संस्था ने चेताया, अंडमान में मारे गए अमेरिकी का शव न ढूंढे, हो सकता है ये बड़ा खतरा
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अंडमान-निकोबार द्वीप पर मारे गए अमेरिकी नागरिक जॉन ऐसन चाउ (26) के शव की तलाश की जा रही है। चाउ की सेंटिनल जनजाति के लोगों ने हत्या कर दी थी। अब एक अधिकार संगठन ने पुलिस से आग्रह किया है कि चाउ के शव को ढूंढने के प्रयास न किए जाएं। उनका कहना है कि इससे जनजाति के बीच बीमारी फैलने का खतरा है।
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अंडमान-निकोबार द्वीप पर मारे गए अमेरिकी नागरिक जॉन ऐसन चाउ (26) के शव की तलाश की जा रही है। चाउ की सेंटिनल जनजाति के लोगों ने हत्या कर दी थी। अब एक अधिकार संगठन ने पुलिस से आग्रह किया है कि चाउ के शव को ढूंढने के प्रयास न किए जाएं। उनका कहना है कि इससे जनजाति के बीच बीमारी फैलने का खतरा है।
बता दें ये जनजाति इस द्वीप पर करीब 60,000 सालों से रह रही है। इन लोगों को कोई भी बीमारी आसानी से लग सकती है। इनमें रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता भी नहीं होती क्योंकि ये बाहरी दुनिया से बिल्कुल कटे हुए हैं। यहां तक कि अगर कोई पर्यटक सामान्य फ्लू वाले वायरस के साथ यहां आ जाए तो उससे ये पूरी जनजाति समाप्त हो सकती है।
17 नवंबर को इन लोगों ने चाउ की हत्या कर दी थी। चाउ को यहां तक लाने वाले मछुआरे ने कहा कि इन लोगों ने चाउ को मारकर बीच पर ही दफना दिया था। मामले में पुलिस ने अभी तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें ये मछुआरा भी शामिल है। चाउ यहां ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आए थे।
पुलिस भी जब शनिवार को चाउ के शव की तलाश में गई तो जनजाति के लोगों ने उनपर हमला कर दिया। जिसके बाद पुलिस को वहां से वापस लौटना पड़ा। चाउ के शव की तलाश के लिए पुलिस अब मानवविज्ञानी और मनोवैज्ञानिकों की मदद ले रही है। इस संगठन का नाम है सर्वाइवर इंटरनेशनल। यह संस्था स्वदेशी जनजातियों के अधिकारों के लिए अभियान चलाती है।
इनका कहना है कि चाउ के शव को ढूंढना न केवल जनजाति बल्कि भारतीय अधिकारियों के लिए भी खतरनाक है। बाहर से कोई व्यक्ति अगर उन तक पहुंचा तो एक मामूली सा फ्लू भी उनके लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं अगर उन्होंने हमला किया तो उससे अधिकारियों को नुकसान हो सकता है।
साल 2006 में जनजाति ने दो नाविकों की हत्या कर दी थी। वह लोग गलती से द्वीप पर भटक गए थे। साल 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद इन लोगों ने किसी भी प्रकार की बाहरी सहायता को अस्वीकार कर दिया। जब सुनामी के दौरान इन्हें बचाने के लिए एक रेस्क्यू हेलिकॉप्टर आया तो इन्होंने उसपर भाले और तीर से हमला किया।
वहीं अंडमान-निकोबार द्वीप के डीएसपी दीपक पाठक का कहना है, ""हम मानवविज्ञानी और मनोवैज्ञानिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अगर वह कोई तरीका बताते हैं, जिसमें हमें इनका सामना भी न करना पड़े तो हम कोई रणनीति बना सकते हैं।" उन्होंने कहा कि हमारा सेंटिनल का सामना करने का कोई इरादा नहीं है।
मानवविज्ञानी, पत्रकार और कार्यकर्ताओं के एक समूह का कहना है कि चाउ के शव को ढूंढने के प्रयास से हिंसा और अधिक फैल सकती है। उन्होंने कहा, "सेंटिनल जनजाति के अधिकारों का आदर करने की आवश्यकता है। संघर्ष और तनाव को बढ़ाकर कुछ हासिल नहीं होने वाला है। इससे स्थिति और भी अधिक खराब हो सकती है।"