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Katchatheevu: ‘कच्चातिवु को लेकर DMK का गैर-जिम्मेदाराना बयान’, निर्मला सीतारमण बोलीं- वे सब जानते थे लेकिन...

Tue, 02 Apr 2024 05:46 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Tue, 02 Apr 2024 05:46 PM IST
सार

Katchatheevu: केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कच्चातिवु मामले में कांग्रेस और डीएमके के नेता गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जनता के सामने पूरा सच आना चाहिए। 

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DMK spreading false propaganda on Katchatheevu, says Nirmala Sitharaman
निर्मला सीतारमण - फोटो : PIB

विस्तार

लोकसभा चुनाव से पहले कच्चातिवु को लेकर देशभर में राजनीति गरमाई हुई है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी इस मामले को लेकर विपक्ष पर हमला बोल रही है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अब केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले में डीएमके पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया है।   

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‘एम करुणानिधि सब जानते थे लेकिन आपत्ति नहीं जताई’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डीएमके अध्यक्ष दिवंगत एम करुणानिधि उस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे और सत्ता के शीर्ष पर बैठी कांग्रेस के कदम से भली भांति अवगत थे। इसके बाद भी उन्होंने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कच्चातिवु को 'चट्टान का एक छोटा सा समूह' कहा था। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इस द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने को लेकर कांग्रेस और डीएमके पर हमला बोला था।
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अब निर्मला सीतारमण का कहना है कि कांग्रेस और डीएमके द्वारा उस सच को उजागर कर देना चाहिए, जिसे वे आधी सदी से छुपाते चले आए हैं।

डीएमके के आरोपों का दिया जवाब
उधर डीएमके का कहना है कि इस द्वीप को उनकी जानकारी के बिना ही श्रीलंका को सौंपा गया और भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले इसे जबरन बड़ा मुद्दा बना रही है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डीएमके द्वारा झूठा अभियान फैलाया जा रहा है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। सीतारमण ने दावा किया कि भाजपा के पास उन्हें गलत साबित करने के लिए दस्तावेज के रूप में साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा देश की सुरक्षा, संप्रभुता के साथ साथ भारतीय मछुआरों के जीवन से भी जुड़ा है। इसलिए इसे अलग करके नहीं देखा जा सकता।
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सबसे बड़ी समस्या भारतीय मछुआरों की- पूर्व विदेश सचिव
कच्चातिवु के मुद्दे पर पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि श्रीलंका और भारत के संबंधों के बीच हमारे सामने मुख्य समस्या मछुआरों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मछुआरों के संबंध में आज हम जिस मुद्दे का सामना कर रहे हैं, वह 1974 और 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों के कारण हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर हमने पहले से कच्चातिवु द्वीप को भारत के हिस्से में सीमांकित किया होता तो 1976 के बाद से श्रीलंका में बंदी भारतीय मछुआरों पर अत्याचार नहीं होते। 

डीएमके और कांग्रेस को जवाबदेह होना होगा- मुरुगन
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन का कहना है कि जब से कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंपा गया है, तब से मछुआरे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने डीएमके सरकार की मदद से इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया था और इस दौरान मछुआरों के कल्याण के बारे में कभी भी चिंता नहीं की गई। मछुआरों को अभी भी कांग्रेस और द्रमुक सरकार की विफलता के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मुरुगन के अनुसार द्रमुक और कांग्रेस को मछुआरा समुदाय के प्रति जवाबदेह होना होगा।


कहां है कच्चातिवु द्वीप? 
कच्चातिवु पाक जलडमरूमध्य में एक छोटा सा द्वीप है, जो बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। 285 एकड़ हरित क्षेत्र 1976 तक भारत का था। हालांकि, श्रीलंका और भारत के बीच एक विवादित क्षेत्र है, जिस पर आज श्रीलंका हक जताता है। दरअसल, साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समकक्ष श्रीलंकाई राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के साथ 1974-76 के बीच चार समुद्री सीमा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन्हीं समझौते के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया।

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