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केरल के असली कोरोना योद्धा हैं डॉ. विश्वास मेहता, अब मिली ये अहम जिम्मेदारी

Sun, 07 Jun 2020 12:48 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, केरल
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, केरल Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 07 Jun 2020 12:48 PM IST
सार

  • केरल में कोरोना को काबू करने में सफल रही सरकार
  • डॉ. विश्वास मेहता को कोरोना से लड़ाई जीतने का सबसे ज्यादा श्रेय 
  • डॉ. विश्वास मेहता को केरल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया

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dr vishwas mehta 33 years of dedicated administrative officer dedicated to kerala now become chief secretary
डॉ विश्वास मेहता बनेंगे केरल राज्य के मुख्य सचिव - फोटो : ANI (File)

विस्तार

देश में कोरोना के हर दिन बढ़ते हजारों मामलों के बीच केरल ने अपनी सटीक निगरानी प्रणाली, मजबूत स्वास्थ्य ढांचे और समयोचित प्रशासनिक कदमों से महामारी पर तो नियंत्रण किया ही है, साथ में प्रवासी मजदूरों से जुड़े मामलों को इतनी कुशलता के साथ संभाला कि केरल अब दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बन गया है।

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राज्य में कोरोना को काबू करने का सबसे ज्यादा श्रेय राज्य के मुख्य सचिव डॉ. विश्वास मेहता को दिया जा सकता है। डॉ. मेहता पिछले 33 सालों से केरल को अपनी कर्मभूमि बनाए हुए हैं और उन्होंने राज्य के गृह विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर रहते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल बैठाया है। 
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केरल सरकार ने डॉ. मेहता को बुधवार को राज्य का मुख्य सचिव बनाने का निर्णय लिया। वह टॉम जोस की जगह लेंगे, जो 31 मई को सेवानिवृत्त हुए हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी विश्वास मेहता ने जून 1987 में कोल्लम के सहायक कलेक्टर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था।
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उसके एक साल बाद वायनाड के सहायक कलेक्टर बने और 1991 में राजस्व विभाग में उप सचिव और 1992 में वह केरल के रबर विपणन महासंघ के प्रबंध निदेशक बनाए गए। वह इडुक्की और वायनाड के कलेक्टर भी रहे। उन्होंने स्वास्थ्य सचिव, प्रधान शिक्षा सचिव, प्रधान राजस्व सचिव, राजस्व अतिरिक्त मुख्य सचिव आदि के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं है।

केरल में प्रवासी श्रमिकों को ‘अतिथि श्रमिक’ का नाम भी डॉ. मेहता ने दिया था। उनका कहना है कि राज्य ने अपने इन पांच लाख से अधिक अतिथियों को कुटुंबश्री सामुदायिक रसोई के जरिए उनकी पसंद का खाना परोसा और उन्हें मास्क और सैनिटाइजर देने के अलावा उनके मोबाइल फोन में 100 से 200 रुपये का रिचार्ज भी करवाया ताकि वो लोग अपने परिजनों की खबर लेते रहें। 

इसके अलावा इन श्रमिकों के लिए बनाए गए कॉल सेंटर में ऐसे लोगों को तैनात किया गया, जिन्हें छह भाषाओं का ज्ञान था। डॉ. विश्वास मेहता राजस्थान के उदयपुर संभाग के डूंगरपुर क्षेत्र के मूल निवासी हैं और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं केरल के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव रहते हुए स्वाइन फ्लू और इबोला जैसी बीमारियों के विरुद्ध भी सफलतापूर्वक जंग लड़ चुके हैं।

उनका अनुभव इस बार भी काम आया और उन्होंने राज्य के मजबूत स्वास्थ्य ढांचे को सही दिशा में इस्तेमाल करते हुए कोरोना का सफलतापूर्वक मुकाबला किया। उनका मानना है कि विपरीत परिस्थितियों में सरकार और प्रशासन की बेहतर रणनीति, उचित सूझबूझ, सही पूर्वानुमान के साथ साथ श्रेष्ठ कार्य योजना तथा जमीनी स्तर पर तालमेल और कार्य कुशलता से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।


राजस्थान के लोगों को इस बात पर गर्व हो सकता है कि उनके राज्य के एक नौकरशाह ने केरल में कोविड -19 के खिलाफ बहुत बहादुरी और कुशल रणनीति से जंग लड़ी है। लेकिन डॉ विश्वास इसका पूरा श्रेय सरकार और केरल की सदियों पुरानी परंपराओं और इस शिक्षित राज्य के मजबूत स्वास्थ्य ढांचे को देते हें।

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