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SC: 'हमें अपने एजेंडे में मत घसीटिए', सुप्रीम कोर्ट की NCPCR को मिशनरियों के खिलाफ SIT जांच की याचिका पर फटकार

Tue, 24 Sep 2024 05:26 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 24 Sep 2024 05:26 PM IST
सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने एनसीपीसीआर को फटकार लगाते हुए कहा कि आप हमें अपने एजेंडे में मत घसीटिए। बता दें कि एनसीपीसीआर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में मिशनरियों के खिलाफ एसआईटी जांच के लिए याचिका दाखिल की गई थी।

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Dont' drag us into your agenda: SC slams NCPCR over plea seeking SIT probe against missionaries
सुप्रीम कोर्ट की NCPCR को फटकार - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एनसीपीसीआर से कहा कि वह मदर टेरेसा की तरफ से स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के झारखंड में मौजूद आश्रय गृहों की तरफ से कथित तौर पर बेचे गए बच्चों के मामलों की एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को अपने एजेंडे में मत घसीटिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आयोग की याचिका
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति नोंगमईकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को फटकार लगाते हुए बाल अधिकार निकाय की तरफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि मांगी गई राहत अस्पष्ट और सर्वव्यापी है, और इस पर विचार नहीं किया जा सकता। इस मामले में पीठ ने एनसीपीसीआर की ओर से पेश हुए वकील से कहा, सुप्रीम कोर्ट को अपने एजेंडे में मत घसीटिए। आपकी याचिका में किस तरह की राहत मांगी गई है? हम इस तरह के निर्देश कैसे दे सकते हैं? याचिका को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया है।
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'NCPCR को जांच और कार्रवाई करने का अधिकार'
मामले की सुनवाई की शुरुआत में, एनसीपीसीआर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिका में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए झारखंड में ऐसे सभी संगठनों की शीर्ष अदालत की निगरानी में समयबद्ध जांच के निर्देश दिए गए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि एनसीपीसीआर को बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 के तहत कानून के अनुसार जांच करने और कार्रवाई करने का अधिकार है। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
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2020 में NCPCR ने दायर की थी याचिका
एनसीपीसीआर ने 2020 में दायर अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत गारंटीकृत मानव तस्करी पर रोक लगाने के मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग की थी। आयोग ने कहा था कि कई राज्यों में बाल गृहों में विसंगतियां पाई गई हैं और इसने उन्हें अपनी याचिका में पक्षकार बनाया है।


आयोग ने लगाए थे तमाम आरोप
आयोग की याचिका में झारखंड में बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों का हवाला दिया गया था और कहा गया था कि राज्य के अधिकारियों ने नाबालिगों की सुरक्षा के लिए एक उदासीन दृष्टिकोण अपनाया है। याचिका में कहा गया है, याचिकाकर्ता (एनसीपीसीआर) की तरफ से की गई जांच के दौरान पीड़ितों ने चौंकाने वाले खुलासे किए, जिसमें यह तथ्य भी शामिल था कि बाल गृहों में बच्चों को बेचा जा रहा था। इन तथ्यों को राज्य सरकार (झारखंड) के संज्ञान में जोरदार तरीके से लाया गया, लेकिन जांच को बाधित करने और पटरी से उतारने के लगातार प्रयास किए गए।


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