UCC: क्या सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का संदेश देना चाहते हैं PM? जानें 2024 से पहले यूसीसी की चर्चा के मायने
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विस्तार
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना को लेकर देश के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल काफी उत्साहित हैं। 3 जुलाई को संसद की स्थायी समित ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई है। इस समिति के चेयरमैन सुशील कुमार मोदी हैं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समान नागरिक संहिता विधेयक के मसौदे को संसद के मानसून सत्र में पेश करके इतिहास रचने का संदेश देने की तैयारी कर रहे हैं।
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में धारा-370 की समाप्ति के बाद अब देश में समान नागरिक संहिता को लागू कराना प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य एजेंडे में है। यह तीनों मुद्दे देश के गणतांत्रिक राज्य बनने के समय से ही चर्चा में हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 2019 के चुनाव घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) में समान नागरिक संहिता कानून को देश में लागू करने का वादा किया गया था।
वह कहते हैं कि भाजपा जो कहती है, उसे पूरा करती है। अब समान नागरिक संहिता को देश में कानून का दर्जा देने में कोई संदेह नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने खुद इसकी घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री मोदी की पिछली कैबिनेट में मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि हमें तो इसकी प्रसन्नता है कि समान नागरिक संहिता के विधेयक का मसौदा मानसून सत्र में पेश हुआ तो आजाद भारत और प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में यह भी अपने आप में एक इतिहास होगा।
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एक तीर से सरकार साधेगी कई निशाने
- 14 जुलाई से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में विपक्षी एकता की बैठक अब शिमला की जगह बेंगलुरु में होने वाली है। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे खास अहमियत नहीं दी है। उन्होंने 23 जून को पटना में हुई बैठक को फोटो सेशन करार दिया था। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा अचानक समान नागरिक संहिता का मुद्दा छेड़ देने के बाद विपक्ष की एकता में बड़ी दरार आने की संभावना है।
- भाजपा के महाराष्ट्र के नेता चंद्रकांत पाटिल को भी इससे काफी उम्मीदें हैं। समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले अपना समर्थन जता दिया। हिंदुत्व के मुद्दे पर राजनीति का आधार खड़ा करने वाली शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को भी इसके साथ खड़े दिख रहे हैं। हिमाचल कांग्रेस के नेता विक्रमादित्य सिंह ने भी इस मुद्दे पर राय दी और समान नागरिक संहिता का समर्थन कर किया।
- जेडीयू के केसी त्यागी सबों की राय लेकर इसे लागू करने की बात कह दी। इस तरह से सरकार ने एकजुट हो रहे एक दर्जन से अधिक दलों के सामने इस मुद्दे पर उनकी एकता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे विपक्ष को सरकार ने अपने इस राजनीतिक दांव में उलझा दिया है।
कांग्रेस भी कर सकती है अपना रुख साफ
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के आवास पर शनिवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल समेत तमाम दिग्गज मौजूद रहे। खबर है कि इस बैठक में समान नागरिक संहिता को लेकर पार्टी के रुख पर चर्चा हुई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता ने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में समय रहते पार्टी की राय स्पष्ट हो जानी चाहिए। हालांकि, इस मुद्दे पर केसी वेणुगोपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी राय दी है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक कोई नीतिगत फैसला नहीं लिया है। माना जा रहा है कि सरकार की नीति में खोट को आधार बनाकर कांग्रेस समान नागरिक संहिता के मुद्दे के विरोध का फैसला भी ले सकती है।
3 जुलाई को क्या होगा?
कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसद की स्थायी समिति ने 3 जुलाई को बैठक बुलाई है। इस समिति के अध्यक्ष बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी हैं। 3 जुलाई की बैठक का मुख्य मुद्दा देश में समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर हितधारकों से चर्चा करना है। इस समित में 31 सांसद हैं। समिति ने सांसदो को सूचित किया है कि इसमें समान नागरिक संहिता पर उनके विचार लिए जाएंगे। इस समिति की बैठक और सरकार की रणनीति को देखते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है।