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घरेलू हिंसा अधिनियम: सुप्रीम कोर्ट ने डिफॉल्टर राज्यों को दिया कड़ा संदेश, रिपोर्ट न देने पर जुर्माना भी

Tue, 18 Feb 2025 05:37 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 18 Feb 2025 05:37 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने आज घरेलू हिंसा कानून के क्रियान्वयन पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करने के लिए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई है। साथ ही  5,000 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। 

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Domestic Violence Act: SC slams states, UTs for not filing status reports News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को घरेलू हिंसा कानून के क्रियान्वयन पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करने के लिए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई है और  5,000 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह का समय दिया है, साथ ही चेतावनी दी कि अगर वे रिपोर्ट दाखिल नहीं करते हैं, तो अगली बार जुर्माना दोगुना हो जाएगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की है।

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मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की। 

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले 2 दिसंबर 2024 को आदेश दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस कानून के कार्यान्वयन पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए। 17 जनवरी को कोर्ट ने रिपोर्ट दाखिल करने की समय सीमा 14 फरवरी तक बढ़ा दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का सही तरीके से पालन और कार्यान्वयन केवल केंद्र का नहीं, बल्कि संबंधित राज्य सरकारों का भी कर्तव्य है। इसके अलावा, याचिका में महिलाओं के लिए सुरक्षा अधिकारियों, सेवा प्रदाताओं और आश्रय गृहों की पर्याप्त नियुक्ति की मांग की गई है, ताकि इस कानून का सही तरीके से पालन हो सके।

इन राज्यों का नाम शामिल
कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और असम इन डिफॉल्टर राज्यों में शामिल हैं। साथ ही दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेशों ने भी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि अगर आप रिपोर्ट नहीं दाखिल करते हैं, तो जुर्माना अगली बार दोगुना कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि यह मामला 2005 के घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर है, और सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में आदेश दिया था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस कानून के कार्यान्वयन पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए।

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