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संसद की कार्यवाही पर प्रति घंटे खर्च होते हैं 1.5 करोड़ रुपये, महज 80 दिन ही होता है काम

Sun, 22 Jul 2018 11:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 22 Jul 2018 11:32 AM IST
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18 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ हो गया है। यह सत्र शुरुआत से ही सुर्खियों में रहा। इसी सत्र में सरकार के खिलाफ तेलुगू देशम पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई जिसे कि स्पीकर सुमित्रा महाजन ने स्वीकार करते हुए शुक्रवार को चर्चा का दिन नियुक्त किया था। केंद्र सरकार के खिलाफ आया यह प्रस्ताव औंधे मुंह गिरा और सरकार पर छाए संकट के बादल छंट गए। यह सत्र 10 अगस्त तक जारी रहेगा। पिछले कई सत्रों के दौरान भी संसद के कामकाज पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि संसद में बर्बाद हुए समय का मूल्य कितना होता है।

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संसद की कार्यवाही पर प्रति घंटे खर्च होते हैं 1.5 करोड़ रुपए

एक रिपोर्ट के अनुसार 29 जनवरी से 9 फरवरी और 5 मार्च से 6 अप्रैल 2018 तक दो चरणों में चले बजट सत्र में 190 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च हुए। यानी प्रति मिनट संसद की कार्यवाही पर तीन लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आया। संसदीय आंकड़ों की बात करें तो 2016 के शीतकालीन सत्र के दौरान 92 घंटे व्यवधान की वजह से बर्बाद हो गए थे। इस दौरान 144 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जिसमें 138 करोड़ संसद चलाने पर और 6 करोड़ सांसदों के वेतन, भत्ते और आवास पर खर्च हुए। 
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80 दिन से ज्यादा नहीं होता कामकाज

एक साल के दौरान संसद के तीन सत्र होते हैं। इसमें से भी अगर साप्ताहांत और अवकाश को निकाल दिया जाए तो यह समय लगभग तीन महीने का रह जाता है। यानी केवल 70-80 दिन कामकाज होता है जिसमें भी संसद ठीक तरह से चल नहीं पाती है। केवल 1992 में संसद का कामकाज 80 दिनों का हुआ था। 
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कामकाज का समय

सुबह 11 बजे से संसद का कामकाज शुरू होता है और अमूमन 6 बजे तक चलता है। हालांकि कभी-कभी देर रात तक भी कार्यवाही चलती है। इसमें एक बजे से दो बजे तक का समय लंच का होता है। कभी-कभी लंच का समय जरुरत के अनुसार बदले जाने के साथ ही खत्म भी किया जा सकता है। यह निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से स्पीकर का होता है। शनिवार और रविवार को संसद की कार्यवाही नहीं होती है।

साल 2018

इस साल बजट सत्र का दूसरा चरण 6 अप्रैल तक चला था। जिसमें से लोकसभा में 14.1 घंटे औप राज्यसभा में 11.2 घंटे ही बजट पर चर्चा हुई। कामकाज के घंटों के हिसाब से देखें तो साल 2000 सबसे खराब बजट सत्र रहा।

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कब-कब होते हैं संसद के सत्र

बजट सत्र- फरवरी से लेकर मई 
मानसून सत्र- जुलाई से अगस्त-सितंबर 
शीतकालीन सत्र- नवंबर से दिसंबर

कब कितना होता है खर्च

- पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान 144 करोड़ रुपए का खर्च आया था।
- रोजाना 6 घंटे कार्यवाही का समय होता है।
- शीतकालीन सत्र के दौरान 90 घंटे संसद चली।
- हर घंटे 1.44 करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
- एक घंटे संसद चलने की लागत 1.6 करोड़ रुपए आती है।
- प्रति मिनट संसद का खर्च 1.6 लाख रुपए है।

कहां-कैसे आता है खर्च

- सांसदों का वेतन
- सत्र के दौरान सांसदों को मिलने वाले भत्ते
- सचिवालय के कर्मचारियों का वेतन
- सांसदों की सुविधाओं का खर्च
- संसद सचिवालय का खर्च
- सत्र के दौरान सांसदों की सुविधाओं पर खर्च के

कितना होता है सांसदों का वेतन

लोकसभा के आंकड़ों की मानें तो सांसदों को हर महीने वेतन के तौर पर 50,000 रुपए, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के तौर पर 45,000 रुपए, कार्यालय खर्च के लिए 15,000 रुपए और सचिवीय सहायता के लिए 30,000 रुपए मिलते हैं। इस तरह हर सांसद को 1.4 लाख रुपए मिलते हैं। इसके अलावा सांसदों को साल भर में 34 हवाई यात्राओं सहित असीमित रेल और सड़क यात्रा के लिए सरकारी खजाने से पैसा मिलता है।

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