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कोरोना: डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा- वायरस के नए स्वरूपों के खिलाफ बूस्टर डोज की पड़ेगी जरूरत

Sat, 24 Jul 2021 02:58 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 24 Jul 2021 02:58 AM IST
सार

  • वायरस के नए स्वरूपों से लड़ने के लिए हमें होगी बूस्टर डोज की जरूरत
  • कोवाक्सिन वैक्सीन का बच्चों पर चल रहा है परीक्षण
  • जिन इलाकों में संक्रमण दर कम है वहां खोले जा सकते हैं स्कूल

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Dr. Randeep Guleria says booster dose will be needed against new forms of Coronavirus
रणदीप गुलेरिया, डायरेक्टर, एम्स - फोटो : ANI

विस्तार

वायरस के लगातार बदले स्वरूप को देखते हुए भविष्य में टीके की अगली पीढ़ी की बूस्टर डोज लगाने की जरूरत पड़ सकती है। यह कहना है एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का। उन्होंने कहा, समय के साथ इम्युनिटी में गिरावट होगी और ऐसे में लगता है कि बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ सकती है।

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वायरस के नए स्वरूपों से लड़ने के लिए हमें बूस्टर डोज की जरूरत होगी। उन्होंने साफ किया कि बूस्टर डोज अगली पीढ़ी की दवा होगी। दूसरी पीढ़ी के ये टीके बेहतरीन इम्युनिटी देंगे जो वायरस के नए स्वरूपों के खिलाफ प्रभावी और असरदार होंगे। इन बूस्टर खुराकों का परीक्षण चल रहा है।
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संभवत: इस साल के अंत तक बूस्टर डोज की जरूरत पड़े, लेकिन यह तभी होगा जब एकबार पूरी आबादी का टीकाकरण हो जाए। उसके बाद ही बूस्टर डोज दी जाएगी। वहीं उन्होंने बताया कि कोवाक्सिन का बच्चों पर परीक्षण चल रहा है, उम्मीद है कि सितंबर तक इसके नतीजे आ जाएंगे। गुलेरिया ने कहा कि सितंबर तक बच्चों के लिए टीके आ जाएंगे। उसके बाद ही चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाएंगे।
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कम संक्रमण दर वाले इलाकों में खोल सकते हैं स्कूल: गुलेरिया
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कहा कि जिन इलाकों में संक्रमण दर कम है वहां स्कूल खोले जा सकते हैं। हालांकि पूरी निगरानी के साथ ही ऐसा किया जाना चाहिए।

गुलेरिया ने कहा, हमें अब संतुलन बनाना होगा। महामारी के इस दौर में कंप्यूटर और मोबाइल की उपलब्धता नहीं होने पर बहुत से बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा। इससे वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं।


यही नहीं शिक्षा के साथ साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए क्लासरूम पढ़ाई बेहद जरूरी है। अब जहां देश में कोरोना के मामले घट रहे हैं। हम विशेष सावधानी बरतते हुए जिन इलाकों में संक्रमण दर कम हो वहां पहले की तरह स्कूल शुरू कर सकते हैं।

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