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भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की तरह मील का पत्थर बन रही है मोदी-शाह की जोड़ी

Fri, 31 May 2019 05:02 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Fri, 31 May 2019 05:02 PM IST
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duo of Narendra Modi and Amit Shah is as good as LK Advani and Atal Bihari Vajpayee

एक और एक मिलकर 11 होते हैं। विराट व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी के वाजपेयी के साथ संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले लाल कृष्ण आडवाणी की जोड़ी ने इसे साबित किया तो प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित अनिल चंद्र शाह की जोड़ी उसे दोहरा रही है। अमित शाह संगठन पर आडवाणी से कहीं बेहतर और मजबूत पकड़ रखते हैं। उन्होंने पहली बार लाल कृष्ण आडवाणी की लोकसभा सीट गांधी नगर से चुनाव जीता और मोदी सरकार-2 में केंद्रीय गृहमंत्री बनकर आडवाणी की विरासत को संभाल लिया है।

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अमित शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वास हासिल है। गुजरात में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में भी वह गृहमंत्री थे। जब प्रधानमंत्री ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्रीय राजनीति में कदम रखा तो शाह को साथ ले आए। 
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नरेंद्र मोदी 2013 ने भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान की कमान संभाली और उत्तर प्रदेश के प्रचार अभियान की कमान अमित शाह को सौंप दी। नतीजा सबने देखा। भाजपा की 80 में से 71 और एनडीए की उत्तर प्रदेश में 73 सीटें आईं। केंद्र में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
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प्रधानमंत्री मोदी की सरकार 2019 के लोकसभा मैदान में आई। अमित शाह ने नारा दिया, अबकी बार फिर मोदी सरकार। उत्तर प्रदेश में भाजपा 74 तो देश में 300 के पार। मतदान के बाद एग्जिट पोल ने इस भाजपा 300 पार को दोहराया तो किसी को भरोसा नहीं हुआ, लेकिन मतगणना के नतीजे ने इसे साबित कर दिया। इस बार प्रधानमंत्री अमित शाह को अपने मंत्रिमंडल में ले आए हैं। उन्हें प्रधानमंत्री के बाद दूसरे नंबर की हैसियत वाला गृह मंत्रालय दिया है।

समय और मनुष्य के पारखी हैं मोदी-शाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी ऐसे व्यक्ति पर दांव नहीं लगाया जो अब तक उनके लिए अहितकारी साबित हुआ हो। भाजपा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी ऐसा ही किया है। दोनों की केमिस्ट्री खूब जमती है। राजनीति के गलियारे में भी यह आम है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय, भाजपा और मोदी सरकार-2 की चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि इन चुनौतियों को बिना अमित शाह के पार नहीं पाया जा सकता। इसलिए उन्होंने गृहमंत्री के लिए अमित शाह को ही चुना है। इसी साल हरियाणा, महाराष्ट्र और असम में चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री ने स्थितियों को समझते हुए शाह को यह जिम्मेदारी दी है। चुनौतियों के समीकरण में ही पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा है।

मोदी-शाह की जोड़ी को लगेंगे चार चांद

भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की जोड़ी प्रसिद्धि के शिखर पर रही है। कुछ मुद्दों पर गंभीर मतभेद होने के बाद भी अटल-आडवाणी में कभी मनभेद नहीं हुआ। आडवाणी ने कभी अटल की मुखालफत नहीं की। अंत तक आडवाणी ने संगठन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। भाजपा के संगठन में अनुशासन और धार लेकर आए। जब प्रधानमंत्री का चेहरा चुनने की बारी आई तो आडवाणी ने ही अटल बिहारी वाजपेयी का नाम सुझाया था। 

इसके समानांतर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह का तालमेल और बेहतर है। भाजपा के एक महासचिव का कहना है कि अमित शाह वह सोच ही नहीं सकते जो प्रधानमंत्री को नापसंद हो। वह कहते हैं प्रधानमंत्री के सामने होने पर वह सम्मान में नजर तक नहीं उठाते। यही हाल प्रधानमंत्री मोदी का है। उन्होंने अपना आभा मंडल ऐसा बना रखा है कि किसी सहयोगी को भी अध्यक्ष (अमित शाह) के बारे में प्रधानमंत्री से कुछ कहने के पहले 100 बार सोचना पड़ता है। आडवाणी के एक सलाहकार कहना है कि वास्तव में देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री में ऐसा ही तालमेल होने की जरूरत है।

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