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सेना में 18 महीनों में इंडक्शन के लिए तैयार हो जाएंगे 200 भारतीय हॉवित्जर: डीआरडीओ

Mon, 07 Dec 2020 01:06 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 07 Dec 2020 01:06 PM IST
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drdo says that it would offer over 200 made in india atags howitzers in 18 24 months indian army cds rawat
एडवांस टावर आर्टिलरी गन सिस्टम हॉवित्जर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

भारतीय सेना को इस समय 400 से ज्यादा हॉवित्जर की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए सेना को स्वदेशी या विदेशी विकल्प को चुनना है। ऐसे में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कहा है कि वह ऑर्डर मिलने पर 18 से 24 महीनों में 200 से अधिक मेड इन इंडिया एडवांस टावर आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) हॉवित्जर दे सकता है।

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डीआरडीओ ने निजी क्षेत्र के उद्योग के साथ साझेदारी में इस हॉवित्जर को विकसित किया है। अधिकारियों ने कहा कि मेड इन इंडिया एटीएजीएस हॉवित्जर को भारतीय सेना की आवश्यकताओं के लिए जल्द से जल्द एक संभव समय सीमा में पूरा किया जा सकता है क्योंकि उत्पादन सुविधाएं तैयार हैं। जबकि इस्राइल की तोपों के उत्पादन बुनियादी ढांचे को तैयार करने में लंबा समय लगेगा।
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भारतीय सेना एडवांस हॉवित्जर चाहती है जिन्हें कि जल्द से जल्द चीन की सीमा पर तैनात किया जाएगा। इस्राइल की तोपों को एक लंबी निविदा प्रक्रिया के बाद हरी झंडी दी गई है। हॉवित्जर नकारात्मक आयात सूची में हैं और जिस भी विकल्प का इस्तेमाल किया जाता है, उसका उत्पादन मेक इन इंडिया के तहत भारत में होगा। डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा, 'एटीएजीएस का महाराष्ट्र के अहमदनगर में परीक्षण चल रहा है। हम ऑर्डर मिलने के 18 से 24 महीनों के भीतर सेना को इसकी 200 से अधिक तोपें दे सकते हैं।'
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यह भी पढ़ें- चीन सीमा पर भारतीय सेना सतर्क, अरुणाचल में लाइट हॉवित्जर की होगी तैनाती


डीआरडीओ द्वारा विकसित एटीएजीएस में अपार क्षमता है। यह अपनी श्रेणी की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली तोप है लेकिन कुछ महीने पहले जैसमेलर के रेगिस्तान में परीक्षण के दौरान एक मामूली दुर्घटना हो गई थी। इसपर टिप्पणी करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा, 'परीक्षणों के दौरान सामने आई विफलता के कारण मनोबल को कम नहीं करना चाहिए बल्कि इसकी समीक्षा और निर्माताओं को समस्याओं को दूर करने के तरीकों की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।'

तीनों सेनाओं के अध्यक्षों और डीआरडीओ के समर्थन के साथ सीडीएस पहले ही एक नकारात्मक आयात सूची जारी कर चुके हैं और जल्द ही स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक और सूची जारी की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बलों को स्पष्ट कर दिया है कि जहां से भी अच्छे स्थानीय उत्पादों को प्राप्त करने का विकल्प मौजूद होगा, वहां विदेशी उपकरणों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

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