चिकित्सकों का सरकार को पत्र: दोहराई जा रही हैं पिछले साल की गलतियां, गैरजरूरी दवाओं और जांच से बचने की जरूरत
देश में कोरोना वायरस महामारी के एक बार फिर सिर उठाने के बीच चिकित्सकों ने केंद्र और राज्य की सरकारों को एक खुला पत्र लिखकर उन गलतियों को लेकर चेतावनी दी है जो 2021 में की गई थीं और जिन्हें इस लहर में भी दोहराया जा रहा है।
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देश और विदेश के करीब 32 प्रख्यात चिकित्सकों ने भारत में कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारों को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कोरोना वायरस महामारी की वर्तमान लहर से निपटने के लिए जांच के अनुचित तरीकों और दवाओं को लेकर चेतावनी दी गई है। इस खुले पत्र में कहा गया है कि दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो सकता है, जैसा कि हमने इस महामारी की शुरुआती दो लहरों में देखा है।
पत्र में कहा गया, डेल्टा लहर की भयावह मृत्यु दर और उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद हम देख रहे हैं कि कोविड-19 के क्लिनिकल प्रबंधन के दौरान वही गलतियां दोहराई जा रही हैं जो हमने साल 2021 में की थीं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उन दवाओं और जांचों का इस्तेमाल बंद करने के लिए दखल दें जो इस महामारी के क्लिनिकल प्रबंधन के लिए उचित नहीं हैं। बड़ी संख्या में एसिम्टोमैटिक और हल्के लक्षण वाले मरीजों को दवा की कम जरूरत या नहीं पड़ेगी।
'गैरजरूरी दवाओं का परामर्श देना उचित अभ्यास नहीं'
चिकित्सकों ने कहा, 'हमने पिछले दो सप्ताह में कई चिकित्सकीय परामर्शों की समीक्षा की है, जिनमें कई कोविड-19 किट और कॉकटेल भी शामिल हैं। कोरोना वायरस के इलाज के लिए विटामिन के कॉम्बिनेशन, एजिथ्रोमाईसीन, डॉक्सीसाइक्लीन, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर और आइवरमेक्टिन की दवाओं का परामर्श देना उचित नहीं है।' पत्र में कहा गया कि सरकारों और मेडिकल संगठनों को ऐसे अभ्यासों पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
'अतिरिक्त जांच कराने की भी कोई आवश्यकता नहीं है'
इस पत्र में अनुचित दवाओं के लिए भारत में म्यूकरमाइकोसिस और ब्राजील में एस्परगिलोसिस जैसे कवक संक्रमण को जिम्मेदार बताया गया है। इसके साथ ही इस पत्र में यह भी कहा गया है कि अधिकतर कोविड मरीजों को उनकी रैपिड एंटीजेन जांच या आरटी-पीसीआर जांच पॉजिटिव आने के बाद किसी तरह की कोई अतिरिक्त जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, कुछ मामलों में घरेलू स्तर पर ऑक्सीजन स्तर के मापने की जरूरत पड़ सकती है।
'ओमिक्रॉन अधिक संक्रामक है लेकिन इतना घातक नहीं'
वहीं, ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर पत्र में कहा गया है कि यह वैरिएंट उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है जो पूर्व में संक्रमित हो चुके हैं या टीकाकरण करवा चुके हैं। लेकिन, इससे संक्रमण की वजह से मृत्यु दर कम रहेगी। पत्र में चेतावनी दी गई है कि मरीज बिना चिकित्सकीय स्पष्टीकरण के अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है और कोविड संक्रमितों के अलावा अन्य मरीजों को इलाज कराने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।