ड्रोन अटैक से हड़कंप: आसपास ही छिपे हैं 'अंडर ग्राउंड वर्कर', भारतीय सीमा के अंदर से ही भर रहे उड़ान
जम्मू-कश्मीर में पिछले चार दिनों से दिखाई दे रहे ड्रोन ने सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर बैठक कर चुके हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियां इस बात को लेकर ज्यादा परेशान हैं कि ये ड्रोन अगर किसी बड़े हमले की रेकी है तो वह बहुत चिंताजनक बात है। आनन फानन में संवेदनशील प्रतिष्ठान और सामरिक महत्व वाले संस्थानों पर शूटर तैनात किए जा रहे हैं। ड्रोन की फ्रीक्वेंसी पर नियंत्रण करने वाले कुछ उपकरणों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही ड्रोन पॉलिसी पर नए सिरे से काम शुरू हुआ है।
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डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के मौजूदा प्रोजेक्ट 'काउंटर ड्रोन सिस्टम' की ट्रायल रन रिपोर्ट पर दोबारा गौर किया जा रहा है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के एक अधिकारी का कहना है, जितनी चिंता ड्रोन की है, उससे कहीं अधिक परेशानी 'अंडर ग्राउंड वर्कर' की है, जो आसपास ही छिपे हुए हैं। इसकी अधिक आशंका है कि भारतीय सीमा के भीतर से ही ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को अभी तक ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि ड्रोन सीमा पार के हिस्से से आया है।
प्रारंभिक जांच में भी ड्रोन के रूट का कुछ नहीं पता चला है
अतिसंवेदनशील जम्मू एयरफोर्स स्टेशन में रविवार को हुए ड्रोन हमले के बाद जांच एजेंसियां अभी तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं कि वह ड्रोन सीमा पार से एयरफोर्स स्टेशन तक पहुंचा था। हालांकि जांच एजेंसियों ने इसके पीछे पाक समर्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठनों के होने की बात कही है। इन आतंकी संगठनों के जम्मू में सक्रिय 'अंडर ग्राउंड वर्कर' की मौजूदगी बताई गई है।
इसके साथ ही ये हैंडलर ड्रोन उड़ाने से लेकर उसके जरिए हथियार और विस्फोटक गिराने के मास्टर बताए जाते हैं। एनआईए और जम्मू कश्मीर पुलिस ने एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तान सीमा की तरफ जाने वाले सभी रूटों का जायजा लिया है। नदी के आसपास का इलाका भी छान मारा है। इस बात की तकनीकी जानकारी जुटाई गई है कि सीमा पार से एयरफोर्स स्टेशन तक आने में ड्रोन को कितना समय लग सकता है।
जम्मू-कश्मीर: आतंकियों के स्लीपर सेल बन रहे बड़ी चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जम्मू के आसपास इस तरह की आबादी बहुत ज्यादा है, जिसकी बसावट नियमानुसार नहीं हुई हैं। ऐसे इलाकों में पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई या आतंकी संगठनों के 'अंडर ग्राउंड वर्कर' की मौजूदगी बताई जा रही है। स्थानीय पुलिस ने इस बाबत चेकिंग अभियान की शुरुआत भी कर दी है।
आईजी रैंक के एक अधिकारी जो पहले राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसी में काम कर चुके हैं, का कहना है कि जम्मू में दो-तीन वर्षों से आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं। चूंकि कश्मीर में आतंकियों पर सुरक्षा बलों का शिकंजा कसता जा रहा है, उनके सामने नई भर्ती का संकट है, इसलिए उनकी कई तंजीमें अब जम्मू का रुख कर रही हैं।
उक्त अधिकारी का कहना था कि ड्रोन हैंडल करने वाले आसपास ही छिपे हैं। इसका जल्द ही पता लगा लिया जाएगा। कई टीमों को इस काम पर लगाया गया है। ड्रोन को गिराने की तकनीक जल्द मिल जाएगी। इस काम में डीआरडीओ और इंटेलीजेंस एजेंसी 'नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन' की मदद ली जा रही है।