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राहत की बात : ब्लैक फंगस से खतरनाक नहीं है व्हाइट फंगस, आसानी से हो सकता है इलाज
Sat, 22 May 2021 05:04 AM IST
Jeet Kumar
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 22 May 2021 05:04 AM IST
सार
- कहा, देश को गलतफहमी का शिकार न बनाएं
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश अब व्हाइट फंगस की समस्या से जूझ रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह ब्लैक फंगस से भी खतरनाक है। हालांकि, संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ईश्वर गिलाडा का कहना है कि यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन इसे बड़ा बना दिया गया है। देश को ऐसे कोई गलतफहमी का शिकार न बनाएं।
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आर्गनाईज मेडिसिन अकेडमी गिल्ड के महासचिव डॉ. ईश्वर गिलाडा ने कहा, व्हाइट फंगस बेहद साधारण फंगस है, जिसे हम लोग बरसों से देख रहे हैं। यह कैडिडा बीकॉन्स नाम के फंगस से होता है। उसे कैंडेडियासिस कहते हैं। औरतों में ल्यूकोरिया नाम की जो बीमारी होती है, उसमें श्वेत प्रदर होता है। उसमें आधे श्वेत प्रदर कैंडिडिया से होते हैं और 3-4 दिन में ठीक हो जाता है।
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उसी ढंग से एचआईवी के मरीज होते हैं। व्हाइट फंगस की समस्या उन्हें आती है, जो इमिनो कंप्रोमाईज, अस्थमा के मरीज हैं और स्टेरायड लेते हैं। जिसका शुगर ज्यादा हो जाता है, उसमें कैंडिडा इन्फेक्शन होता है। कैंडिडा के धब्बे जीभ के ऊपर और तालुओं पर सफेद रंग के होते हैं, इसलिए उसका नाम व्हाइट फंगस दे दिया गया।
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फंगस को नाम से पहचानें, रंग से नहीं
किसी फंगस को उसके नाम से पहचाना जाना चाहिए रंग से नही, क्योंकि ऐसे कई रंग के फंगस होते हैं। डॉ. गिलाडा ने कहा, जैसे एस्परजिलोसिस ग्रे और ब्लैक रंग का है। ब्लास्टोमाइकोसिस भूरे रंग का है। हिस्टोप्लाज्मोसिस ऑरेंज कलर का है। ठीक से जांच होने के बाद इसका इलाज भी आसान है। ऐसे कई एंटी फंगल ड्रग्स हैं, जिससे तीन से छह दिन में इलाज हो जाता है।
मधुमेह अनियंत्रित और इम्यूनिटी कमजोर होने पर रखे ध्यान
डॉ. गिलाडा ने कहा, आपको मधुमेह (शुगर) नियंत्रित रखना है और जब इम्यूनिटी कमजोर होती है तो इसका ध्यान रखना है कि कहीं फंगस तो नहीं हुआ है। जब शरीर में शुगर बढ़ जाता है और स्टेरॉयड की वजह से इम्यूनिटी कम होती है तो फंगस आ जाता है। यह एक अवसरवादी बीमारी है।