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चुनाव के समय खो जाते हैं हमारे लोकतंत्र के एक तिहाई वोटर्स
Sun, 06 Jan 2019 02:55 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 06 Jan 2019 02:55 PM IST
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भारत के कानून के अनुसार 18 वर्ष के हर नागरिक के पास वोट करने का अधिकार है। 2014 के आम चुनावों में 280 मिलियन भारतीय जो 18 साल से ऊपर थे, जिनके पास वोट करने का अधिकार था और उनका नाम मतदाता सूची में शामिल था उन्होंने वोट नहीं डाले। दुनिया के किसी भी देश में इतनी बड़ी संख्या में मतदाता मौजूद नहीं हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के दूसरा सबसे बड़े लोकतंत्र अमेरिका में 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 183 मिलियन लोग मतदाता के तौर पर पंजीकृत थे। यदि टॉप 20 लोकतांत्रिक देशों को मिलाकर वहां आखिरी बार हुए राष्ट्रीय चुनाव के मतदाताओं की संख्या को देखा जाए तो वह 282 मिलियन थी। इसमें जर्मनी, यूके, स्पेन, साउथ कोरिया जैसे बड़े देश शामिल हैं। ऐसे में 280 मिलियन लोगों का वोट डालना कोई छोटी-मोटी संख्या नहीं है।
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एक मिनट रुककर यह सोचा जाना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग वोट क्यों नहीं कर रहे हैं। यह संख्या 2014 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या का एक-तिहाई हिस्सा है। इसी वजह से चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी पार्टी हकीकत में नॉन वोटर्स पार्टी है क्योंकि लगभग 28 लोगों ने वोट नहीं किया था। 2014 के आम चुनाव में भाजपा 17.2 करोड़ वोट हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जबकि दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को 10.7 करोड़ वोट मिले थे।
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अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं ने वोट नहीं किया? एक फैली हुई भ्रांति है कि बहुत से लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मगर क्या यह सच है? या यह इसलिए है क्योंकि उनमें से कई या अधिकांश वोट नहीं कर सकते हैं? इससे इतर हमारे नेताओं ने प्रॉक्सी वोटिंग के जरिए गैर निवासी भारतीयों (एनआरआई) को भी वोट करने का अधिकार दिया हुआ है। सशस्त्र सेवा में काम कर रहे लोगों और वोटिंग कराने वाले सरकारी कर्मचारियों के पास पोस्टल बैलेट के जरिये वोट डालने का अधिकार है।
इसे यदि आधार माना जाए तो हर भारतीय, चाहे वह जहां भी रहता हो उसके पास वोट डालने का अधिकार होना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ककुछ लोग अपने आलस के कारण चार कदम की दूरी तय करके पोलिंग बूथ तक नहीं जाते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार 454 मिलियन भारतीय प्रवासी हैं। जिसमें से 46 मिलियन नौकरी के लिए और 224 मिलियन (ज्यादातर महिलाएं) शादी के बाद और 4 मिलियन व्यवसाय के लिए विदेश में बस गए हैं।