संकट में ‘भगवान’: कोरोना संक्रमित डॉक्टरों-नर्सों को भी नहीं मिल पा रहा इलाज, ड्यूटी के चलते घरवाले भी हो रहे बीमार
- दिल्ली सहित देश के सभी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव, लोगों को नहीं मिल पा रहे बेड, ऑक्सीजन और दवाएं
- कोविड 2.0 में डॉक्टरों नर्सों को मिल रही पर्याप्त पीपीई किट्स, मास्क
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कोरोना के कारण देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है। लोगों को न तो अस्पतालों में जगह मिल पा रही है और न ही ऑक्सीजन या दवाएं। यह स्थिति केवल मरीजों के लिए ही नहीं है, बल्कि धरती पर ‘भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टर भी इससे अलग नहीं हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान इन्हें मिलने वाली सभी विशेष सुविधाएं तो बंद हो ही चुकी हैं, अब उन्हें भी अस्पतालों में भर्ती होने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। जीबी पंत अस्पताल के कर्मचारियों का आरोप है कि अगर वे लोगों की सेवा करते हुए संक्रमित भी हो जा रहे हैं, तो उन्हें अपने ही अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डॉक्टर विजय कुमार ने अमर उजाला को बताया कि अब तक संस्थान के सौ से अधिक डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन इन लोगों के इलाज में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों-नर्सों की कोरोना ड्यूटी के कारण उनके परिवार के लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। इससे डॉक्टरों पर भारी दबाव है। अगर इन लोगों को प्राथमिकता के साथ इलाज मिल सके तो लोगों को ज्यादा बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना संभव हो सकेगा।
नर्सों को नहीं मिल रही पर्याप्त सुविधाएं
दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के महासचिव लीलाधर रामचंदानी ने कहा कि एक नर्स को एक हफ्ते में 40 घंटे की ड्यूटी की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कोरोना काल में स्टाफ पर भारी दबाव के कारण उन्हें 50 से 60 घंटे तक की अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके बाद भी उन्हें पर्याप्त अवकाश नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण उनमें तनाव और चिंता बढ़ रही है। इससे नर्सों की क्षमता पर असर पड़ रहा है।
लीलाधर रामचंदानी ने कहा कि जीबी पंत अस्पताल में अपनी ही नर्सों के बीमार होने पर उन्हें अपने ही अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के किसी कर्मचारी के संक्रमित हो जाने पर उन्हें एलएनजेपी अस्पताल जाने की सलाह दे दी जाती है, जो पहले से ही मरीजों से पूरी तरह भरा पड़ा है। ऐसे में बीमार नर्सों के इलाज की कोई विशेष सुविधा न होने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं।
राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नर्सों ने प्रबंधन को पत्र लिखकर अपने लिए विशेष क्वारंटीन सेंटर बनाने की मांग की है जहां अस्पताल की संक्रमित होने वाली नर्सों को आसानी से रखा जा सके और प्राथमिकता के साथ उनका इलाज किया जा सके।
मौलाना आज़ाद डेंटल कॉलेज के डॉक्टर सचिन ने कहा कि इस बार डेंटल डॉक्टर्स को भी कोरोना ड्यूटी में लगा दिया गया है। यहां वे लोगों का आरटीपीसीआर टेस्ट कर रहे हैं और उन्हें आवश्यक सलाह भी दे रहे हैं। लेकिन यहां दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पर्याप्त पीपीई किट्स, मास्क
कोरोना फेज-1 में डॉक्टरों-नर्सों को पर्याप्त पीपीई किट्स नहीं मिल पा रही थीं। लेकिन उसके बाद इनका तेजी से निर्माण शुरू हुआ और अब उसका असर दिखाई पड़ रहा है। कोरोना के इस संकटकाल में डॉक्टरों-नर्सों और अन्य स्टाफ को पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स, सर्जिकल मास्क और सैनिटाइजर जैसी अन्य चीजें मिल पा रही हैं। यही कारण है कि इस बार कोरोना की पहली लहर की तुलना में काफी कम डॉक्टर-नर्स संक्रमित हो रहे हैं।