायतों के वोट बैंक को भाजपा के साथ रखना था। अप्रैल के पहले हफ्ते भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और लिंगायतों का चेहरा बीएस येदियुरप्पा पर पूरी तरह से निर्भर ना रहते हुए शाह ने प्रचार अभियान को अपने नियंत्रण में कर लिया था।

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