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भीड़ का अंधा कानून बर्दाश्त नहीं, भीड़ को नहीं है हिंसा की इजाजत : सुप्रीम कोर्ट

Wed, 18 Jul 2018 12:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Jul 2018 12:50 AM IST
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 Do not tolerate the blind law of the crowd, not allowed to do violence: Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा को ‘अंधा कानून’ बताते हुए संसद को इस पर अलग से कानून बनाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून ऐसा हो, जो ऐसे मामलों से सख्ती से निपट सके। जिसका लोगों में डर हो और वे ऐसी हरकतों से दूर रहें। साथ ही सख्त लहजे में कहा कि कानून के राज में भीड़तंत्र और गोरक्षा के नाम पर हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती। 

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को कहा कि कानून के राज में किसी अपराध के लिए सड़क पर जांच, सुनवाई और सजा नहीं दी जा सकती। नागरिकों में सौहार्द को बढ़ावा देना राज्यों की जिम्मेदारी थी। फर्जी और झूठी खबरों के जरिये लोगों को हिंसा के लिए उकसाया गया। बढ़ती असहिष्णुता और ध्रुवीकरण के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं बनने दिया जा सकता। अगर इसे नहीं रोका गया तो यह राक्षसी रूप ले लेगा।
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क्या घट रहा है सहिष्णुता का मूल्य
शीर्ष अदालत ने लिंचिंग से निपटने के लिए निरोधक, उपचारत्मक और दंडात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ किया है कि यह किसी खास मामले तक सीमित नहीं है। भीड़ की हिंसा की लगातार हो रही घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या भारत से सहिष्णुता का मूल्य घटता जा रहा है। 

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर ऐसे होगा अमल

 Do not tolerate the blind law of the crowd, not allowed to do violence: Supreme Court

चार हफ्ते में पेश करनी होगी रिपोर्ट
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी और कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने भीड़ की हिंसा को लेकर कई निर्देश जारी किए। पीठ ने केंद्र व राज्य सरकारों को चार हफ्ते में इनका अनुपालन कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर ऐसे होगा अमल
पीठ ने निर्देश दिया कि भीड़ की हिंसा से निपटने के लिए हर जिले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अफसर नियुक्त करने के साथ ही स्पेशल टास्क फोर्स भी गठित की जाए। ऐसी घटनाओं की आशंका वाले इलाकों की पहचान की जाए। साथ ही भड़काऊ भाषण और झूठी खबरें फैलाकर लोगों को हिंसा के लिए उकसाने वाले लोगों से सख्ती से निपटा जाए।

केंद्र और राज्य मिलकर इसके लिए काम करें। घटना होने पर तत्काल कार्रवाई हो और इससे जुडे़ मुकदमे तेजी से निपटाए जाएं। पीड़ित के परिजनों को मुआवजा दें। इन निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहने वाले अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाए।

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