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Rahul Gandhi: दो सत्रों में नदारद रहे राहुल, बहस में सिर्फ छह बार शामिल
Wed, 08 Mar 2023 05:05 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 08 Mar 2023 05:05 AM IST
सार
राहुल न केवल उपस्थिति के लिहाज से कमजोर सांसद रहे हैं, बल्कि चर्चा और बहस में भी उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है।
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राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राहुल गांधी ने ब्रिटिश थिंक टैंक चैथम हाउस के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम के निदेशक बेन ब्लैंड के साथ चर्चा के दौरान दावा किया कि भारत की संसद में विपक्ष की आवाज खामोश की जाती है। विपक्षी नेता जब बोलते हैं, तो उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं। बहरहाल, इस दावे से दूर राहुल गांधी का एक सांसद के तौर पर प्रदर्शन देखा जाए, तो वह औसत से भी बहुत खराब रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सांसदों की औसत उपस्थिति 79 फीसदी है। वहीं, केरल के सांसदों की उपस्थिति 84 फीसदी रही है। इसके विपरीत केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी की उपस्थिति महज 52 फीसदी ही रही है।
बजट सत्र में उपस्थिति महज 40%
2019 से 2023 के दौरान राहुल गांधी मानसून सत्र 2020 और शीतकालीन सत्र 2022 में पूरी तरह नदारद रहे। इस वर्ष बजट सत्र में भी उनकी मौजूदगी महज 40 फीसदी रही। राहुल न केवल उपस्थिति के लिहाज से कमजोर सांसद रहे हैं, बल्कि चर्चा और बहस में भी उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। देश का एक सांसद औसतन 41 बार बहस में शामिल होता है। वहीं, केरल के सांसदों का यह औसत 68.2 है। इसके विपरीत राहुल महज छह बार बहस में शामिल हुए हैं।
सवाल पूछने में भी पीछे
सवाल पूछने के लिहाज से भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष का प्रदर्शन औसत से नीचे का है। सांसदों की तरफ से संसद में सवाल पूछने का राष्ट्रीय औसत 163 है। केरल के सांसदों का यह औसत 216 है, जबकि राहुल ने 2019-2023 के बीच 92 सवाल पूछे। इस दौरान उन्होंने एक भी प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया, जबकि केरल के सांसदों का औसत 3.7 और राष्ट्रीय औसत 1.2 बिल प्रति सदस्य है।
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सच्चाई उजागर कर रहे आंकड़े
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने आंकड़ों को पेश करते हुए कहा, ये आंकड़े गांधी के झूठ का पर्दाफाश करते हैं। राहुल स्कूल के उस बच्चे की तरह हैं, जिससे शिक्षक जब पूछते हैं कि तुम्हारा होमवर्क कहां है, तो वह कहता है कि मेरा होमवर्क कुत्ते ने खा लिया। गुप्ता ने कहा यह आंकड़े सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं।
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बजट सत्र में उपस्थिति महज 40%
2019 से 2023 के दौरान राहुल गांधी मानसून सत्र 2020 और शीतकालीन सत्र 2022 में पूरी तरह नदारद रहे। इस वर्ष बजट सत्र में भी उनकी मौजूदगी महज 40 फीसदी रही। राहुल न केवल उपस्थिति के लिहाज से कमजोर सांसद रहे हैं, बल्कि चर्चा और बहस में भी उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। देश का एक सांसद औसतन 41 बार बहस में शामिल होता है। वहीं, केरल के सांसदों का यह औसत 68.2 है। इसके विपरीत राहुल महज छह बार बहस में शामिल हुए हैं।
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सवाल पूछने में भी पीछे
सवाल पूछने के लिहाज से भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष का प्रदर्शन औसत से नीचे का है। सांसदों की तरफ से संसद में सवाल पूछने का राष्ट्रीय औसत 163 है। केरल के सांसदों का यह औसत 216 है, जबकि राहुल ने 2019-2023 के बीच 92 सवाल पूछे। इस दौरान उन्होंने एक भी प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया, जबकि केरल के सांसदों का औसत 3.7 और राष्ट्रीय औसत 1.2 बिल प्रति सदस्य है।
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सच्चाई उजागर कर रहे आंकड़े
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने आंकड़ों को पेश करते हुए कहा, ये आंकड़े गांधी के झूठ का पर्दाफाश करते हैं। राहुल स्कूल के उस बच्चे की तरह हैं, जिससे शिक्षक जब पूछते हैं कि तुम्हारा होमवर्क कहां है, तो वह कहता है कि मेरा होमवर्क कुत्ते ने खा लिया। गुप्ता ने कहा यह आंकड़े सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं।