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नोटों की कमी, नए साल में भी बना रहेगा कैश का संकट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 26 Dec 2016 03:00 AM IST
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बैंकों और एटीएम में लगी लाइनें
- फोटो : अमर उजाला
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पर्याप्त मात्रा में नए नोटों की उपलब्धता नहीं रहने के कारण 30 दिसंबर के बाद भी लोगों की नकदी समस्या बनी रहेगी। सरकार की योजना खातों से प्रति सप्ताह 24000 रुपये तक की निकासी को जारी रखने और एटीएम की निकासी की सीमा में मामूली बढ़ोतरी ही करने की है।
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हालांकि 30 दिसंबर के बाद शुरुआती कुछ दिनों में एटीएम से निकासी की सीमा को पहले की तरह ही अधिकतम 2500 रुपये रखने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने जनवरी के दूसरे हफ्ते में नए नोटों की उपलब्धता के आधार पर नए सिरे से हालात की समीक्षा करने की योजना बनाई है।
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गौरतलब है कि खुद प्रधानमंत्री ने लोगों से नोटबंदी के फैसले के 50 दिनों तक परेशानी उठाने का अनुरोध किया था। तब माना जा रहा था कि 30 दिसंबर को यह समय सीमा पूरा होने के बाद सरकार नकदी निकासी में बड़ी राहत देगी।
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सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने माना कि फिलहाल नए नोटों की उपलब्धता उम्मीदों के अनुरूप नहीं हो पाई है। चूंकि नए साल के पहले हफ्ते में वेतन बंटेंगे। ऐसे में नकद निकासी में कोई बड़ा बदलाव या रियायत की गुंजाइश नहीं है। हां, दूसरे हफ्ते में स्थिति की समीक्षा के बाद रियायत देने का फैसला किया जा सकता है।
अभी 65 फीसदी नए नोटों की कमी बरकरार
हालांकि इसमें भी खातों से निकासी में और रियायत मिलने की संभावना नहीं है, जबकि एटीएम के जरिये निकासी की सीमा में भी मामूली बढ़ोतरी की ही गुंजाइश है। उक्त मंत्री ने माना कि हालात पहले से बेहतर हैं, मगर इतने भी बेहतर नहीं हैं कि कोई बड़ी रियायत दी जाए। उम्मीद है कि नए साल के दूसरे महीने में नकद निकासी मामले में बड़ी रियायत की गुंजाइश बने।
दरअसल नोटबंदी के फैसले के जरिये जब सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोट प्रचलन से हटाने की घोषणा की थी तब इसके विकल्प के रूप में महज 10 फीसदी नए नोट ही उपलब्ध थे। अब जहां भी नए नोट छापने की व्यवस्था है, वहां की भी अपनी सीमा है।
सरकार को उम्मीद है कि पुराने नोट की जगह भरने केलिए नए नोट की छपाई मार्च महीने तक जारी रहेगी। चूंकि इस बीच अर्थव्यवस्था का एक उल्लेखनीय हिस्सा कैशलेस हो जाएगा, ऐसे में धीरे-धीरे परेशानी दूर हो जाएगी। गौरतलब है कि आरबीआई 20 दिसंबर तक महज 6 लाख करोड़ रुपये के नए नोट ही तैयार कर पाई है जो कि बंद किए गए नोटों का करीब 35 फीसदी ही है।
दरअसल नोटबंदी के फैसले के जरिये जब सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोट प्रचलन से हटाने की घोषणा की थी तब इसके विकल्प के रूप में महज 10 फीसदी नए नोट ही उपलब्ध थे। अब जहां भी नए नोट छापने की व्यवस्था है, वहां की भी अपनी सीमा है।
सरकार को उम्मीद है कि पुराने नोट की जगह भरने केलिए नए नोट की छपाई मार्च महीने तक जारी रहेगी। चूंकि इस बीच अर्थव्यवस्था का एक उल्लेखनीय हिस्सा कैशलेस हो जाएगा, ऐसे में धीरे-धीरे परेशानी दूर हो जाएगी। गौरतलब है कि आरबीआई 20 दिसंबर तक महज 6 लाख करोड़ रुपये के नए नोट ही तैयार कर पाई है जो कि बंद किए गए नोटों का करीब 35 फीसदी ही है।