कर्नाटक का रण: विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कसी कमर, शिवकुमार बोले- 170 उम्मीदवारों के नाम पर बनी सहमति
कांग्रेस ने दावा किया है कि कर्नाटक विधानसभा में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। मंगलवार को राज्य कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने भी ऐसा ही एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि हाल के एक सर्वेक्षण में पार्टी के लिए 140 से अधिक सीटों की भविष्यवाणी की गई है।
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कर्नाटक में इसी साल मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पहले ही राज्य में सक्रिय है। वहीं, अब कांग्रेस ने भी इसके लिए कमर कस ली है। गुरुवार को कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने इसके संकेत दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी ने अब तक लगभग 170 विधानसभा क्षेत्रों में टिकट वितरण पर चर्चा की है। इतना ही नहीं, जिन लोगों के नामों पर इसमें विचार किया गया है उनपर सबकी आम सहमति है।
170 सीटों पर की गई चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि हमने अब तक 170 सीटों पर चर्चा की है। अभी भी लगभग 50 सीटें बाकी हैं। हम चर्चा कर अपनी राय केंद्रीय चुनाव समिति को भेजेंगे। शिवकुमार ने कहा कि जिन सीटों को लेकर चर्चा की गई है उनपर हम एकमत है, सब कुछ बिना किसी भ्रम के सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों तक पहुंचने की भी कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने टिकट के लिए आवेदन किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उम्मीदवारों पर एक राय कायम हो सके।
भाजपा को हराकर हम सत्ता में आएंगे- शिवकुमार
राज्य कांग्रेस प्रमुख ने आगे बताया कि वे खुद बुधवार से करीब 50-60 विधानसभा क्षेत्रों में मतभेदों को दूर करने के लिए नेताओं और टिकट चाहने वालों को फोन कर रहे हैं। ताकि किसी प्रकार का कोई मनभेद न हो सके। डीके शिवकुमार ने आगे कहा कि उनका मानना है कि कांग्रेस चुनाव जीतेगी और भाजपा को हराकर सत्ता में आएगी।
जीतने की क्षमता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण - डीके
इस दौरान कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने कहा कि जीतने की क्षमता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है न कि व्यक्तियों के लिए। इसे ध्यान में रखते हुए हम उम्मीदवारों का चयन करेंगे। साथ ही सामाजिक न्याय और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता को भी ध्यान में रखा जाएगा।
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कांग्रेस ने दावा किया है कि कर्नाटक विधानसभा में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। मंगलवार को राज्य कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने भी ऐसा ही एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि हाल के एक सर्वेक्षण में पार्टी के लिए 140 से अधिक सीटों की भविष्यवाणी की गई है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश विधानसभा चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष हैं। वहीं, पार्टी नेता नीरज डांगी, मोहम्मद जावेद और सप्तगिरी उलाका इसके सदस्य हैं।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए EC की टीम पहुंची कर्नाटक
इस बीच, विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए EC की टीम कर्नाटक पहुंची है। इस टीम का नेतृत्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार कर रहे हैं। इसमें चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे और अरुण गोयल भी हैं। टीम कर्नाटक के तीन दिवसीय दौरे पर है, जहां मई में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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बेंगलुरु पहुंचने के बाद टीम ने गुरुवार को विकास सौधा में कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार मीणा और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। ये टीम विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से उनके सुझाव, राय और शिकायतें प्राप्त करने के लिए बातचीत करेगी। साथ ही चुनाव आयोग की टीम 'समावेशी चुनाव और चुनाव अखंडता' पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी भाग लेगी। इसमें विभिन्न लोकतांत्रिक देशों के चुनाव आयुक्त भाग लेंगे।
वहीं, चुनाव आयोग आगामी चुनाव को लेकर की जा रही तैयारियों को लेकर 10 मार्च को सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ बैठक करेगा। दिल्ली लौटने से पहले चुनाव आयुक्त 11 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
कर्नाटक में बीजेपी एमएलसी ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया, कांग्रेस में शामिल हुए
कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा को एक और झटका लगा है। यहां गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी विधान परिषद सदस्य पुत्तन्ना ने पार्टी छोड़ कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस की सदस्यता लेते समय उन्होंने सरकार पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
विधान परिषद के चार बार के सदस्य पुत्तना बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण और रामनगर जिलों के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्हें अक्टूबर 2020 में परिषद के लिए फिर से चुना गया था। उन्होंने कहा कि आज मैने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मैंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के अध्यक्ष के कार्यालय को सौंप दिया है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में व्याप्त भ्रष्टाचार ने उन्हें निर्णय लेने के लिए मजबूर किया।