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क्या आपके पास कोविड-19 का प्रमाणपत्र है?
Fri, 22 May 2020 05:33 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 22 May 2020 05:33 PM IST
सार
- कई कंपनियां अपने कर्मचारियों से मांग रही हैं कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट
- अस्पतालों में भी कोरोना प्रमाणपत्र की उठी मांग
- कई हाउसिंग सोसाइटी ने अपने निवासियों से प्रमाणपत्र बनाने को कहा
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कोरोना वायरस
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना से लड़ने और उस पर काबू पाने के लिए सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाया था लेकिन अब धीरे धीरे लॉकडाउन के प्रतिबंधों में छूट मिल रही है और आम लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। कोई काम करने निकल रहा है तो कोई काम ढूंढने के लिए लेकिन इस बीच लोगों के मन में एक सवाल घूम रहा है कि कोई इंसान कोरोना पॉजिटिव नहीं है, ये कैसे पता लगाया जा सकता है...
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अस्पतालों में कोविड-19 पत्र
15 साल का एक लड़का गुर्दे की बीमारी से जूझ रहा था जिसकी 16 मई को मौत हो गई क्योंकि कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट ना होने की वजह से छह अस्पतालों ने लड़के को भर्ती और डायलिसिस करने के लिए मना कर दिया था।
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वहीं एक उद्योगपति को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और बाद में उसकी मौत हो गई थी। कोरोना वायरस का प्रमाणपत्र ना होने की वजह से कोविड अस्पताल में उन्हें एक बिस्तर की सुविधा नहीं मिली। हालांकि राज्यों ने अस्पतालों को सभी मरीज को भर्ती करने की अनुमित दी हुई है।
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घर पर कोरोना सर्टिफिकेट
हरियाणा के गुरुग्राम में एक हाउसिंग सोसाइटी ने अपने निवासियों को उनके घर आने वाले घरेलू कर्मचारी के कोरोना की रिपोर्ट कराने को कहा। सोसाइटी ने इन लोगों को घरों में काम करने से पहले कोरोना वायरस का प्रमाणपत्र लाने को कहा है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी निवासियों से कहा जा रहा है कि अगर आपके पास कोविड-19 का सर्टिफिकेट नहीं होगा तो आपको सोसाइटी में प्रवेश नहीं मिलेगा। एक पत्नी ने अपने पति को घर में आने नहीं दिया क्योंकि उसका पति कोरोना संक्रमित शहर से आया था और उसके पास कोरोना का प्रमाणपत्र नहीं था।
काम पर कोरोना सर्टिफिकेट
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया कि जरूरी सामान ले जा रहे हैं लोगों के लिए ट्रैफिक को कम किया जाए। इसके बाद हरियाणा सरकार ने उन लोगों के लिए कोविड-19 प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया जो जरूरी सामान को लाने ले जाने के लिए पास बनवाते हैं।
बंगलुरू में कई निजी कंपनियों के कर्मचारी सरकारी अस्पताल के बाहर लाइन लगातर खड़े हैं ताकि उनका कोरोना का प्रमाणपत्र बन जाए और वो काम कर सके। हालांकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोई भी कंपनी ऐसी मांग नहीं कर सकती।
दूसरे राज्यों से घर वापस आ रहे प्रवासियों के लिए केरल सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। केरल सरकार के मुताबिक जो लोग बाहर से आ रहे हैं उन्हें कोरोना निगेटिव प्रमाणपत्र साथ लाना होगा, अगर वो घर वापस आना चाहते हैं।
समस्या कहां है?
कोरोना वायरस की रिपोर्ट ले जाना इतना आसान नहीं है। निजी प्रयोगशालाएं कोरोना की रिपोर्ट का परिणाम दो से तीन दिन में दे रही हैं। टेस्टिंग की क्षमता सीमित होने की वजह से कोरोना की रिपोर्ट देर से आ रही है।
अभी सरकार की ओर से इस बात पर नई गाइडलाइंस जारी नहीं की गई हैं लेकिन उम्मीद है कि जल्द सरकार इस दुविधा को हल करेगी कि किसके लिए कोरोना का टेस्ट कराना जरूरी है और कौन कोविड-19 टेस्ट की जांच के लिए कह सकता है।