डीआरडीओ को कामयाबी, नई आकाश मिसाइल का पहला परीक्षण सफल
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डीआरडीओ ने सोमवार को आकाश मिसाइल के नए संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। ओडिशा स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र से इसे दागा गया। इसे आकाश-एनजी यानी नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल नाम दिया गया है। यह सतह से हवा में मार करने में सक्षम है। इसे भारतीय वायुसेना के लिए खासतौर से बनाया गया है। सीमाओं पर तनाव व बढ़ते हवाई खतरों को देखते हुए आकाश-एनजी कारगर रहेगी।
DRDO conducted successful maiden launch of Akash-NG (New Generation) Missile from Integrated Test Range off the coast of Odisha today. Akash-NG is a new generation Surface-to-Air Missile meant for use by IAF with an aim of intercepting high manoeuvring aerial threats: DRDO pic.twitter.com/n7qH50GTwt
— ANI (@ANI) January 25, 2021विज्ञापन
सभी कसौटी पर खरी उतरी
डीआरडीओ ने बताया कि नई आकाश मिसाइल लक्ष्य पाने में अचूक रही। परीक्षण के दौरान यह सारी कसौटियों पर खरी उतरी। मिसाइल का कमांड कंट्रोल सिस्टम, एवियोनिक्स, एरोडायनैमिक सिस्टम सभी ने ठीक ढंग से काम किया।
मिसाइल तकनीक में आत्म-निर्भरता के लिए उपराष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों को सराहा
उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडु ने मिसाइल तकनीक के मामले में भारत को आत्म-निर्भरता के करीब ले जाने के लिए सोमवार को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्म-निर्भरता हासिल करना केवल सामरिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के लिहाज से भी जरूरी है।
नायडु ने डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल परिसर में दो केन्द्रों का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि डीआरडीओ के मिसाइल विभाग के वैज्ञानिक अपनी विरासत को बरकरार रखे हुए हैं और उन्होंने नई पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली विकसित की है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार नायडु ने 'एक्सपोजीशन ऑफ टेक्नोलॉजी बाय मिसाइल कॉम्प्लेक्स लैबोरेटरी' का भी दौरा किया और कहा कि स्वदेशी उत्पाद देखकर उन्हें अत्यधिक प्रसन्नता हुई।
नायडु ने कहा कि आत्म-निर्भर मिसाइल तकनीक हासिल करने में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की जबरदस्त प्रगति देखकर मैं देश की सुरक्षा और क्षमता को लेकर एक बार फिर आश्वस्त महसूस कर रहा हूं।