फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   DMK leader Kanimozhi and NCP leader supriya sule defended rahul gandhi on his remarkable statement

कनिमोझी ने 'रेप इन इंडिया' वाले बयान पर राहुल गांधी का बचाव कर एक तीर से साधे कई निशाने

Sat, 14 Dec 2019 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 14 Dec 2019 07:21 PM IST
विज्ञापन
DMK leader Kanimozhi and NCP leader supriya sule defended rahul gandhi on his remarkable statement
Kanimozhi and Supriya Sule - फोटो : Facebook (सांकेतिक)

संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी को उनके एक बयान के चलते घेरने का पूरा प्रयास किया। राहुल गांधी एक रैली में 'रेप इन इंडिया' का बयान दिया था। उनके इसी बयान को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित भाजपा के कई सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। भाजपा सांसदों ने इस बयान पर राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की।

विज्ञापन


इस हंगामे के बीच दो महिला सांसद डीएमके की कनिमोझी और एनसीपी की सुप्रिया सूले चुप बैठी थीं। भाजपा की महिला सांसदों ने इन दोनों से अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा कि वे बताएं इस मामले में किस ओर हैं।
विज्ञापन


कनिमोझी ने जब इस पर बोलना शुरू किया, तो उन्होंने एक तीर से कई निशाने लगा डाले। उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा, देश में मेक इन इंडिया तो है ही नहीं। बल्कि दुर्भाग्य से देश की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उनका यह बयान तमिलनाडु की राजनीति समझने वालों के लिए काफी था। सदन में कनिमोझी का यह अंदाज खासतौर पर, भाजपा और उसके सहयोगी दलों को रास न आया हो, लेकिन कांग्रेस उससे खुश नजर आई।

विज्ञापन
विज्ञापन


वजह, तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति के फेर में कांग्रेस और डीएमके को मिलकर चलना होगा। इन दोनों पार्टियों को यह बात अच्छी तरह मालूम है कि वे अलग-अलग राह पर चलकर एनडीए व एआईएडीएमके का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।

कनीमोझी ने कहा, राहुल गांधी का यह बयान सदन से बाहर दिया गया है। प्रधानमंत्री जी ने मेक इन इंडिया कहा है। हम इसका सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि चीजें भारत में बनें। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़े, लेकिन महोदय इस देश में हो क्या रहा है। राहुल गांधी के कहने का अर्थ क्या था। वह कहना चाहते थे कि देश में मेक इन इंडिया तो है ही नहीं, बल्कि दुर्भाग्य से महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उनके साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं।

वे अपनी यही चिंता जाहिर कर रहे थे। कनीमोझी ने राहुल गांधी का बचाव कर तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के साथ साथ चलने का इशारा कर दिया है।साथ ही यह भी बता दिया कि एनडीए को दक्षिण भारत में उतनी आसानी से स्थापित नहीं होने देंगे।

तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके को सत्ता में लौटना है

कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए भले ही अच्छे नहीं रहे, लेकिन दक्षिण भारत से पार्टी के लिए राहत भरी खबर आई थी। कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से पार्टी ने 8 सीटें जीत लीं। पार्टी को 12 फीसदी वोट मिले। तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के इन नतीजों को देखकर यह कहा जाने लगा कि पार्टी दोबारा से अपने पैरों पर खड़ी हो रही है।

1967 में राज्य में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस पार्टी अन्नाद्रमुक या द्रमुक की पिछलग्गू बनकर रह गई थी। तभी से लेकर अब तक पार्टी अपने पांव पर नहीं खड़ी हो सकी। लोकसभा चुनाव के नतीजों से यह उम्मीद बंधने लगी है कि पार्टी अब अपना खोया हुआ जनाधान वापस पा सकती है। बशर्ते उसे डीएमके को साथ लेकर चलना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है निश्चित ही कांग्रेस तमिलनाडु में पुनर्जीवित होने की स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव में बेशक यह कहें कि कांग्रेस को वह जीत केवल द्रमुक के साथ होने की वजह से नहीं मिली है। तमिलनाडु के मतदाताओं ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को वोट दिया था।

द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने राहुल को प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में यहां के लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया था। इसके बाद लोगों ने 1989 में राजीव गांधी के पक्ष में मतदान किया था। इस बार के लोकसभा चुनाव में फिर से लोगों ने राहुल गांधी को वोट दिया है। यह तय है कि दक्षिण भारत में मोदी को रोकना है तो अभी कांग्रेस और डीएमके को साथ चलना होगा। लोकसभा चुनाव में डीएमके को 38 में से 23 सीटें मिली थीं।

कांग्रेस ने जताई थी खुशी

पिछले वर्ष निचली अदालत ने सीबीआई के टूजी मामले में राजा, कनिमोई, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया, स्वान टेलिकॉम के प्रमोटरों शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और अनिल धीरूबाई अंबानी रिलायंस समूह के तीन शीर्ष प्रबंधकों गौतम दोशी, सुरेंद्र पीपारा और हरि नायर को बरी कर दिया था। तब कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था, कि अब साबित हो गया है कि तत्कालीन विपक्ष ने बिना किसी सबूत के यूपीए सरकार पर निराधार आरोप लगाए थे।

सिब्बल ने कहा था कि तत्कालीन कैग विनोद राय ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ साजिश की थी। इस फैसले ने साबित कर दिया है कि राय की निष्ठा किस ओर थी। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, एक हाई प्रोफाइल दो लाख करोड़ के घोटाले में सरकार के वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों के शामिल होने की बातें पूरी तरह से निराधार थीं। हम हमेशा यही कहते रहे और मुझे बेहद खुशी है कि सत्य की जीत हुई है।



लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी फैसले पर खुशी जताई थी। उन्होंने कहा था कि निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। देश की न्यायपालिका ने वैसे ही काम किया जैसे उसे करना चाहिए। इससे कांग्रेस और डीएमके के रिश्ते और ज्यादा मजबूत हुए थे।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed