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सरकार के आदेश से सुरक्षा बलों के जवानों के आशियाने पर संकट, लॉकडाउन में मकान खाली करने को कहा

Tue, 09 Jun 2020 07:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 09 Jun 2020 07:31 PM IST
सार

'डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट' के अनुसार, इन कर्मियों को सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन रूल्स 2017 के तहत 17 मार्च से 31 मई के बीच मकान खाली करने के लिए कहा गया था...

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Due to this order of the Ministry of Urban Development, the crisis on the intention of the soldiers of the Central Security Forces, the house will have to be vacated before June 30
CISF - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

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शहरी विकास मंत्रालय के 'डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट' की तरफ से जारी एक आदेश ने केंद्र सरकार के अनेक कर्मियों की नींद उड़ा दी है। इस आदेश का असर केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'CAPF' के हजारों अधिकारी और जवानों पर भी देखने को मिला है।


खासतौर पर वे कर्मी, जिनके परिवार दिल्ली में रहते हैं और वे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, कश्मीर या उत्तर-पूर्व की सख्त तैनाती पर हैं। 'डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट' ने अपने आदेश में कहा है कि जिन कर्मियों के आवास अलॉटमेंट की अवधि मार्च में पूरी हुई थी, उन्हें 30 जून से पहले सरकारी मकान खाली करना होगा।

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कर्मियों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते अभी तक कई तरह की गतिविधियां बंद रही हैं, ऐसे में अब एकाएक वे मकान कैसे खाली करें। कोरोना संक्रमण के केस तेजी से बढ़ रहे हैं।
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स्कूल कालेज बंद हैं, स्कूल बंद होने के कारण बच्चों की परीक्षाएं अधर में हैं और एसएलसी प्रमाण पत्र निकलवाने का संकट है।ऐ से में इन अधिकारियों और जवानों की मांग है कि मौजूदा क्वॉर्टर की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी जाए।
 

'डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट' के अनुसार, इन कर्मियों को सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन रूल्स 2017 के तहत 17 मार्च से 31 मई के बीच मकान खाली करने के लिए कहा गया था।

हालांकि इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के आग्रह पर दो माह की छूट शामिल थी। यह छूट इसलिए दी गई, क्योंकि उस वक्त देश में लॉकडाउन था। अब वह अवधि 30 जून तक बढ़ा दी है।

अगर इस अवधि में कोई कर्मी सरकारी आवास खाली नहीं करता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगेगा। दिल्ली में टी-4 का क्वार्टर है तो पहले महीने के बाद 25 हजार से अधिक की राशि बतौर जुर्माना जमा करानी होगी।

हालांकि यह राशि अधिकारी या कर्मचारी के वेतन में काट ली जाती है। उसके अगले माह इस जुर्माने में दस फीसदी की बढ़ोतरी होती है, उसके बाद 20, 30 और 40 फीसदी बढ़ती रहती है।
 

इस बाबत अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि सभी सेवाओं में पोस्टिंग के अपने नियम हैं।

जैसे सीएपीएफ के फंडामेंटल रूल्स एवं सप्लीमेंटरी रूल्स के तहत यदि किसी कर्मी को दिल्ली में मकान अलॉट किया जाता है और उसके बाद उसे हार्ड पोस्टिंग यानी नक्सल प्रभावित क्षेत्र, उत्तर पूर्व या कश्मीर में भेज दिया जाता है, तो नियमानुसार उसे अपनी पोस्टिंग तक दिल्ली में मकान मिलता है।

एसआर रूल्स के मुताबिक, उत्तर पूर्व की पोस्टिंग दो साल के लिए होती है। उसके बाद संबंधित अधिकारी या जवान को ऐच्छिक पोस्टिंग मिलती है। हालांकि विभिन्न बलों में यह पोस्टिंग अलग-अलग रहती है।

जैसे बीएसएफ में 4 से 6 साल की रहती है। ऐसे में शहरी विकास मंत्रालय ने यह प्रावधान कर रखा है कि संबंधित पोस्टिंग वाले कर्मी को पिछली पोस्टिंग वाली जगह पर तीन साल के लिए मकान अलॉट कर दिया जाएगा।

ऐसे हजारों कर्मी हैं, जिनके परिवार दिल्ली में रह रहे हैं और वे हार्ड पोस्टिंग पर हैं। अब इन सब को 30 जून तक मकान खाली करना है।

कर्मियों का कहना है कि अभी यह कैसे संभव होगा। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठीक से पटरी पर नहीं आई है। कोई प्राइवेट मकान देखते हैं तो मध्यस्थ मुंहमांगी की राशि मांगने लगता है।

एडवांस का एकाएक प्रावधान नहीं है।


सूत्रों के अनुसार, बीएसएफ डीजी ने इस बाबत केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि दिल्ली में जिनके पास सरकारी मकान हैं, फिलहाल उन्हें तीन साल वाली शर्त से मुक्त कर दिया जाए।



बीएसएफ ने ऐसे कर्मियों की उत्तर-पूर्व में छह साल के लिए तैनाती बढ़ा दी है। उन्होंने गृह सचिव से प्रार्थना की है कि वे इस मामले में शहरी विकास मंत्रालय से बात करें।

इससे पहले कि मकान खाली करने का आदेश अधिकारी व जवानों की ड्यूटी में बाधा बने, उक्त आदेश को वापस कराया जाए।

इससे कर्मियों का उत्साह बढ़ेगा और वे अपने परिवार या घर की चिंता किए बिना अच्छे से ड्यूटी कर सकेंगे।

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