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एसआईआर के बाद एसएसआर पर विवाद शुरू: डीएमके ने इस प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल, चुनाव आयोग पर साधा निशाना

Fri, 16 Oct 2026 03:55 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 16 Oct 2026 03:55 PM IST
सार

तमिलनाडु की डीएमके ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने विपक्ष को शांत करने के लिए एसएसआर शुरू किया है। आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया चला रहा है। मसौदा सूची 12 नवंबर को और अंतिम सूची चार जनवरी 2027 को आएगी। क्या एसएसआर में मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहेंगे? गड़बड़ी मिलने पर विपक्ष क्या कदम उठाएगा?

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DMK Alleges Election Commission’s SSR Exercise Aims to Silence Opposition After SIR Voter Deletions
क्या एसएसआर के जरिए विपक्ष को शांत करना चाहता है चुनाव आयोग? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों को शांत करने के लिए एसएसआर की प्रक्रिया शुरू की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई, तो वह इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेगी। डीएमके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के रुख पर भी सवाल उठाए हैं।

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चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा की है। इसके लिए एक जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय की गई है। कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होगा। इसके बाद मतदाता अपने दावे और आपत्तियां 11 दिसंबर तक दर्ज करा सकेंगे। अंतिम मतदाता सूची चार जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी। डीएमके के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने आरोप लगाया कि एसआईआर में नाम हटाए जाने के बाद एसएसआर के जरिए समझौते जैसी स्थिति बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया पर नजर रखेगा और गड़बड़ी मिलने पर विरोध करेगा।
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क्या एसएसआर के जरिए विपक्ष को शांत करना चाहता है चुनाव आयोग?
एलंगोवन ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और अब एसएसआर के जरिए विपक्षी दलों को शांत करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल फिलहाल इंतजार करेंगे कि नई प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। अगर एसएसआर में भी गलतियां सामने आती हैं, तो वे इसके खिलाफ लड़ेंगे। डीएमके नेता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा का नाम लेकर मुख्यमंत्री विजय से भी खुलकर सवाल उठाने की मांग की। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री केवल गड़बड़ी होने की बात कहते हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों का नाम नहीं लेते। एलंगोवन ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सीधे टकराव से बच रहे हैं। ये आरोप डीएमके नेता ने लगाए हैं।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर डीएमके ने क्या आरोप लगाए?
एलंगोवन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संस्था केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में झुकी हुई है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन करने वाले अभिनेता इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने का भी जिक्र किया। इसके अलावा, तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा क्षेत्र में जिला कलेक्टर के मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने की खबर पर उन्होंने टिप्पणी की कि शायद वहां चुनाव की तैयारी की जा रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात का कोई प्रमाण नहीं दिया कि निरीक्षण का उद्देश्य चुनाव की तैयारी करना ही था।


पेरियार केंद्र और विधायकों के पाला बदलने पर क्या बोले एलंगोवन?
कोयंबटूर में पेरियार अरिवुलगम ज्ञान केंद्र के उद्घाटन को एलंगोवन ने समाज सुधारक पेरियार की विरासत को समर्पित गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की नींव और निर्माण पिछली डीएमके सरकार ने कराया था, लेकिन उद्घाटन मुख्यमंत्री विजय कर रहे हैं। उनके मुताबिक, उद्घाटन कोई भी करे, सम्मान पेरियार को मिलना चाहिए। वहीं, विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर राज्यपाल से शिकायत करने वाली अन्नाद्रमुक के रुख का उन्होंने समर्थन किया। एलंगोवन ने टीवीके में शामिल होने के लिए 15 विधायकों के तैयार होने के दावों का उल्लेख किया। उन्होंने बढ़ती कीमतों के बीच महंगे चावल की जमाखोरी के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया।

मछुआरों के मुद्दे पर सरकार को लेकर क्या सवाल उठाए गए?
एलंगोवन ने मछुआरों की समस्याओं को लेकर विदेश मंत्रालय से अपील करने में हुई देरी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी जनता की परेशानी और मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। उनके मुताबिक, व्यक्तिगत फैसलों में ज्योतिषीय सलाह को महत्व दिया जा रहा है, जबकि आम लोगों की समस्याएं पीछे छूट रही हैं। इस तरह डीएमके ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लेकर राज्य सरकार के कामकाज तक कई मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, एसएसआर में गड़बड़ी होने का आरोप अभी डीएमके की आशंका है। पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ही इससे जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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